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Vat Purnima : वट पूर्णिमा पर सुधाकर सोनावणे की नई पहल, शमशान में 101 वट वृक्षारोपण

Vat Purnima: Sudhakar Sonawane nitiative, 101 Vat trees planted in the crematorium

नवी मुंबई-रविं चंद/ वट पूर्णिमा पर्व पर परंपरा को नई दिशा देते हुए आज नवी मुंबई के रबाले में बरगद के 101 पेड़ लगाए गए. वृक्षारोपण का यह अनूठा उपक्रम पूर्व मेयर सुधाकर सोनावणे की पहल पर चलाया गया. वरलीपाड़ा के बिरसा मुंडा उद्यान से 101 सुहागिन महिलाओं ने हाथों में वट पेड़ लेकर शोभायात्रा निकाली और श्मशान परिसर में पेड़ लगाकर पर्व को सही मायने में पर्यावरण पूरक बना दिया. वट पूर्णिमा पर्व को वट सावित्री भी कहा जाता है. इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए बरगद के पेड़ की परिक्रमा करती हैं, पेड़ के तने में 108 बार धागा बांधती हैं ताकि उनका सुहाग कायम रहे. आज वट वृक्षारोपण की नई पहल और भी प्रेरणादायी नजर आयी जब सुहागिन महिलाओं ने वट पूजा के बदले बरगद के सैकड़ों पौधों का रोपण किया और ऑक्सीजन बढ़ाने वाली हरियाली कायम रखने का संदेश दिया.

वट पूर्णिमा की परंपरा कायम रखने जरूरी है वट वृक्षारोपण-सोनावणे

पूर्व मेयर सुधाकर सोनावणे के इस अनूठे वट पूर्णिमा कार्यक्रम में पूर्व नगरसेविका रंजनाताई सोनावणे, डॉ. गौतमी सोनावणे समेत सैकड़ों महिलाएं मौजूद रहीं. सबसे पहले पेड़ों की पूजा की गई फिर हाथ में पौधे थामे महिलाएं श्मशान क्षेत्र में पहुंची. पारंपरिक परिधान में सजी महिलाओं ने प्रकृति संवर्धन को महत्व देते हुए यहां पेड़ लगाया. पूर्व मेयर सुधाकर सोनावणे ने कहा कि बरगद सर्वाधिक ऑक्सीजन देने वाला पेड़ है, वट पूर्णिमा पति की दीर्घायु की कामना के साथ ऐसे पेड़ों को बचाने की परंपरा है. इसलिए जरूरी है कि ऐसे पेड़ जिन्दा रहें, नए पेड़ लगाए जाएं. इसी सोच के तहत आज 101 वटवृक्षों का रोपण किया गया है.

पर्यावरण के लिए चिंतनशील पूर्व महापौर सुधाकर सोनावणे ने कहा कि आज की पहल से वट पूर्णिमा पर्व की सार्थकता और भी बढ़ गयी है.जाहिर है शहरीकरण के दौर में पीपल और बरगद जैसे पेड़ गायब हो रहे हैं. ऐसे में सर्वाधिक ऑक्सीजन और हरियाली देने वाले ऐसे पेड़ों का रोपण और संवर्धन समय की जरूरत है.  

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