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‘घर चाहिए या आंदोलन?’ – शिवसेना ने विरोधियों को कार्टून से दिखाया आईना

मुंबई/प्रतिनिधी: मुंबई की सबसे बड़ी झोपड़पट्टी मानी जाने वाली धारावी के पुनर्विकास प्रकल्प पर एक बार फिर सियासी गर्मी देखने को मिल रही है। इस बार सीधे तौर पर ‘उबाठा’ नामक गुट पर शिवसेना (शिंदे गुट) ने तीखा व्यंग्य कसा है। धारावी पुनर्विकास प्रकल्प का विरोध कर ‘धारावी बचाव आंदोलन’ शुरू करने वाले इस गुट को शिवसेना ने एक व्यंग्यात्मक चित्र (कार्टून) के ज़रिए आड़े हाथों लिया है। यह व्यंगचित्र पार्टी के सोशल मीडिया हैंडल्स पर शेयर किया गया, जो अब सोशल मीडिया पर जबरदस्त तरीके से वायरल हो रहा है। धारावी पुनर्विकास प्रकल्प फिलहाल अंतिम चरण में है, और वहाँ के रहिवासियों की नोंदणी प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। इस प्रकल्प के तहत पहली बार ऐसे झोपड़ीधारकों को भी घर देने का निर्णय लिया गया है, जो तकनीकी रूप से ‘अपात्र’ माने जाते थे। पात्र रहिवासियों को मुंबई में 350 वर्गफुट के पक्के मकान मिलने जा रहे हैं। इससे धारावी के हजारों गरीब नागरिकों को अपने नाम से हक्क का घर मिलना संभव हो पाएगा।

विकास या विरोध? ‘उबाठा’ गुट की मंशा पर उठते सवाल

‘उबाठा’ गुट धारावी पुनर्विकास प्रकल्प का विरोध कर रहा है। इसने ‘धारावी बचाव आंदोलन’ की शुरुआत की है, जिसमें यह दावा किया जा रहा है कि यह प्रकल्प रहिवासियों के हित में नहीं है। हालाँकि, इस आंदोलन को धारावी के अधिकतर लोगों का समर्थन नहीं मिल रहा है। स्थानीय रहिवासियों का कहना है कि उन्हें वर्षों की अस्थायी जिंदगी के बाद पक्का घर मिलने का सपना अब पूरा होने जा रहा है, और वे इस मौके को किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहते। सूत्रों के मुताबिक, 90% से अधिक धारावीकरों ने पुनर्विकास के समर्थन में अपनी नोंदणी पूरी कर ली है। ऐसे में विरोध करने वाले गुट को लोग राजनीतिक और निजी स्वार्थों से प्रेरित मान रहे हैं।

शिवसेना का व्यंगचित्र: धारावी पुनर्विकास विवाद का नया मोड़

शिवसेना (शिंदे गुट) द्वारा जारी किए गए व्यंगचित्र में एक सामान्य धारावीवासी को उद्धव ठाकरे ‘धारावी बचाव आंदोलन’ का झंडा पकड़ाते हुए दिखाया गया है। वहीं वही धारावीकर सामने ज़मीन पर पड़ी अपने हक के घर की चाबी की ओर इशारा करता है, जैसे कह रहा हो कि – “मुझे आंदोलन नहीं, मेरा घर चाहिए।” यह दृश्य एक तरफ विरोध की राजनीति और दूसरी ओर आम जनता की वास्तविक ज़रूरतों के बीच का टकराव दिखाता है। यह चित्र सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। लोग इसे साझा करते हुए ‘राजनीति बनाम जनता’ के मुद्दे पर खुलकर राय व्यक्त कर रहे हैं। कई यूज़र्स ने लिखा है कि “अब समय है जनता की सुनी जाए, राजनीति की नहीं।”

धारावी पुनर्विकास प्रकल्प एक ऐतिहासिक और महत्वाकांक्षी योजना है, जो यदि सफल हुई, तो यह मुंबई के लाखों गरीबों की ज़िंदगी में बड़ा बदलाव ला सकती है। लेकिन इस प्रकल्प को लेकर राजनीतिक रस्साकशी भी तेज होती जा रही है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि राज्य सरकार, विरोध करने वालों और आम धारावी निवासियों के बीच संतुलन कैसे बनाए रखती है।

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