SIR in Bihar : कुत्ते के नाम पर जारी हुआ डोमासाइल सर्टिफिकेट | Congrese ने उठाए सवाल
SIR in Bihar : Domicile certificate issued in the name of a dog | Congress raises questions
मुंबई/पटना: बिहार में हाल ही में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक कुत्ते के नाम पर आवासीय प्रमाण-पत्र जारी किया गया और वह प्रमाण-पत्र राज्य सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर वेरिफाइड (सत्यापित) भी पाया गया। इस सनसनीखेज घटना को लेकर कांग्रेस ने बिहार सरकार और चुनाव आयोग (Election Commission) की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी ने इसे प्रशासनिक लापरवाही और डिजिटल सिस्टम की विफलता का खुला उदाहरण बताया है। बिहार में कुत्ते के नाम पर आवासीय प्रमाण-पत्र जारी होना और उसका सरकारी पोर्टल पर वेरिफिकेशन होना, बिहार सरकार की डिजिटल व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही का सबसे बड़ा उदाहरण है। सबसे हैरानी की बात यह है कि चुनाव आयोग (EC) इस तरह के आवासीय प्रमाण-पत्र को SIR (Special Intensive Revision) के तहत मान्य दस्तावेज़ के रूप में मानता है।
मतदाता सूची की शुद्धता पर उठे सवाल
कांग्रेस ने चुनाव आयोग को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि इस तरह के दस्तावेजों को वैध मानना चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाता सूची की शुद्धता को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। पार्टी प्रवक्ताओं का कहना है कि यह मामला सिर्फ मजाक नहीं, बल्कि लोकतंत्र के मूल स्तंभों पर गहरा आघात है।
“अगर एक कुत्ता भी अब वोटर बन सकता है, तो आम नागरिकों के हक और पहचान का क्या होगा?” — नासिर हुसैन, कांग्रेस प्रवक्ता
कांग्रेस की मांग – उच्च स्तरीय जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई
कांग्रेस ने इस पूरे मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए और उनके खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जानी चाहिए। पार्टी ने चेतावनी दी कि अगर इस मामले को हल्के में लिया गया, तो यह आगे चलकर लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। यह घटना बताती है कि आम नागरिकों के दस्तावेजों की सुरक्षा और वेरिफिकेशन पर सरकार व चुनाव आयोग दोनों कितने नाकाम हैं।
विपक्षी दलों और सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं
घटना सामने आते ही सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई उपयोगकर्ताओं ने बिहार सरकार की “डिजिटल इंडिया” पहल पर तंज कसते हुए पूछा कि क्या अब हर कोई अपने पालतू जानवरों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलवा सकता है?विपक्षी दलों ने इसे “डिजिटल भ्रष्टाचार” करार देते हुए कहा कि यदि अब तक कुत्ते के नाम आवासीय प्रमाण-पत्र जारी हो सकते हैं, तो अगले चुनाव में बिल्लियों और तोतों के नाम भी नामांकन देखना असंभव नहीं होगा। अब तक न तो बिहार सरकार और न ही चुनाव आयोग की ओर से इस मामले में कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। हालांकि सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने आंतरिक जांच के आदेश दे दिए हैं और दोषियों की पहचान की जा रही है। इस पूरे मामले ने प्रशासनिक सतर्कता, डिजिटल प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं। आने वाले दिनों में इस पर सरकार और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया तथा कार्रवाई का देश भर में बारीकी से अवलोकन किया जाएगा।




