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नवी मुंबई मनपा के मोरबे धरण पर पारंपरिक जलपूजन समारोह सम्पन्न

Traditional Jal Pujan ceremony concluded at Morbe Dharan of Navi Mumbai Municipal Corporation

नवी मुंबई/प्रतिनिधी: स्वातंत्र्योत्तर भारत में अपनी खुद की जलस्रोत संपत्ति के रूप में बाँध रखने वाली नवी मुंबई महानगरपालिका एकमात्र महानगरपालिका है। इसी गौरव को और अधिक मजबूत करते हुए, मोरबे धरण (बांध) के पूर्ण जलसंचयन की खुशी में आज पारंपरिक पद्धति से जलपूजन समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महाराष्ट्र राज्य के वन मंत्री गणेश नाईक के कर-कमलों द्वारा विधिपूर्वक जलपूजन संपन्न हुआ। नवी मुंबई महानगरपालिका के आयुक्त डॉ. कैलास शिंदे प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

मोरबे धरण – नवी मुंबई की जलसमृद्ध पहचान

मोरबे धरण, जो कि पाताळगंगा नदी की उपनदी धावरी नदी पर स्थित है, खालापुर तालुका में बना हुआ है। यह धरण 450 द.ल.लि. प्रतिदिन (MLD) जल आपूर्ति की क्षमता रखता है और इस वर्ष अगस्त माह में ही पूर्ण रूप से भर चुका है। अब तक धरण क्षेत्र में 3901 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई है, जिससे जलस्तर 88 मीटर से अधिक पहुंच चुका है। इस समय धरण में 190.89 द.ल.घ.मी. (Million Cubic Meters) जलसंग्रह है और आज 25 सेमी तक गेट खोलकर नियंत्रित विसर्ग (पानी छोड़ा) किया गया। इस पारंपरिक जलपूजन कार्यक्रम में कई पूर्व जनप्रतिनिधियों और नगरसेवकों की उपस्थिति रही यहाँ पूर्व सांसद संजीव नाईक, पूर्व महापौर सागर नाईक पूर्व नगरसेवक डॉ. जयाजी नाथ, अनंत सुतार, रविंद्र इथापे, रामचंद्र घरत, दशरथ भगत नगरसेविका नेत्रा शिर्के, अतिरिक्त आयुक्त सुनील पवार व डॉ. राहुल गेठे, शहर अभियंता शिरीष आरदवाड, अतिरिक्त शहर अभियंता अरविंद शिंदे, अन्य विभागप्रमुख और कर्मचारीगण उपस्थिति रहे

राज्यभर में 250 करोड़ वृक्षारोपण का लक्ष्य – मंत्री गणेश नाईक

अपने संबोधन में वन मंत्री गणेश नाईक ने जलसंवर्धन और पर्यावरण रक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ग्लोबल वॉर्मिंग और पर्यावरणीय बदलावों की चुनौती के मद्देनज़र राज्य सरकार अगले 5 वर्षों में 250 करोड़ वृक्षारोपण का लक्ष्यमात्र लेकर कार्यरत है। उन्होंने बताया कि नवी मुंबई महानगरपालिका की स्वामित्व वाला मोरबे धरण न केवल नगर की प्यास बुझाता है, बल्कि भविष्य की बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए अतिरिक्त जलस्रोतों जैसे पाताळगंगा, पोशीर और शिलार धरणों से पानी लाने की भी योजना बनाई जा रही है।

साथ ही उन्होंने मोरबे धरण के निकट मनोरंजन केंद्र (Recreational Zone) विकसित करने और सौर ऊर्जा उत्पादन (Solar Power Generation) की संभावनाओं का भी उल्लेख किया, जिससे मनपा की आय में वृद्धि हो सके। उन्होंने धरण के जल को स्वच्छ बनाए रखने के लिए तात्कालिक उपाय योजनाएं करने के निर्देश भी दिए।

2055 तक 45 लाख की आबादी को जल आपूर्ति का लक्ष्य

महानगरपालिका आयुक्त डॉ. कैलास शिंदे ने अपने वक्तव्य में बताया कि नवी मुंबई की जनसंख्या वर्ष 2055 तक 40 से 45 लाख तक पहुँच सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए जल वितरण की योजना तैयार की गई है। उन्होंने कहा किपाताळगंगा, पोशीर व शिलार धरणों से जल संग्रह की योजना बन रही है।पारसिक हिल (बेलापुर) से महापे जंक्शन तक 15 किमी लंबी जलवाहिनी (pipeline) का निर्माण प्रस्तावित है।पुनर्प्रक्रियाकृत जल (Recycled Water) का उपयोग घरेलू उपयोगों को छोड़ अन्य सभी क्षेत्रों में बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि पीने योग्य जल का संरक्षण हो सके। आयुक्त ने नागरिकों से जल का संयमित उपयोग करने की अपील की और कहा कि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। अतिरिक्त शहर अभियंता अरविंद शिंदे ने समारोह के समापन पर सभी अतिथियों का आभार प्रकट किया और कहा कि यह निसर्ग की कृपा है कि मोरबे धरण इस वर्ष समय से पहले भर गया है। उन्होंने यह भी कहा कि आगामी वर्षों में भी इसी प्रकार जलसंचयन हो, यह सभी की प्रार्थना है। मोरबे धरण का भरना न केवल नवी मुंबई के लिए जलसुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह शहर के आत्मनिर्भर जल प्रबंधन का प्रतीक भी है। हालांकि पर्याप्त जल भंडारण उपलब्ध है, फिर भी महानगरपालिका और राज्य सरकार दोनों ने नागरिकों से अनुरोध किया है कि पानी की एक-एक बूंद का मूल्य समझें और संयमपूर्वक उसका उपयोग करें।

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