
दिवाली अंक से दिवाली बनी ज्ञान का उत्सव – महाराष्ट्र राज्य साहित्य एवं संस्कृति मंडल अध्यक्ष सदानंद मोरे
Diwali Issue Makes Diwali a Celebration of Knowledge – Maharashtra State Literature and Culture Board President Sadanand More
पनवेल/सुमित गायकवाड: मराठी साहित्य में दिवाली अंक का स्थान बेहद महत्वपूर्ण है। दिवाली केवल फराल, पटाखे और आनंद तक सीमित नहीं है, बल्कि दिवाली अंकों के माध्यम से ज्ञान, विचार, साहित्य और संस्कृति का संरक्षण और संवर्धन करने की परंपरा भी है। इसलिए दिवाली पर्व वास्तव में दिवाली अंक के साथ-साथ ज्ञान का उत्सव भी है। ऐसा प्रतिपादन महाराष्ट्र राज्य साहित्य एवं संस्कृति मंडल के अध्यक्ष सदानंद मोरे ने किया।
वे 24वीं राज्यस्तरीय और रायगढ़ जिल्हास्तरीय दिवाली अंक प्रतियोगिता के पारितोषिक वितरण समारोह में बोल रहे थे। यह कार्यक्रम श्री. रामशेठ ठाकूर सामाजिक विकास मंडल और मुंबई मराठी पत्रकार संघ के संयुक्त तत्वावधान में पनवेल के आद्य क्रांतिवीर वासुदेव बळवंत फडके नाट्यगृह में माजी खासदार लोकनेते रामशेठ ठाकूर की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। इसी अवसर पर सदानंद मोरे के हाथों दिवाली अंक प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया गया।
कार्यक्रम में प्रमुख अतिथियों में विधायक प्रशांत ठाकूर, माजी नगराध्यक्ष जे.एम. म्हात्रे, वरिष्ठ पत्रकार मधुकर भावे, अखिल भारतीय मराठी पत्रकार परिषद के अध्यक्ष एस.एम. देशमुख, मुंबई मराठी पत्रकार संघ के अध्यक्ष संदीप चव्हाण, मंडल के उपाध्यक्ष अरुणशेठ भगत, सचिव परेश ठाकूर, विश्वस्त राही भिडे, देवदास मटाले, कार्यवाह शैलेंद्र चव्हाण, भाजपा जिलाध्यक्ष अविनाश कोळी, प्रतियोगिता समन्वयक दीपक म्हात्रे समेत अनेक मान्यवर उपस्थित थे।
मोरे ने कहा कि शताब्दी पुरानी इस दिवाली अंक प्रतियोगिता को प्रोत्साहित कर परंपरा को सम्मानित करने का काम श्री. रामशेठ ठाकूर सामाजिक विकास मंडल और मुंबई मराठी पत्रकार संघ कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिवाली अंक लेखन और वाचन संस्कृति को बढ़ावा देते हैं, इसलिए यह मराठी साहित्य का अभिन्न हिस्सा हैं।
रामशेठ ठाकूर का संबोधन
लोकनेते रामशेठ ठाकूर ने कहा कि 24 वर्षों से आयोजित हो रही इस प्रतियोगिता ने दिवाली अंकों की संख्या और गुणवत्ता में उल्लेखनीय वृद्धि की है। डिजिटल युग में भी समाचारपत्र और दिवाली अंक का महत्व आज भी कायम है। उन्होंने कहा कि “90 प्रतिशत पत्रकार दिवाली अंकों का निर्माण करते हैं, और यह प्रतियोगिता लेखन-वाचन की संस्कृति को और समृद्ध करती है। दिवाली अंकों की गोडी कभी कम नहीं होगी।”
वरिष्ठ पत्रकार मधुकर भावे का मत
वरिष्ठ पत्रकार मधुकर भावे ने ठाकूर परिवार द्वारा समाजोपयोगी कार्यों का विशेष उल्लेख किया और कहा कि “रामशेठ ठाकूर दरवर्षी चार लाख रुपये से अधिक की राशि पुरस्कारस्वरूप देकर दिवाली अंकों को प्रोत्साहन देते हैं। उनका कार्य इतना महान है कि उन पर उपन्यास लिखा जा सकता है।”
प्रतियोगिता परिणाम
राज्यस्तरीय सर्वश्रेष्ठ दिवाली अंक का पहला पुरस्कार (₹1,00,000 और सम्मानचिह्न) हंस अंक को दिया गया। रायगढ़ जिल्हास्तरीय प्रथम पुरस्कार इंद्रधनु अंक को (₹40,000 और सम्मानचिह्न) प्राप्त हुआ।
- राज्यस्तरीय द्वितीय पुरस्कार : अंतरीचे प्रतिबिंब
- तृतीय पुरस्कार : अक्षर
- सर्वश्रेष्ठ विशेषांक : नवभारत
- सर्वश्रेष्ठ बाल अंक : वयम
- सर्वश्रेष्ठ कथा : सत्याग्रह (मिलिंद बोकील)
- सर्वश्रेष्ठ कविता : आजकाल बायकाही… (लक्ष्मी यादव)
- सर्वश्रेष्ठ व्यंगचित्रकार : प्रभाकर वाईरकर
- सर्वश्रेष्ठ डिजिटल अंक : विवेक मेहेत्रे (उद्वेली – ऑल द बेस्ट 2024)
रायगढ़ जिल्हास्तरीय द्वितीय पुरस्कार आगरी दर्पण तथा तृतीय पुरस्कार शब्दसंवाद ने प्राप्त किया।
सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशिष शेलार की शुभेच्छा
राज्य के सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशिष शेलार कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो सके, किंतु विशेष संदेश और वीडियो भेजकर उन्होंने इस प्रतियोगिता की सराहना की और आयोजकों को शुभकामनाएं दी।
विधायक प्रशांत ठाकूर
“श्री. रामशेठ ठाकूर सामाजिक विकास मंडल 1995 से सामाजिक, शैक्षणिक, कला, क्रीड़ा और वैद्यकीय क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। इसी में दिवाली अंक स्पर्धा विशेष ठरती है। रायगढ़ से शुरू हुई यह प्रतियोगिता आज राज्य स्तर तक पहुंची है और सृजनशीलते का महोत्सव बन गई है।”दिवाली अंक महाराष्ट्र की अद्वितीय सांस्कृतिक परंपरा है, जिसकी शुरुआत 1910 में हुई थी। साहित्य, कला, समाजजीवन और नवविचारों का संगम कराने वाली यह परंपरा आज भी तेजस्वी रूप से जीवित है। राज्यस्तरीय दिवाली अंक स्पर्धा इस परंपरा को नई ऊर्जा देने वाला महत्वपूर्ण उपक्रम सिद्ध हो रहा है।



