उपराष्ट्रपति चुनाव: सुप्रिया सुळे का बीजेपी पर तीखा हमला, ‘क्रॉसवोटिंग नहीं, ये तो वोटचोरी है!’
Vice Presidential Election: Supriya Sule's scathing attack on BJP, 'This is not cross-voting, this is vote theft!'
पुणे/प्रतिनिधि: देश में हाल ही में हुए उप-राष्ट्रपति चुनाव में NDA उम्मीदवार सी. पी. राधाकृष्णन ने स्पष्ट बहुमत से जीत दर्ज की। हालांकि, चुनाव परिणाम के बाद अब राजनीतिक गलियारों में क्रॉसवोटिंग को लेकर गर्मा-गर्मी तेज हो गई है। इस बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की वरिष्ठ नेता और सांसद सुप्रिया सुले ने भाजपा द्वारा लगाए गए क्रॉसवोटिंग के आरोपों पर पलटवार करते हुए इसे “वोट चोरी” जैसा करार दिया है।
क्या है मामला?
उप-राष्ट्रपति पद के लिए हाल ही में चुनाव संपन्न हुए, जिसमें एनडीए उम्मीदवार सी. पी. राधाकृष्णन को बहुमत प्राप्त हुआ। लेकिन भाजपा ने दावा किया है कि करीब 40 मतों में क्रॉसवोटिंग हुई, जिसमें कुछ मत विपक्ष के नेताओं द्वारा NDA के पक्ष में डाले गए। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सुप्रिया सुले ने पुणे में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि मतदान गुप्त (secret ballot) होता है। ऐसे में भाजपा को यह कैसे पता चला कि कौन सा वोट किस पार्टी का था?
सुप्रिया सुले ने भाजपा नेताओं पर साधा निशाना
सुले ने भाजपा नेता संजय जयसवाल के बयान का हवाला देते हुए कहा “भाजपा कह रही है कि उन्हें 15 वोट ज्यादा मिले, और ये वोट शिवसेना या राष्ट्रवादी कांग्रेस के थे। लेकिन क्या उन्होंने इसे मार्क किया था? गुप्त मतदान में कोई पहचान संभव नहीं होती। फिर यह कैसे तय हुआ कि वोट किस पार्टी से क्रॉस हुआ?” अगर भाजपा को मालूम है कि किसने किसे वोट दिया, तो यह सीधा-सीधा ‘वोट चोरी’ का मामला है। इससे साफ होता है कि वोटिंग की गोपनीयता खत्म हो चुकी है।”
“YSR कांग्रेस को भी दोष देना हास्यास्पद”
सुप्रिया सुले ने यह भी कहा कि भाजपा द्वारा क्रॉसवोटिंग के लिए YSR कांग्रेस को भी जिम्मेदार ठहराना बेहद अजीब है। “YSR कांग्रेस पिछले 5 सालों से भाजपा की सहयोगी रही है। अब अगर उनके 11 वोट NDA को मिले, तो इसे इंडिया गठबंधन का दोष कैसे ठहराया जा सकता है?”
मराठी नेताओं को ही क्यों दोष?
सुले ने यह सवाल भी उठाया कि जब 14 वोट क्रॉस हुए, तो भाजपा सिर्फ महाराष्ट्र के नेताओं को ही दोष क्यों दे रही है? “क्या भाजपा का यह कहना है कि गद्दारी सिर्फ मराठी नेताओं ने की है? देश भर से सांसदों ने मतदान किया है। सिर्फ महाराष्ट्र को टारगेट करना राजनीतिक दुर्भावना का संकेत है।” “तीन बार प्रैक्टिस के बाद भी भाजपा के 10 वोट अवैध कैसे हुए?” सुप्रिया सुले ने भाजपा के उन 10 वोटों पर भी सवाल उठाया जो अवैध घोषित हुए। उन्होंने कहा: “चुनाव आयोग द्वारा तीन बार मतदान की प्रैक्टिस करवाई गई। फिर भी भाजपा के 10 सांसद सही तरीके से एक साधारण ‘दांडी’ नहीं खींच सके? यह हास्यास्पद है। ग्राम पंचायत में भी लोग इससे बेहतर वोट डालते हैं।”
प्रशासन की चुप्पी और भाजपा की रणनीति पर सवाल
सुप्रिया सुले ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा अपने अनुसार सहयोगी दलों को बदलती रहती है, और जब परिणाम मनचाहे नहीं आते, तो दोष विपक्ष पर डालती है।
“जब सहयोगी आपके हों, तो उनका वोट NDA को जाए तो ठीक। लेकिन जब वो वोट गिनती में गड़बड़ करते हैं, तो उन्हें इंडिया गठबंधन का बता दिया जाता है। यह भाजपा की दोहरी नीति है।”
उप-राष्ट्रपति चुनाव भले ही संपन्न हो चुका है, लेकिन इसके बाद शुरू हुआ क्रॉसवोटिंग का विवाद अब गहराता जा रहा है। सुप्रिया सुले का यह बयान न सिर्फ भाजपा पर तीखा हमला है, बल्कि मतदान प्रक्रिया की पारदर्शिता और गुप्तता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़कों तक चर्चा में रह सकता है।




