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संजय राऊत को अफजलखान की कब्र पर जाने में ही मिलती है संतुष्टि: भाजपा का तीखा प्रहार

Sanjay Raut gets satisfaction only in visiting Afzal Khan's grave: BJP's sharp attack

मुंबई/प्रतिनिधि: भाजपा के मीडिया प्रमुख नवनाथ बन ने शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के नेते संजय राऊत पर तीखा हमला करते हुए कहा कि उन्हें लालबाग के राजा जैसे भव्य सार्वजनिक गणेशोत्सव में जाने की इच्छा नहीं होती, लेकिन अफजल खान की कब्र पर जाना उन्हें पुण्य का काम लगता है। सोमवार, 8 सितंबर को मुंबई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए नवनाथ बन ने कहा कि संजय राऊत और उनका गुट हिन्दू त्योहारों से नफरत करता है और उनका झुकाव मुगलों व कट्टरपंथियों की ओर है।

नवनाथ बन ने कहा कि, “गणपति बाप्पा का उत्सव लाखों-करोड़ों मराठी और हिन्दू लोगों की आस्था का केंद्र है, लेकिन संजय राऊत को उसमें कोई रुचि नहीं है। लालबाग के राजा के दर्शन करने के बजाय उन्हें अफजल खान की कब्र पर जाना ज़्यादा प्रिय लगता है। यह वही अफजल खान है जिसे छत्रपति शिवाजी महाराज ने देश और धर्म की रक्षा के लिए समाप्त किया था। ऐसे देशद्रोही की कब्र पर जाकर राऊत जैसे नेता क्या संदेश देना चाहते हैं?”

उन्होंने आगे कहा कि संजय राऊत जैसे नेताओं को हिन्दू संस्कृति, परंपरा और त्योहारों से चिढ़ है। “उन्हें अफजल खान और औरंगजेब से प्रेम है, ये जालीदार टोपी पहनकर उनकी कब्रों पर शीश नवाने दौड़ते हैं, लेकिन गणपति जैसे सार्वजनिक और समरसता के प्रतीक उत्सवों में शामिल नहीं होते। राऊत और उनका गुट सिर्फ मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करता है।”

राऊत की पीड़ा और सामना की तकरार

भाजपा नेता ने संजय राऊत पर निजी हमला करते हुए कहा, “आज संजय राऊत को इसीलिए तकलीफ हो रही है क्योंकि ‘सामना’ में भाजपा या देवेंद्र फडणवीस की तरफ से कोई विज्ञापन नहीं आया। जिन लोगों ने अपने ही बाप की पार्टी छोड़ दी, अपनी विचारधारा को बेच दिया, उन्हें दूसरों को बाप कहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। भाजपा आज जनता की पार्टी है और जनता ही भाजपा की ताकत है।”

नवनाथ बन ने आरोप लगाया कि संजय राऊत और उद्धव ठाकरे के जन्मदिनों पर जो भारी-भरकम विज्ञापन ‘सामना’ अख़बार में छपते हैं, वे शायद काले धन से छपते होंगे। “भाजपा के कार्यकर्ता स्वेच्छा से अपने नेताओं के लिए विज्ञापन देते हैं, लेकिन संजय राऊत के पास कार्यकर्ता नहीं, सिर्फ वायफळ बडबड (बकवास) करने की क्षमता है,” ऐसा भी उन्होंने कहा।

शिवसेना का महापौर? दिवास्वप्न है!

मुंबई महापालिका पर शिवसेना का महापौर फिर से आएगा, यह जो सपना संजय राऊत देख रहे हैं, उसे भी नवनाथ बन ने सिरे से नकार दिया। उन्होंने कहा, “मुंबई के आम नागरिक आज महायुती (भाजपा, शिंदे गुट आदि) के साथ हैं। शिवसेना का महापौर अब सिर्फ दिवास्वप्न है जो कभी साकार नहीं होगा। आम मुंबईकर भाजपा और महायुती के विकास कार्यों पर भरोसा करता है, न कि वंशवादी राजनीति पर।”

राहुल गांधी और उद्धव ठाकरे को चेतावनी

उपराष्ट्रपति पद की आगामी चुनाव को लेकर नवनाथ बन ने विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A और खासकर राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस बार भी एनडीए का प्रत्याशी ही विजयी होगा, और विपक्ष को एक बार फिर करारी हार मिलेगी। “जिस तरह राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस और यूपीए का पतन हो रहा है, उससे उनके खुद के सांसद परेशान हो चुके हैं। राऊत जैसे नेताओं को राहुल गांधी को अब सचेत करने की ज़रूरत है।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उपराष्ट्रपति चुनाव समय से होगा, और उसमें पितृपक्ष या शुभ मुहूर्त जैसी बातें करना सिर्फ डर का संकेत है। “भाजपा के लिए वर्ष के 365 दिन पवित्र हैं। कोई भी दिन हमारे लिए चुनाव और लोकतंत्र का उत्सव मनाने के लिए श्रेष्ठ है। संजय राऊत जिस प्रकार मुहूर्त की दुहाई दे रहे हैं, उससे यह स्पष्ट होता है कि वे भाजपा की सफलता से भयभीत हैं,” ऐसा नवनाथ बन ने दो टूक कहा। संजय राऊत की राजनीतिक शैली और हालिया बयानबाज़ी पर भाजपा ने आक्रामक रवैया अपनाया है। नवनाथ बन के तीखे आरोपों से साफ़ है कि महाराष्ट्र की राजनीति अब और तीव्र रूप ले रही है, जहां हिंदुत्व, सांस्कृतिक विरासत और राजनैतिक नैतिकता को लेकर सीधा टकराव होता दिखाई दे रहा है।

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