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Cyber Fraud : साइबर ठगों का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क? Navi Mumbai की महिला बनी शिकार

Navi Mumbai Cyber ​​Fraud: International network of cyber thugs? Navi Mumbai woman becomes victim

नवी मुंबई : डिजिटल होती दुनिया में कमाई के साधनों की तलाश भारी मुसीबत बन रही है.  “कम समय में ज़्यादा पैसा” और “कम मेहनत में बड़ी कमाई” का सपना लोगों को इस कदर लुभा रहा है कि वे ठगी के जाल में फँसते जा रहे हैं। मार्केट में तमाम ऐसी कंपनियाँ सामने आई हैं, जो फॉरेक्स ट्रेडिंग, म्यूचुअल फंड्स, या ग्लोबल इन्वेस्टमेंट के नाम पर लोगों से मोटी रकम निवेश करवाती हैं। या फिर कुछ लोकल एजेंटों द्वारा प्रमोट की गई कंपनियाँ, जो बड़े-बड़े दावे करती हैं कि “आपका पैसा कई गुना होकर वापस मिलेगा।” लेकिन हकीकत यह है कि इनमें से कई कंपनियाँ सिर्फ एक धोखा होती हैं। लोग लाखों रुपये निवेश करते हैं और फिर साल-दो साल बाद उन्हें समझ आता है कि न तो कोई रिटर्न आया और न ही उनकी मूल रकम कहीं सुरक्षित है। यही वजह है कि साइबर फ्रॉड और इन्वेस्टमेंट फ्रॉड के मामले दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहे हैं।

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कोपरखेरणे की महिला से 40 लाख की ठगी

इस कड़ी में हाल ही में सामने आयी टोरस कंपनी की महाघोटाला सबको याद है. हजारों लोगों के सैकड़ों करोड़ लेकर फरार हो चुकी ऐसी कंपनियों की धांधली सामने आने के बाद भी लोग सावधान नजर नहीं आते. हालिया मामला नवी मुंबई के कोपरखैरने इलाके से  सामने आया है। एफआईआर नंबर 0376/2025 के अनुसार, यहां की एक महिला मनीषा हनुमंत किर्वे ने जे. के. वी. ग्लोबल (JKV Global) कंपनी में फॉरेक्स इन्वेस्टमेंट के नाम पर 40 लाख का निवेश किया पीड़िता मनीषा कर्वे ने बताया कि पहले अकाउंट में ₹20 लाख रुपए फिर दूसरे अकाउंट में ₹20 लाख, यानी कुल ₹40 लाख रूपयों का निवेश किया। यह निवेश उनके परिचित सूरज कदम,जुई कदम, सचिन डोंगरे के माध्यम से किए गए लेकिन जब मुनाफा देने की बारी आयी तब कंपनी फरार हो गयी.मनीषा किर्वे ने पुलिस में सभी आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। एफआईआर 11 जून को दर्ज की गई थी, लेकिन खबर लिखे जाने तक यानी 18 दिनों बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है. न ही कोई अन्य कार्रवाई हुई है. पीड़ित ने कोपरखेरणे पुलिस के हवाले से बताया कि सभी आरोपी इस वक्त विदेश में हैं और जब वे वापस आएँगे, तभी जाँच की प्रक्रिया आगे बढ़ पाएगी।

हर शहर में फैला है अंतर्राष्ट्रीय ठगी का नेटवर्क !

इस मामले से एक बात साफ़ होती है कि ये कोई छोटा-मोटा फ्रॉड नहीं है। जिस तरह से आरोपी विदेश भाग चुके हैं, उससे यह अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और फॉरेक्स ट्रेडिंग फ्रॉड का एक अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट काम कर रहा है। यह सिर्फ नवी मुंबई या महाराष्ट्र की समस्या नहीं है, बल्कि देशव्यापी और शायद ग्लोबल स्तर पर फैला हुआ नेटवर्क है। ऐसे में दो स्तरों पर सख्ती की ज़रूरत है: सरकार, पुलिस और एन्फोर्समेंट एजेंसियों को चाहिए कि वे इस तरह के फ्रॉड की गहन जाँच करें और कड़ी कार्रवाई करें।और दूसरी बात कि आम जनता को भी सतर्क रहने की ज़रूरत है। बिना पूरी जानकारी के, किसी भी अनजान कंपनी में अपनी मेहनत की कमाई निवेश न करें . “जल्द अमीर बनने की चाहत में अपने खून पसीने की कमाई को गंवाने से बचें.

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