
Big News : बेलापुर पहाड़ी ढलानों पर विध्वंस, नागरिकों का विरोध-आपदा की चेतावनी
Erosion of Belapur hill slopes continues, citizens protest-disaster warning
नवी मुंबई: बेलापुर के पहाड़ी ढलानों पर अवैध निर्माण और धड़ल्ले से चल रहे कटाव के कारण भूस्खलन की आशंका बढ़ गई है. पहाड़ी ढलानों के नीचे निवास करने वाले बेलापुर के सैकड़ों परिवारों ने अब इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन प्रारंभ कर दिया है. उन्होंनें मानव श्रृंखला बनाकर आंदोलन किया और इरशालवाड़ी जैसी आपदा की चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि नवी मुंबई के सीबीडी बेलापुर में न्यायिक और सरकारी निर्देशों के बावजूद भूस्खलन-प्रवण बेलापुर पहाड़ी ढलानों पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हो रहा है. नैटकनेक्ट फाउंडेशन ने कहा कि पहाड़ी ढलानों पर 30 से अधिक धार्मिक संरचनाएं बन गई हैं, जिन्होंने 2.3 लाख वर्ग फीट जगह पर कब्जा कर लिया है. इसे नगर योजनाकार सिडको ने अवैध करार दिया और ध्वस्तीकरण नोटिस भी जारी किया है. सिडको ने खुद स्वीकार किया कि संरचनाओं को 2009 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार जाना होगा, जिसमें सार्वजनिक स्थानों पर मंदिरों, चर्चों और मस्जिदों, गुरुद्वारों पर प्रतिबंध लगाया गया है.
भूस्खलन से बचाने नैटकनेक्ट का अभियानः बीएन कुमार
पहाड़ी और लोगों को भूस्खलन से बचाने के लिए अभियान चला रहे नैटकनेक्ट के निदेशक बी एन कुमार ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले अगस्त में महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग (MSHRC) को वचन दिया था कि सिडको द्वारा संरचनाओं को ध्वस्त कर दिया जाएगा. एमएसएचआरसी के आदेश के करीब छह महीने बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है, इसके विपरीत कुछ संरचनाओं का विस्तार जारी है, कल्पतरु सहकारी आवास सोसायटी के निवासी कपिल कुलकर्णी ने कहा, वे पहले भी पहाड़ी से दो भूस्खलन देख चुके हैं. वहीं एक एक पर्यावरण सेवी कार्यकर्ता हिमांशु काटकर ने कहा, “हमें इरशालवाड़ी जैसी आपदा की आशंका है, क्योंकि सैकड़ों भक्त ढीली मिट्टी पर बने इन मंदिरों की ओर आकर्षित होते हैं.” उन्होंने कहा कि कुछ मंदिरों में हॉल हैं, जिनमें 1,500 से अधिक लोग बैठ सकते हैं और भगवान न करे, अगर कोई भूस्खलन हुआ, तो वे सभी ढह जाएंगे. जुलाई 2023 में रायगड़ जिले की इरशालवाड़ी गांव में ऐसी ही भूस्खलन की घटना हुई थी जिसमें 84 लोगों की मौत हो गई थी.
मंदिरों को स्थलांतरित करो, जीवन बचाओ-नागरिक की मांग
प्रदर्शनकारियों ने बेलापुर पहाड़ियों को बचाओ, मंदिरों को स्थानांतरित करो, लोगों का जीवन मायने रखता है, पर्यावरण बचाओ, पहाड़ी ढलानों पर मंदिर सभी को खतरे में डालते हैं, हमारे हरे आवरण की रक्षा करो, वनों की कटाई बंद करो जैसे संदेशों के साथ तख्तियां और बैनर थामे हुए थे. स्वरोजगार करने वाली व्यवसायी अमृता कर्णवत ने कहा, “हम गौशाला या मंदिरों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उन्हें सुरक्षित क्षेत्रों में स्थित होना चाहिए.” पिछले कुछ वर्षों में पहाड़ियों पर हरियाली का अधिकांश हिस्सा नष्ट हो गया है और कई शिकायतों के बावजूद कोई भी अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहा है, उन्होंने खेद व्यक्त किया.
पूरा समुदाय परेशान है कोई सुनवाई नहींः कर्नल बेंजामिन
कार्यकर्ता सुशील पाटिल ने कहा कि निवासियों ने एक दशक से भी अधिक समय पहले सिडको को अवैध निर्माणों की ओर इशारा किया था और अधिकारियों ने हमें केवल आश्वासन दिया और कोई कार्रवाई नहीं की. पूर्व सैनिक कर्नल बेंजामिन ने कहा कि एक समुदाय के रूप में “हम सभी परेशान हैं” क्योंकि निहित स्वार्थों द्वारा हरियाली को नुकसान पहुंचाया गया है. उन्होंने कहा, “हम सभी यहां अपनी एकजुटता दिखाने और इस बात पर जोर देने के लिए आए हैं कि हम अपने जंगलों को इस तरह से नष्ट नहीं होने देंगे.”
कार्रवाई नहीं हुई तो नैटकनेक्ट दायर करेगा याचिका
मानव श्रृंखला में भाग लेने वाले कई लोगों ने कहा कि पहाड़ी का विनाश सिडको मुख्यालय से नंगी आंखों से साफ देखा जा सकता है. विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए वाशी निवासी अनिल सिंह ने पूछा: “शिकायत करने या अदालत जाने की क्या जरूरत है?” आरटीआई कार्यकर्ता सुधीर दानी ने आश्चर्य व्यक्त किया कि सिडको प्रबंधन अदालतों और यहां तक कि मंत्रालय के आदेशों की भी परवाह नहीं करता है. शहरी विकास विभाग ने हाल ही में सिडको के प्रबंध निदेशक और नवी मुंबई नगर आयुक्त को मानवाधिकार आयोग के आदेश की याद दिलाई है क्योंकि नैटकनेक्ट ने न्यायिक घोषणाओं का उल्लंघन करने वाली सरकारी एजेंसियों के खिलाफ अवमानना याचिका दायर करने की चेतावनी दी है.



