
हेडलाइन: मराठी भाषा पर गर्व करें, मराठी में संवाद करें – आशीष जयस्वाल
Take pride in the Marathi language, communicate in Marathi – Ashish Jaiswal
नागपुर: महाराष्ट्र के नागपुर जिले के रामटेक में महाराष्ट्र शासन के मराठी भाषा विभाग और कविकुलगुरु कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय की ओर से ‘अभिजात मराठी भाषा सप्ताह’ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य मराठी भाषा की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक महत्व और साहित्यिक परंपरा के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना था। कार्यक्रम में महाराष्ट्र के राज्यमंत्री एडवोकेट आशीष जयस्वाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यमंत्री आशीष जयस्वाल ने मराठी भाषा के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सातवाहन कालीन शिलालेखों से लेकर महानुभाव पंथ की साहित्यिक परंपरा और संत तुकाराम के अभंगों तक मराठी भाषा ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। मराठी भाषा का इतिहास महाराष्ट्र की सांस्कृतिक, सामाजिक और साहित्यिक परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। सदियों से मराठी भाषा ने समाज को विचारों, भक्ति, ज्ञान और संस्कृति से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।
जयस्वाल ने इस समृद्ध भाषाई विरासत को संरक्षित करने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक का उपयोग करके मराठी भाषा से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेजों, शिलालेखों, साहित्य और अन्य महत्वपूर्ण धरोहरों का संरक्षण किया जाना चाहिए। डिजिटल माध्यमों के जरिए मराठी भाषा की ऐतिहासिक और साहित्यिक संपदा को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जा सकता है। राज्यमंत्री ने नागरिकों से अपील की कि वे मराठी भाषा के प्रति गर्व की भावना रखें और अपने दैनिक व्यवहार में मराठी भाषा का अधिकाधिक उपयोग करें। उन्होंने कहा कि भाषा का महत्व केवल साहित्य या सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे आम लोगों के रोजमर्रा के संवाद का भी अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए। एक-दूसरे से मराठी में बातचीत करने से भाषा का प्रसार बढ़ेगा और इसकी परंपरा को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
इस अवसर पर कविकुलगुरु कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय की अधिष्ठाता प्रोफेसर कविता होले ने भी मराठी भाषा के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मराठी भाषा हमारी अस्मिता और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए इसका उपयोग केवल औपचारिक अवसरों पर ही नहीं, बल्कि घरों, सार्वजनिक स्थानों और कार्यस्थलों पर भी किया जाना चाहिए। प्रोफेसर होले ने दैनिक जीवन में मराठी भाषा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि भाषा का वास्तविक संवर्धन तभी संभव है, जब लोग इसे अपने व्यवहार और संवाद में सहज रूप से अपनाएं। परिवार से लेकर सामाजिक और व्यावसायिक जीवन तक मराठी के उपयोग से भाषा के प्रति जुड़ाव मजबूत हो सकता है।
रामटेक में आयोजित ‘अभिजात मराठी भाषा सप्ताह’ के माध्यम से मराठी भाषा की ऐतिहासिक विरासत, साहित्यिक समृद्धि और वर्तमान समय में उसकी प्रासंगिकता को रेखांकित किया गया। कार्यक्रम में मराठी भाषा के संरक्षण, आधुनिक तकनीक के माध्यम से उसके दस्तावेजीकरण और दैनिक जीवन में उसके उपयोग को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया।



