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कोल्हापुर की वीर पत्नी बनीं सेना में लेफ्टनंट – प्रतिकूल परिस्थितियों को मात देकर प्रियंका खोते ने रचा इतिहास

Kolhapur's brave wife becomes lieutenant in the army - Priyanka Khote created history by overcoming adverse circumstances

कोल्हापुर/प्रतिनिधि : कोल्हापुर जिले के हातकणंगले तालुका स्थित तारदाळ गांव की रहने वाली प्रियंका निलेश खोते ने साहस और संकल्प की मिसाल कायम करते हुए भारतीय सेना में लेफ्टनंट पद हासिल किया है। अपने पति के निधन के तीन साल बाद, प्रियंका ने विषम परिस्थितियों में आत्मविश्वास से आगे बढ़ते हुए यह उपलब्धि प्राप्त की है। प्रियंका की नियुक्ति हाल ही में चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA) में हुई पासिंग आउट परेड के दौरान लेफ्टनंट के रूप में की गई। खास बात यह है कि वीर पत्नी कोटे से पूरे भारत में केवल एक पद के लिए चयन होता है, और उस पर प्रियंका खोते ने अपना नाम दर्ज कराया है।

पारिवारिक संकटों के बीच संजोया सपना

प्रियंका के पति निलेश खोते, भारतीय सेना में कार्यरत थे, जिनका 7 नवंबर 2022 को हृदयगति रुक जाने के कारण निधन हो गया था। इससे पहले उनके ससुर का भी देहांत हो चुका था, जिससे खोते परिवार को दोहरा आघात झेलना पड़ा। इन कठिन परिस्थितियों में प्रियंका मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुकी थीं, लेकिन परिवार ने उन्हें संभाला और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

सैन्य अधिकारी बनने की प्रेरणा

पहले प्रियंका बैंकिंग परीक्षाओं की तैयारी कर रही थीं, लेकिन कुछ सैन्य अधिकारियों ने उन्हें बताया कि वीर पत्नी कोटे के तहत वे सेना में अधिकारी बन सकती हैं। इस जानकारी के बाद प्रियंका ने अपना लक्ष्य तय किया और सेना में शामिल होने की तैयारी शुरू कर दी। अपनी ढाई साल की बेटी को परिवार के भरोसे छोड़कर, प्रियंका ने नोएडा में चार महीने तक विशेष प्रशिक्षण लिया और फिर सेना की प्रवेश परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की। इसके बाद वे 11 महीनों के सैन्य प्रशिक्षण में शामिल हुईं। अब वे पूरी तरह से प्रशिक्षित होकर 26 सितंबर से भारतीय सेना में सक्रिय सेवा शुरू करेंगी।

कोल्हापुर के लिए गर्व का क्षण

यह उपलब्धि न केवल प्रियंका के लिए बल्कि पूरे कोल्हापुर जिले के लिए गर्व की बात है। विपरीत परिस्थितियों के बीच उन्होंने जो हिम्मत दिखाई, वह समाज के लिए एक प्रेरणा है।प्रियंका खोते ने साबित कर दिया है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो कोई भी बाधा रास्ते का अंत नहीं बन सकती। उनकी यह सफलता देश की उन तमाम महिलाओं को भी प्रेरणा देती है, जो जीवन में आगे बढ़ने का सपना देखती हैं।

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