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History of Diwali : अनोखी है दिपावली की कहानी, हर प्रांत में बदल जाते हैं नाम

"The Many Faces of Diwali: A New Name, A New Story in Every Indian State"

Diwali Rangoli Traditions in India: क्या आप जानते हैं, हर राज्य में रंगोली एक जैसी नहीं होती हैं, अलग-अलग तरीकों से बनाई जाती हैं. कहीं मिट्टी से तो कहीं फूलों से. भारत के हर राज्य में रंगोली बनाने का तरीका और उसका मतलब अलग-अलग होता है. आइए आज हम आपको बताएंगे दिवाली की इस रंगीन परंपरा की अनोखी कहानी के बारे में.

1. कोलम (तमिलनाडु)
दक्षिण भारत में रंगोली को कोलम कहा जाता है. इसे चावल के आटे या सफेद पाउडर से बनाया जाता है. वैसे तो कोलम रोज सुबह घर के आंगन में बनाया जाता है. लेकिन दिवाली वाले दिन इसे रंगीन पाउडर, दीपकों और फूलों से और भी सुंदर बनाया जाता है. इसके डिजाइन बिंदुओं और अलग-अलग आकारों से बनाए जाते हैं, जो देखने में साफ और सुंदर लगते है.

2. मुग्गुलु  (आंध्र प्रदेश और तेलंगाना)

यहां रंगोली को मुग्गुलु कहते है. इस रंगोली को खासतौर पर दिवाली और संक्रांति के त्योहारों पर बनाया जाता है. सुबह के टाइम महिलाएं दरवाजे के पास रंग-बिरंगी डिजाइन बनाती हैं.

3. अल्पना (पश्चिम बंगाल)
पश्चिम बंगाल में दिवाली को काली पूजा के रूप में मनाया जाता है. इस दिन घरों में अल्पना बनाई जाती है, जो चावल के घोल से तैयार की जाती है. इसमें लक्ष्मी के पैर, कमल के फूल और स्वस्तिक के डिजाइन बनाए जाते है.

4. चौक पूरना ( उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य भारत)
उत्तर भारत में दिवाली पर चौक पूरना या अरिपन बनाने की परंपरा है. इसे गोबर, मिट्टी और चावल के घोल से बनाया जाता है. इसके डिजाइन गोल या चौकोर होते हैं, जिनमें फूल, पत्ते और दीपक की अलग-अलग आकार बनती हैं. माना जाता है कि इससे देवी लक्ष्मी घर में प्रवेश करती हैं और घर में शांति और खुशियां आती है.

5. मांडना (राजस्थान और मध्य प्रदेश)
राजस्थान और एमपी के गांवों में रंगोली को मांडना कहा जाता है. इसे दीवारों और फर्श पर लाल मिट्टी के ऊपर सफेद चूने या मिट्टी से बनाया जाता है.इसके डिजाइन में मोर, ऊंट, सूर्य, मंदिर और दीपक जैसे प्रतीक होते हैं. दिवाली पर इसे बहुत सजावट और ध्यान के साथ बनाया जाता है ताकि घर में सुंदरता बनी रहे.

6. सांझी  उत्तर प्रदेश (मथुरा और वृंदावन)
सांझी एक खास धार्मिक कला है जो भगवान कृष्ण और राधा की कहानियों से जुड़ी हुई है. इसमें रंगीन मिट्टी, फूलों की पंखुड़ियां और सूखे रंगों से सुंदर चित्र बनाए जाते हैं. इसे खासकर दिवाली और काली पूजा के समय बनाया जाता है.

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