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Ganeshotsav 2025 : गणेशोत्सव को मिली ‘महाराष्ट्र राज्य महोत्सव’ की मान्यता, विधानसभा में आशीष शेलार ने की ऐतिहासिक घोषणा

Ganeshotsav 2025: Ganeshotsav gets recognition of 'Maharashtra State Festival', Ashish Shelar made a historic announcement in the Assembly

मुंबई/प्रतिनिधी: महाराष्ट्र की जनता के लिए गर्व और उत्सव की खबर है। राज्य की समृद्ध परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक ‘सार्वजनिक गणेशोत्सव’ अब आधिकारिक रूप से ‘महाराष्ट्र राज्य महोत्सव’ के रूप में मान्यता प्राप्त कर चुका है। इस ऐतिहासिक घोषणा की जानकारी गुरुवार को राज्य के सांस्कृतिक कार्यमंत्री आशीष शेलार ने महाराष्ट्र विधानसभा में दी। आशीष शेलार ने अपने वक्तव्य में बताया कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने वर्ष 1893 में सार्वजनिक गणेशोत्सव की शुरुआत की थी, जो न सिर्फ धार्मिक उत्सव था, बल्कि यह सामाजिक, राष्ट्रीय जागरूकता, स्वतंत्रता संग्राम और मराठी भाषा व संस्कृति के गौरव का प्रतीक बन गया। उन्होंने कहा, “गणेशोत्सव महाराष्ट्र की पहचान है, और यह हमारा गौरव है। इस उत्सव की सांस्कृतिक गहराई और सामाजिक एकता को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार कटिबद्ध है।”

पर्यावरण के मुद्दे पर सकारात्मक कदम

गणेशोत्सव में पीओपी (प्लास्टर ऑफ पेरिस) मूर्तियों पर लगे प्रतिबंध को लेकर भी शेलार ने बड़ा अपडेट दिया। उन्होंने बताया कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की सहमति और राजीव गांधी विज्ञान आयोग की काकोडकर समिति की रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट हुआ है कि वैज्ञानिक रूप से बनाई गई पीओपी मूर्तियाँ पर्यावरण के लिए हानिकारक नहीं हैं। परिणामस्वरूप, अब पीओपी मूर्तियों के निर्माण, प्रदर्शन और बिक्री को न्यायालय से अनुमति मिल चुकी है। शेलार ने यह भी स्पष्ट किया कि महायुती सरकार – मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अजित पवार के नेतृत्व में – इस उत्सव को बिना किसी अड़चन के और पूरे राज्य में भव्य रूप से मनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि गणेशोत्सव के लिए पुलिस सुरक्षा, आधारभूत सुविधाएं और आवश्यक निधि उपलब्ध कराई जाएगी। राज्य सरकार ने गणेश मंडलों से अपील की है कि वे अपने पंडालों और झांकियों में सामाजिक संदेश, देशभक्ति, सैन्य शौर्य, ‘ऑपरेशन सिंदूर’, पर्यावरण जागरूकता, विकास कार्यों और महापुरुषों के योगदान को प्रदर्शित करें। शेलार ने कहा, “हम चाहते हैं कि यह उत्सव सिर्फ धार्मिक न रहकर सामाजिक और राष्ट्रीय चेतना का भी मंच बने। यही कारण है कि इसे ‘महाराष्ट्र राज्य महोत्सव’ घोषित करना हमारे लिए गर्व का विषय है।” गणेशोत्सव केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि यह महाराष्ट्र की आत्मा से जुड़ा उत्सव है। राज्य सरकार की यह घोषणा न केवल सांस्कृतिक पहचान को मजबूती देगी, बल्कि समाज में एकता, पर्यावरण-संवेदनशीलता और राष्ट्रीय गर्व की भावना को भी प्रोत्साहित करेगी। गणपति बाप्पा मोरया!

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