UP Budget | लोहिया के आदर्शों को छोड़ चुकी सपा को बोलने का अधिकार नहींः CM योगी का हल्लाबोल
samajvadi party quits Lohia's idea " Akhilesh has no right to speak: CM Yogi's uproar

लखनऊः उत्तर प्रदेश 2025-26 के सामान्य बजट पर चर्चा में भाग लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज मंगलवार को समाजवादी पार्टी पर करारा हमला किया.योगी आदित्यनाथ ने बजट चर्चा पर प्रतिक्रिया के जवाब में कहा कि मुझे अच्छा लगा कि नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव ने आज अपनी बात को बड़े दार्शनिक अंदाज में सदन में रखा। उन्होंने डॉ राम मनोहर लोहिया के एक अनुयायी के रूप में अपनी बात को रखने का प्रयास किया, लेकिन वह स्वयं इसका आचरण कर पाते हैं या नहीं, यह उन्हें स्वयं ही देखना चाहिए था। समाजवादी पार्टी डॉ राम मनोहर लोहिया का नाम तो लेती है, लेकिन उनके मूल्यों और आदर्शों से दूर जा चुकी है। आज की समाजवादी पार्टी न तो डॉ लोहिया के बताए आचरण के अनुरूप कार्य कर रही है और न ही उनके बताए आदर्शों पर चल रही है। उपचुनावों पर सपा के आरोपों पर भी करारा हमला करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि दूसरों को उपदेश देने के बजाए यदि सपा मुखिया अखिलेश ने स्वयं इन बातों को अपने आचरण में उतारा होता तो संभवत इतनी करारी हार नहीं होती. उन्होंने दावा किया कि 2027 में भी इतनी करारी हार झेलने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
सपा को राम-कृष्ण-शंकर पर विश्वास नहीं
योगी ने दोहराया कि डॉक्टर लोहिया ने कहा था कि एक सच्चा समाजवादी वह है जो संपत्ति और संतति से दूर रहे, लेकिन सपा के आचरण में यह नजर नहीं आता। आदर्श के रूप में लोहिया ने भारत के लिए कहा था कि राम, कृष्ण और शंकर यह तीन आदर्श जब तक हैं तब तक तब तक भारत का कोई बाल बांका नहीं कर सकता है। भारत की जनता जब तक इन तीन देव महापुरुषों को अपना आदर्श मानेगी तब तक भारत, भारत बना रहेगा। इन तीनों देव महापुरुषों पर समाजवादी पार्टी का कोई विश्वास नहीं है, क्योंकि आप सपाई भारत की आस्था के साथ खिलवाड़ करते हैं। जो हमारा है, वह हमें मिल जाना चाहिए . सीएम योगी ने अपने हमले जारी रखते हुए कहा कि आप कहते हैं कि हमारी सोच सांप्रदायिक है, आप मुझे बताइए कि हमारी सोच कहां से सांप्रदायिक है। हम तो सबका साथ, सबके विकास की बात करते हैं। हमारा तो आदर्श है सर्वे भवंतु सुखिनः, सर्वे संतु निरामया। इसका सबसे आदर्श उदाहरण आपके सामने है.
संभल के तीर्थों को किसने नष्ट कराया, जवाब दो
45 दिन के महाकुम्भ का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि इस आयोजन ने भारत की विरासत और विकास की एक अनुपम छाप दुनिया के सामने प्रस्तुत की है। क्या उसमें किसी के साथ कोई भेदभाव हुआ है। न जाति का भेद, ना क्षेत्र का भेद, ना मत और मजहब का भेद था। 100 से अधिक देशों के लोग बड़ी श्रद्धा भाव के साथ आए। जो भी विकास और विरासत की इस अनुपम छटा का सहभागी बना वह अभिभूत होकर गया। एक पक्ष यह है जो आपके सामने उदाहरण के रूप में है। प्रत्यक्ष को प्रमाण की क्या आवश्यकता है, लेकिन दूसरा पक्ष वह भी था जब 26 फरवरी को संभल में 56 वर्षों के बाद शिव मंदिर में जलाभिषेक का कार्यक्रम हो रहा था। अकेले संभल में 67 तीर्थ थे और 19 कूप भी थे, जिनको एक निश्चित समय के अंदर समाप्त कर दिया गया। इन 67 तीर्थ में से 54 तीर्थ को ढूंढने का काम हमने किया है जो हमारी विरासत का हिस्सा हैं। जो 19 कूप हैं उन्हें भी मुक्त कराया गया है। हमने यही कहा है की जो हमारा है वह हमें मिल जाना चाहिए। हम इससे इतर कहीं नहीं जा रहे हैं। सच कड़वा होता है और कड़वे सच को स्वीकार करने का सामर्थ्य भी होना चाहिए।



