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उत्तराखंड के सभी मदरसों को शिक्षा मंडल से जोड़ा जाएगा: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बड़ा ऐलान

All madrasas of Uttarakhand will be linked to the Education Board: Big announcement by Chief Minister Pushkar Singh Dhami

काशीपुर/देहरादून – उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि उनकी सरकार “देवभूमि” उत्तराखंड की सनातन सांस्कृतिक पहचान को किसी भी सूरत में कमजोर नहीं होने देगी। काशीपुर में आयोजित प्रबुद्धजन सम्मेलन में बोलते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कई बड़े निर्णयों की घोषणा की, जिनमें राज्य में मदरसा बोर्ड को रद्द करना और सभी मदरसों को उत्तराखंड शिक्षा मंडल से अनिवार्य रूप से संबद्ध करने का निर्देश प्रमुख रहा।

मदरसा शिक्षा में बड़ा बदलाव, बोर्ड रद्द

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने मदरसा बोर्ड को रद्द करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। अब राज्य में केवल वे ही मदरसे मान्य होंगे जो उत्तराखंड शिक्षा मंडल द्वारा निर्धारित सामान्य शैक्षणिक पाठ्यक्रम को अपनाएंगे। यह प्रावधान 1 जुलाई 2026 से प्रभाव में आएगा। इसके बाद जो मदरसे बोर्ड के मानकों पर खरे नहीं उतरेंगे, उन्हें बंद किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अब तक 250 से अधिक अवैध मदरसों को सील किया जा चुका है और 500 से अधिक अवैध निर्माणों को हटाया गया है।

“ऑपरेशन कालनेमी” के तहत कट्टरपंथ पर कार्रवाई

पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड सरकार राज्य में “ऑपरेशन कालनेमी” के तहत उन तत्वों पर सख्त कार्रवाई कर रही है जो सनातन संस्कृति को बदनाम करने या धार्मिक उन्माद फैलाने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा,

“उत्तराखंड में झूठे संतों और ढोंगियों की कोई जगह नहीं है। हम धर्म की आड़ में समाज को गुमराह करने वालों को बर्दाश्त नहीं करेंगे।”

जनसंख्या संतुलन और समान नागरिक संहिता की दिशा में कदम

मुख्यमंत्री ने यह भी दोहराया कि उनकी सरकार राज्य में जनसंख्या संतुलन बनाए रखने को प्रतिबद्ध है। इस दिशा में कार्य करते हुए, उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना है जहां समान नागरिक संहिता (UCC) लागू की गई है। धामी ने बताया कि उनकी सरकार ने राज्य में धर्मांतरण और दंगा विरोधी कड़े कानून भी लागू किए हैं। इसके अलावा, लव जिहाद और जमीन जिहाद जैसे मामलों पर भी कठोर कार्रवाई जारी है।

“हमने अब तक 9,000 एकड़ से अधिक सरकारी जमीन को कब्जाधारियों से मुक्त कराया है। यह जमीन अब राज्य के विकास और जनकल्याण के कार्यों में उपयोग की जाएगी।”


धार्मिक सौहार्द के साथ विकास का संतुलन

धामी ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार किसी भी समुदाय के खिलाफ नहीं है, लेकिन राज्य के कानून और संविधान के तहत सभी को समान रूप से चलना होगा। धार्मिक संस्थानों को भी शैक्षिक और सामाजिक जवाबदेही के तहत आना होगा। कार्यक्रम में उपस्थित विभिन्न क्षेत्रों के प्रबुद्धजनों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की जनता को गुमराह करने वाले तत्वों के खिलाफ आवाज उठाना समय की आवश्यकता है। सरकार अकेले कुछ नहीं कर सकती; समाज और बुद्धिजीवियों की भागीदारी आवश्यक है। राज्य सरकार ने मदरसा बोर्ड को रद्द करने का फैसला किया। अब सभी मदरसों को उत्तराखंड शिक्षा मंडल से संबद्ध होना अनिवार्य। 1 जुलाई 2026 के बाद गैर-अनुपालन करने वाले मदरसे बंद माने जाएंगे। अब तक 250 अवैध मदरसे सील, 500+ अवैध निर्माण हटाए गए। ऑपरेशन कालनेमी के तहत ढोंगी बाबाओं और कट्टरपंथियों पर कार्रवाई। UCC, धर्मांतरण-विरोधी कानून, जनसंख्या नियंत्रण, सभी पर कठोर क़दम। 9,000 एकड़ सरकारी भूमि अतिक्रमण से मुक्त कराई गई। मुख्यमंत्री धामी का यह बयान और कार्यवाही एक तरफ जहाँ उनकी सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर यह भी स्पष्ट करता है कि अब धार्मिक शिक्षण संस्थानों को भी मुख्यधारा की शिक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही के ढांचे में लाया जाएगा। राजनीतिक दृष्टि से यह कदम राष्ट्रवादी मतदाताओं को आकर्षित करने वाला है, जबकि सामाजिक दृष्टि से यह शिक्षा प्रणाली में एकरूपता लाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा सकता है। उत्तराखंड सरकार का यह निर्णय राज्य की धार्मिक, सामाजिक और शैक्षिक व्यवस्था में गंभीर और दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि इसे अन्य राज्य भी मॉडल के रूप में अपनाते हैं या नहीं।

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