
नवी मुंबई में अभिजात मराठी भाषा दिवस का आयोजन
Elite Marathi Language Day organised in Navi Mumbai
नवी मुंबई/प्रतिनिधि: नवी मुंबई महानगरपालिका में नवी मुंबई के साहित्यप्रेमियों और कर्मचारियों की उपस्थिति में अभिजात मराठी भाषा दिवस का आयोजन उत्साह और ज्ञानवर्धक विचार विमर्श के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर साहित्यिक और साहित्य अकादमी, नई दिल्ली के सदस्य डॉ. नरेंद्र पाठक ने “अभिजात मराठी, अभिमान मराठी” विषय पर अपने विचार साझा किए।
डॉ. पाठक ने कहा कि मराठी भाषा का अभिजातपण (उच्च कोटि का दर्जा) हमारे लिए गौरव का विषय है, और इसे संरक्षित करने के साथ-साथ उसके विकास की जिम्मेदारी भी प्रत्येक नागरिक की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मराठी भाषा का अधिक से अधिक प्रयोग करना हमारी जिम्मेदारी है, और इसे दैनिक जीवन में अपनाना चाहिए।
नवी मुंबई की साहित्यिक पहल और भाषा संवर्धन
डॉ. पाठक ने नवी मुंबई को मराठी भाषा का गौरव बढ़ाने वाला शहर बताते हुए कहा कि महानगरपालिका द्वारा शहर में लगाए गए चित्रकविता भिंतें और साहित्यिक उपक्रम शहर की अलग पहचान बनाने में मदद कर रहे हैं। उन्होंने तामीळ भाषा की ऐतिहासिक यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि हमें मराठी भाषा के विकास के लिए वैसा ही समर्पित प्रयास करना चाहिए, जैसा तामीळ भाषियों ने अपनी भाषा को अभिजात दर्जा दिलाने के लिए किया।
उन्होंने कहा कि भाषा का अभिजातपण और दैनिक जीवन में उसका प्रयोग दो अलग चीजें हैं। इसके लिए प्राचीन ग्रंथों जैसे ‘गाथा सप्तशती’ का अध्ययन कर हम अपनी पुरानी साहित्यिक परंपरा को समझ सकते हैं और नई पीढ़ी तक इसे पहुंचा सकते हैं। उन्होंने स्वयं अपने नातियों को बचपन से ही मराठी में ओव्या, अभंग और कविताएँ सुनाने का अनुभव साझा किया, ताकि भाषा का संस्कार घर-घर में जाए।
नई पीढ़ी और भाषा का भविष्य
डॉ. पाठक ने कहा कि आज की नई पीढ़ी, जो अक्सर अंग्रेजी माध्यम में पढ़ती है, उसे घर से ही मराठी का आधारभूत संस्कार देना जरूरी है। इसके लिए घर, वसाहती और सोसाइटी में मराठी बोलने की आदत विकसित करनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मराठी में अर्थपूर्ण सामग्री उपलब्ध कराना, ताकि युवा इसे सीखें और अपनाएं, बेहद महत्वपूर्ण है।
डॉ. पाठक ने कविवर्य कुसुमाग्रज के शब्दों का उल्लेख किया – “भाषा मरती है तो देश भी मरता है, संस्कृति का दीपक भी बुझ जाता है”, और कहा कि इसी दृष्टि से मराठी भाषा का प्रचार-प्रसार और लेखन बढ़ाना चाहिए।
अतिरिक्त आयुक्त सुनिल पवार का संदेश
अतिरिक्त आयुक्त सुनिल पवार ने कहा कि मराठी साहित्य का इतिहास लगभग 2000 वर्षों का है, जिसमें संत साहित्य का विशेष योगदान है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज सोशल मीडिया के युग में हम जहां स्टेटस और रील्स में सक्रिय हैं, उसी तरह मराठी भाषा और साहित्य के प्रति जागरूक नहीं हैं। इसलिए मराठी भाषा के अभिजात दर्जे का गर्व करते हुए, हमें मराठी में बोलना और शुद्ध लिखना जारी रखना चाहिए।
उन्होंने यह भी बताया कि नवी मुंबई महानगरपालिका लोकसहभाग और प्रशासनिक प्रयासों के माध्यम से कर्मचारियों और नागरिकों में साहित्यिक रुचि जागृत करने के लिए निरंतर पहल कर रही है। कार्यक्रम में नवी मुंबई महानगरपालिका के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे, जिनमें शामिल हैं: प्रशासन विभाग के उपायुक्त किसनराव पलांडे मुख्य लेखा एवं वित्त अधिकारी सत्यवान उबाळे उपायुक्त सर्वश्री सोमनाथ पोटरे, संजय शिंदे, संघरत्ना खिल्लारे डॉ. कैलास गायकवाड़, ललिता बाबर महापालिका सचिव चित्रा बाविस्कर विधि अधिकारी अभय जाधव इस्टेट मैनेजर अशोक अहिरे, कार्यकारी अभियंता सुधीर जांभवडेकर, सहा. आयुक्त ऋतुजा गवळी, शिक्षण अधिकारी सुलभा बारघारे साथ ही, महापालिका कर्मचारी, शिक्षक और नवी मुंबई के साहित्यप्रेमी नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
अभिजात मराठी भाषा सप्ताह के अंतर्गत अगले कार्यक्रम में ‘अभिजात मराठी में शुद्धलेखन’ विषय पर लेखक एवं गजलकार श्री. जनार्दन म्हात्रे का व्याख्यान आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम 07 अक्टूबर 2025, सुबह 11 बजे, नवी मुंबई महानगरपालिका मुख्यालय, ज्ञानकेंद्र, तीसरी मंजिल पर आयोजित किया जाएगा। प्रवेश नि:शुल्क है और सभी रसिक उपस्थित होने के लिए आमंत्रित हैं। इस आयोजन ने यह स्पष्ट किया कि नवी मुंबई में मराठी भाषा के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार के लिए प्रशासन और नागरिक एक साथ हैं, और आने वाली पीढ़ी में भाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे



