Haridwar NUJI Convention : हरिद्वार अधिवेशन में गूंजा पत्रकारों की सुरक्षा का मुद्दा, सख्त कानून बनाने पर जोर
Haridwar NUJI convention : Governments are not serious about the safety of journalists, strict laws are needed
विशेष प्रतिनिधि/हरिद्वार : भारत के सबसे बड़े पत्रकार संगठन नेशनल यूनियन ऑफ इंडिया (NUJ-I) के दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन का समापन हो गया. 8 और 9 मार्च 2025 को दो दिनों तक चले अधिवेशन में देश के 24 राज्यों से एनयूजे-आई से जुड़े मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस दौरान पत्रकारिता से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई. अधिवेशन में पत्रकारों के हितों की रक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर निर्णय लिए गए। कार्यक्रम में महाराष्ट्र राज्य इकाई की ओर से अध्यक्ष हंसराज कनौजिया, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और राज्य के प्रभारी शिवा कुमार, उपाध्यक्ष बाबा लौंढे, जनरल सेक्रेटरी पी. सी. कापड़िया, सेक्रेटरी मनीष शेठ और सुनील निकम के साथ ही अर्जुन कांबले उपस्थित थे. अधिवेशन में राष्ट्रीय महामंत्री प्रदीप तिवारी ने पत्रकार सुरक्षा कानून, मीडिया कौंसिल, पत्रकार पेंशन योजना जैसे कई मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार अक्सर विज्ञापन देते समय लघु व मझोले अखबारों के साथ भेदभाव करती है. उन्होंने हालत बयान करते हुए कहा कि बड़े अखबारों के पास बड़ी पूंजी है, उनके लिए पत्रकारिता व्यवसाय की तरह है लेकिन छोटे अख़बार और मीडिया कर्मियों के लिए जीविका का साधन हैं. इसलिए उनके हितों का ध्यान रखा जाना बेहद जरूरी है. तिवारी ने कहा कि तमाम पत्रकारों से रेलवे और बस पास की सुविधा छीन ली गयी है. उन्होंने कहा कि हमें यकीन है कि इस मंच से पत्रकारों से जुड़े जितने भी मुद्दे उठाए गए हैं, सरकार उन पर गंभीरता पूर्वक विचार करते हुए अमल करेगी.
स्वतंत्र पत्रकारिता, लोकतंत्र की आत्मा-CM धामी
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सेमीनार का वर्चुअल उद्धाटन करते हुए कहा कि आज लोकतंत्र के इस सशक्त दौर में मीडिया के सामने कई चुनौतियां हैं, जिनका पत्रकार हर दिन सामना करते हैं। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र पत्रकारिता स्वस्थ्य लोकतंत्र की आत्मा होती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आज के इस अधिवेशन से उठी चर्चा सम्पूर्ण देश में एक क्रांति लाएगी। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने राष्ट्रीय अधिवेशन में देश के कोने-कोने से आए पत्रकारों का देवभूमि में स्वागत किया।मुख्यमंत्री धामी ने पत्रकारों के हितों के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन भी दोहराया.
छोटे अखबारों-चैनलों की उपेक्षा, सुरक्षा कानून जरूरीः रास बिहारी
नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट इंडिया के अधिवेशन में राष्ट्रीय अध्यक्ष रास बिहारी ने कहा कि कुछ सरकारी नीतियों के चलते छोटे अख़बारों को चलाना मुश्किल हो गया है। आज के दौर में चैनल बहुत हो गए हैं. कुछ लोगों ने गलत तरीके से अख़बार निकाला, जिसके चलते सरकार को कई नीतियां बनानी पड़ी हैं जिसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है. उन्होंने अखबारों को विज्ञापन देने की प्रक्रिया में व्याप्त सरकारी भ्रष्टाचार को रोकने पर ध्यान देने का सुझाव दिया. राष्ट्रीय अध्यक्ष रास बिहारी ने छोटे अख़बार व छोटे चैनलों की दयनीय स्थिति का हवाला देते हुए सरकार से आर्थिक सहायता करने की मांग की. साथ ही पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य ने जिस तरह यूसीसी कानून लागू कर उदाहरण पेश किया उसी तरह पत्रकारों की सुरक्षा का कानून बनाकर नई मिसाल पेश करनी चाहिए.
उत्तराखंड में जल्द लागू होगा प्रेस प्रोटेक्शन एक्ट : मंत्री गणेश जोशी
सेमीनार में एयूजे के राष्ट्रीय अध्यक्ष रास बिहारी की मांग को बल देते हुए उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि उत्तराखंड सरकार पत्रकारों के हितों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, और उनके लिए शीघ्र सुरक्षा कानून की मांग को लेकर वे मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्ताव रखेंगे. कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने विश्वास जताया कि जिस तरह उत्तराखंड राज्य यूनिफार्म सिविल कोड लागू करने में सबसे अग्रणी रहा है उसी तरह प्रेस प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने वाला देश का पहला राज्य बनेगा. उन्होंने मीडिया कर्मियों की भूमिका और योगदानों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार की जनकल्याण योजनाओंं के प्रचार प्रसार और समृद्ध उत्तराखंड राज्य के निर्माण में पत्रकारों की अहम भूमिका रही है. उन्होंने नेशनल जर्नलिस्ट यूनियन द्वारा पत्रकारों की पीड़ा, और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को बल देते हुए कहा कि सरकार राज्य के मीडिया कर्मियों को प्रोत्साहन देने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने गंभीरता से काम करेगी.
महाराष्ट्र में भी बनना चाहिए सख्त कानून-हंसराज कनौजिया
वहीं एनयूजे के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष हंसराज कनौजिया ने हरिद्वार में दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन के सफल आयोजन के लिए सरकार और यूनियन के शीर्ष पदाधिकारियों की सकारात्मक भूमिका की सराहना की. उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार ने जिस तरह एक कदम आगे बढ़ाते हुए राज्य में प्रेस प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने और श्रमजीवी अखबारों एवं चैनलों को प्रोत्साहन देने का निर्णय लिया है, वह सराहनीय है. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार को भी ऐसी पहल करनी चाहिए. प्रदेश अध्यक्ष हंसराज कन्नौजिया ने कहा कि महाराष्ट्र पुरोगामी राज्य और देश की आर्थिक राजधानी है लेकिन पत्रकारों की सुरक्षा और उनसे जुड़े ज्वलंत मामलों को लेकर महाराष्ट्र सरकार की भूमिका उदासीन दिखती है. हर साल पत्रकारों पर हमले और हत्याएं हो रही हैं. एक पुरोगामी राज्य में पत्रकार सुरक्षा कानून सिर्फ एक जुमला बना हुआ है. उन्होंने कहा कि उम्मीद है मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार राज्य में स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता को जिन्दा रखने के लिए प्रेस प्रोटेक्शन एक्ट पर विचार करेगी.





