
Thackray ब्रांड लांच, क्या हिंदीभाषियों के अपमान पर जीत पाएगी Raj और Udhav की सेना !
Raj and Uddhav's army will be strengthened on insulting Hindi speakers, who guarantees victory?
मुंबई/विशेष प्रतिनिधिः महाराष्ट्र की राजनीति में सबसे ज्यादा गर्माहट लाने वाली आज की पॉलिटिकल रैली का समापन हो गया. हिंदीभाषा की हार, और मराठी की जीत के नाम पर आयोजित आज शनिवार की इस विजय महारैली का बड़ा प्लाइंट यही रहा कि 19 साल बाद बालासाहेब ठाकरे के दो अनमोल रतन राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे पहली बार एक मंच पर साथ आ गए. न चाहते हुए गले मिले, मंच साझा किया और हिंदीभाषा पर मराठी भाषा की जीत का जमकर जल्लोष किया. माना जा रहा है कि मराठी भाषा और मराठी मानुष के लिए अब दोनों ठाकरे बंधुओं की यह जोड़ी महाराष्ट्र की राजनीति में नया गुल खिलाएगी. कुछ एक्सपर्ट ठाकरे बंधुओं के इस गठजोड़ को डूबते को तिनके का सहारा बताते हुए प्रतिक्रिया दे रहे हैं. आश्चर्य व्यक्त कर रहे हैं जिस काम को खुद बालासाहेब ठाकरे नहीं कर पाए उन्हें देवेंद्र फडणवीस ने करके दिखा दिया. तमाम पॉलिटिकल पंडितों की राय को बेमानी करते हुए उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने एक दूसरे से हाथ मिला लिया. कह सकते हैं कि यह संबंधों की नयी पारी है लेकिन यह भी देखना होगा कहीं यह राजनीतिक स्वार्थ पूरा नहीं होने पर भरभराकर न गिर पड़े. आगामी बीएमसी चुनाव दोनों ठाकरे बंधुओं की परीक्षा का इंतजार करेगा.
बहुसंख्यक मतदाताओं का अपमान कर, कैसे जीतेंगे ठाकरे बंधु
महाराष्ट्र में हिंदी-मराठी विवाद कोई नया नहीं है. शिवसेना की नींव उत्तर भारतीयों की पिटाई और अपमान पर मजबूत हुई थी. शिवसेना से अलग होने पर बालासाहेब ठाकरे के अनमोल रतन राज ठाकरे ने वही रास्ता चुना. परप्रांतियों की पिटाई, और मराठी नहीं बोलने का हवाला देकर अपमानित कर मराठी जनों की सहानुभूति जुटाई और राजनीति की.हालांकि यह फार्मूला चल नहीं सका. अब नयी कवायद है. अब दोनों भाई हिंदी, हिंदीभाषी और उत्तरभारतियों के अपमान की नींव पर राजनीतिक किला बांधने की तैयारी में हैं.उन्हें यकीन है कि हिंदीभाषियों को नीचा दिखाकर, उन्हें पीटकर मराठी माणुस का वोट बटोर सकेंगे…और मुंबई महानगर पालिका चुनाव में जीत हासिल कर सकेंगे. सच ये भी है कि मुंबई उपनगरों में उत्तर भारतीयों का वोट बैंक बेतहासा बढ़ा है. बीजेपी की बड़ी जीत में परप्रांतीय और उत्तरभारतीय वोटों का गणित बहुत बड़ा है. जाहिर है इस बड़े वोट बैंक से दूर रखने बीजेपी सदैव अपनी रणनीति चलाती है. ठाकरे बंधुओं को लगता है कि हिंदीभाषियों की पिटाई से उन्हें पूरा मराठी तबका वोट देगा और वो जीत जाएंगे लेकिन यह बड़ी गफलत है. बड़े वोटबैंक को अपमानित कर ठाकरे बंधुओं की सेना कभी जीत नहीं सकती. अब देखना होगा कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव में बुरी तरह पिट चुके ठाकरे बंधुओं की यह कवायद बीएमसी चुनाव में कितना लाभ दिला पाती है.
अलग होने नहीं, दोनों भाई मिलकर हराएंगे-उद्धव ठाकरे
मंच से खुद राज ठाकरे ने कहा, दोनों भाईयों को साथ लाने का जो काम बालासाहेब नहीं कर पाए उसे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जी ने कर दिया।।इस बात के कई मायने हैं। वहीं उद्धव ठाकरे ने अपने भाषण में कहा कि अब दोनों भाई साथ आएं हैं तो अलग होने के लिए नहीं. दोनों भाई मिलकर आपको (बीजेपी महायुति ) हरा देंगे. साफ है कि आगामी बीएमसी चुनाव में भी अब दोनों ठाकरे भाईयों की एकजुटता देखने को मिल सकती है. मंच पर भाषण देते हुए दोनों समान विचारधारा पर एकमत दिखे।।दोनों ठाकरे परिवार के सभी सदस्य भावविभोर दिखे. इस तस्वीर को एक साथ देखने वर्ली में कार्यकर्ताओ का हुजूम भी देखने को मिला.



