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Uddhav with Raj Thackeray | राज-उद्धव साथ आओ, ठाकरे बंधुओं को किसने दी चुनौती

Come together! Who called Raj and Uddhav Thackeray?

शिवसेना छोड़कर राज ठाकरे ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) का गठन किया था, जो ठाकरे परिवार से बाहर जाने वाला पहला सदस्य था। इसके बाद से उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे को एक साथ आने की भावनात्मक अपील मराठी लोगों ने कई बार की है। अब यह वही अपील फिर से सामने आ रही है। जब राज ठाकरे शिवसेना से बाहर निकले थे, तो यह एक बड़ा राजनीतिक भूकंप था। इसके बाद उन्होंने मनसे का गठन किया था। लेकिन आज भी कई मराठी लोग चाहते हैं कि दोनों ठाकरे भाई एक साथ आएं और इसके लिए उन्हें समय-समय पर पुकार लगाई जाती है। अब यह भावनात्मक पुकार एक बार फिर सामने आई है, जिसमें ‘ठाकरे बंधुओं को एक साथ आना चाहिए’ ऐसा संदेश शिवसेना भवन के सामने लगे बैनर पर लिखा गया है। इस बैनर पर राज और उद्धव ठाकरे का बाला साहेब ठाकरे के साथ एक फोटो भी लगाया गया है। इस बैनर पर मराठी समाज के हित के लिए ठाकरे बंधुओं को एकजुट होने का उल्लेख किया गया है। महानगरपालिका चुनाव के अवसर पर यह मांग की जा रही है कि दोनों नेता एक साथ आएं। इस प्रकार अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ठाकरे बंधु एक बार फिर साथ आकर एकजुट होते हैं या नहीं।

ठाकरे बंधुओं को भावनात्मक पुकार

शिवसेना भवन के सामने यह बैनर लगाया गया है, जिसमें उद्धव ठाकरे, बाला साहेब ठाकरे और राज ठाकरे तीनों का एक साथ एक फोटो है। इस पर लिखा है, “महाराष्ट्र की राजनीति की कीचड़ हो गई है। मराठी आदमी द्विधा में है। राजसाहेब ठाकरे और उद्धव साहेब ठाकरे अब तो एक साथ आओ, मराठी आदमी तुम्हारी राह देख रहा है।” यह बैनर अब शिवसेना भवन के सामने देखा जा रहा है।

राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे को अक्सर पारिवारिक कार्यक्रमों में एक साथ देखा गया है। अब तक कई कार्यकर्ताओं और नेताओं ने यह इच्छा जाहिर की है कि दोनों को एक साथ आना चाहिए। लेकिन राज या उद्धव ठाकरे या शिवसेना-मनसे से अभी तक एक साथ आने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। फिर भी, शिवसेना भवन के सामने लगे इस बैनर ने न सिर्फ मुंबई बल्कि पूरे राज्य का ध्यान आकर्षित किया है और राज और उद्धव के मनमिलन या गठबंधन की चर्चा राजनीतिक हलकों में शुरू हो गई है। अब यह देखना होगा कि दोनों आगे क्या रुख अपनाते हैं।

राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के बीच मतभेद

राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के बीच लंबे समय से मतभेद हैं। राज ठाकरे ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) नाम से अपना नया राजनीतिक दल बनाया था, जिसे राज्य में अच्छा समर्थन मिला था। राज ठाकरे का राज्यभर में एक प्रभावशाली आक्रामक आंदोलन देखा गया था। इसके परिणामस्वरूप, मनसे ने अपनी पहली विधानसभा चुनाव में 13 विधायक भेजे थे। लेकिन इसके बाद परिस्थितियां बदल गईं। इसके बावजूद, एक बार जब उद्धव ठाकरे की तबियत खराब हो गई थी, तो राज ठाकरे उनके मिलने गए थे। जब उद्धव ठाकरे को अस्पताल से छुट्टी मिली, तो राज ठाकरे ने कार चलाकर लोगों का ध्यान आकर्षित किया था। लेकिन इन दोनों भाईयों को कई वर्षों से राजनीति में एक साथ काम करते नहीं देखा गया है।

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