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CIDCO Land Fee Controversy : मालिकाना हक की राह महंगी? फ्री होल्ड नीति पर सोसायटियों का ऐतराज

CIDCO Land Fee Controversy: Housing societies object to CIDCO's new policy

नवी मुंबई/प्रतिनिधि: सिडको (सिटी एंड इंडस्ट्रियल डेव्हलपमेंट कॉर्पोरेशन) द्वारा भाड़ेपट्टा (लीज) भूखंडों को फ्रीहोल्ड (पूर्ण स्वामित्व) में परिवर्तित करने की प्रक्रिया का ऐलान किया गया है। इस ऐच्छिक योजना के तहत जिन भूखंडों पर लीज डीड पहले से मौजूद है, उन्हें निश्चित प्रक्रिया और शुल्क के माध्यम से फ्रीहोल्ड में बदला जाएगा। हालांकि, इस योजना में निर्धारित किया गया बाजार मूल्य का 10% शुल्क अब विवाद का कारण बन गया है। गृहनिर्माण संस्थाएं और नागरिक इसे आम लोगों के लिए “असहनीय और अन्यायपूर्ण” बता रहे हैं।

सतीश निकम का विरोध और प्रस्ताव

नवी मुंबई सिटिझन फाउंडेशन के अध्यक्ष सतीश निकम ने इस योजना में निर्धारित शुल्क पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा:

“11 अक्टूबर 2024 के शासन आदेश में जो मूल्य निर्धारित किया गया है, वह आम जनता की पहुंच से बाहर है। हमारी मांग है कि यह शुल्क भूखंड की खरेदी किमत के केवल 2% से 3% के बीच होना चाहिए। बाजार मूल्य के आधार पर शुल्क लेना आम जनता पर अन्यायकारक है।”

~ सतीश निकम ( अध्यक्ष , नवी मुंबई सिटिझन फाउंडेशन )

क्या है योजना और किसे मिलेगा लाभ?

सिडको की इस योजना के तहत मुख्यतः निवासी भूखंडों को ही शामिल किया गया है। यह प्रक्रिया उन प्रकल्पों पर भी लागू होगी जो निविदा (टेंडर) के माध्यम से वितरित किए गए हैं, साथ ही 12.5% और 22.5% पुनर्वसन योजना के अंतर्गत दिए गए भूखंडों को भी इसमें सम्मिलित किया गया है। फ्रीहोल्ड में रूपांतरण के बाद संबंधित संपत्ति के हस्तांतरण या विक्रय के लिए सिडको कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूलेगा। लेकिन, भूखंडधारकों को भूखंड के वर्तमान बाजार मूल्य का 10% शुल्क एकमुश्त अदा करना होगा। जिन करारनामों में अनर्जित उत्पन्न (unearned income) का उल्लेख है, उन्हें वह अतिरिक्त राशि भी जमा करनी होगी।

गृह निर्माण संस्थाओं की आपत्ति 

हालांकि यह योजना मालिकाना हक प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, मगर सिडको द्वारा मांगे गए शुल्क को लेकर कई गृह निर्माण संस्थाएं और नागरिक संगठन विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह शुल्क अत्यधिक है और इसे कम कर मात्र 2% तक सीमित किया जाना चाहिए, ताकि मध्यमवर्गीय और निम्नवर्गीय परिवारों को भी इस योजना का लाभ मिल सके। कुछ संगठनों ने सुझाव दिया है कि यदि वर्तमान बाजार मूल्य के बजाय उस समय की खरेदी किमत पर आधारित 5% शुल्क लागू किया जाए, जब भूखंड खरीदा गया था, तो अधिक लोग इस योजना से जुड़ सकेंगे।

सिडको का पक्ष और आगे की प्रक्रिया 

सिडको ने स्पष्ट किया है कि यह योजना पूरी तरह ऐच्छिक है और किसी पर जबरदस्ती लागू नहीं की जाएगी। शुल्क जमा करने के बाद ही भूखंड को फ्रीहोल्ड में रूपांतरित किया जाएगा। रूपांतरण के बाद संबंधित जमीन की जानकारी और नोंद भूमि अभिलेख विभाग (Land Records Department) के माध्यम से अद्यतन की जाएगी। सिडको ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस योजना का लाभ उठाकर अपनी जमीन पर कानूनी और निश्चित स्वामित्व सुनिश्चित करें।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

नगर नियोजन और संपत्ति अधिकार विशेषज्ञों का मानना है कि सिडको की यह पहल दीर्घकालिक रूप से जमीन के स्वामित्व को स्पष्ट और पारदर्शी बनाएगी। लेकिन अगर शुल्क बहुत अधिक होगा तो यह योजना सफल नहीं हो पाएगी। सिडको की फ्रीहोल्ड योजना भाड़ेपट्टा भूखंडधारकों के लिए एक सुवर्णसंधी हो सकती है, लेकिन इसके लिए शुल्क एकसमान और किफायती होना चाहिए। अगर सिडको नागरिकों की मांगों पर विचार कर शुल्क में कटौती करती है, तो यह योजना व्यापक रूप से सफल हो सकती है और हजारों लोगों को उनकी जमीन पर पूर्ण मालिकाना हक मिल सकता है।

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