दिल्ली में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन तेज, जंतर-मंतर जाने से रोके गए प्रदर्शनकारी
Protests against CEC Gyanesh Kumar intensify in Delhi protesters stopped from reaching Jantar Mantar.

नई दिल्ली: दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहा विरोध-प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। Special Intensive Revision (SIR) के तहत मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण को लेकर उठे विवाद के बीच रविवार को राजधानी के कई हिस्सों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बनी रही। पुलिस ने जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को कई जगहों पर बैरिकेड लगाकर रोका और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया। प्रदर्शनकारी आरोप लगा रहे हैं कि SIR की प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर बदलाव से पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण में किसी तरह की गड़बड़ी के आरोपों को खारिज किया है और SIR को मतदाता सूची को दुरुस्त करने की प्रक्रिया बताया है।
तीसरे दिन भी जारी रहा प्रदर्शन
दिल्ली में यह आंदोलन 2 अक्टूबर से शुरू हुआ था। रविवार को AISA, कांग्रेस, AAP और अन्य संगठनों के कार्यकर्ताओं ने अलग-अलग मार्च निकालने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों का लक्ष्य जंतर-मंतर पहुंचकर अपनी मांगों को उठाना था, लेकिन पुलिस ने सेंट्रल दिल्ली के कई हिस्सों में उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। रविवार को करीब 5,000 पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान सुरक्षा व्यवस्था में लगाए गए थे। जंतर-मंतर और उसके आसपास बैरिकेडिंग की गई थी। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने कई प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा बढ़ाई। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई स्थानों पर धक्का-मुक्की और झड़प की स्थिति भी बनी। पुलिस के अनुसार रविवार की कार्रवाई में 100 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि अन्य रिपोर्टों में करीब 120 लोगों के हिरासत में लिए जाने की बात कही गई है।
AISA, AAP और कांग्रेस के कार्यकर्ता हिरासत में
प्रदर्शन में छात्र संगठनों और विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण समेत कई लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया। AAP और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भी जंतर-मंतर की ओर मार्च करने की कोशिश की। पुलिस ने अलग-अलग स्थानों पर इन मार्चों को रोक दिया। इससे पहले शुक्रवार और शनिवार को भी बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया था। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए BNSS की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू होने का हवाला दिया है। पुलिस का कहना है कि बिना अनुमति बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने पर कार्रवाई की गई।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव
रविवार को प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान कई जगह तनाव बढ़ गया। पुलिस के मुताबिक, कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हुए। एक रिपोर्ट के अनुसार करीब 15 पुलिसकर्मियों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस ने पहले के प्रदर्शनों के संबंध में FIR भी दर्ज की हैं। इनमें सार्वजनिक सेवक के आदेश की अवहेलना, सरकारी काम में बाधा डालने और पुलिसकर्मियों के खिलाफ कथित बल प्रयोग जैसे आरोप शामिल हैं। हालांकि प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन को रोकने के लिए जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया और लोगों को मनमाने तरीके से हिरासत में लिया।
महिला पत्रकारों ने लगाए पुलिस पर गंभीर आरोप
प्रदर्शन के दौरान एक अलग विवाद भी सामने आया। तीन महिला पत्रकारों ने आरोप लगाया कि 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर के आसपास प्रदर्शन की रिपोर्टिंग के दौरान दिल्ली पुलिस के कुछ अधिकारियों ने उनके साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार और यौन उत्पीड़न किया।महिला पत्रकारों की शिकायत के बाद दिल्ली पुलिस ने मामले की जांच Crime Branch को सौंप दी है। पुलिस ने CCTV फुटेज और उपलब्ध वीडियो साक्ष्यों की जांच करने की बात कही है। पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी। दूसरी ओर, पत्रकारों और प्रदर्शनकारियों ने इस मामले में FIR दर्ज करने और जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है।
SIR बना विवाद की मुख्य वजह
पूरे आंदोलन के केंद्र में चुनाव आयोग की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मतदाता सूची में व्यापक स्तर पर पुनरीक्षण से ऐसे लोगों के नाम भी प्रभावित हो सकते हैं जो मतदान के योग्य हैं। उनका आरोप है कि प्रक्रिया में पर्याप्त पारदर्शिता और सुरक्षा उपाय नहीं हैं। विपक्षी दलों ने भी SIR पर सवाल उठाते हुए CEC के इस्तीफे की मांग की है। हालांकि चुनाव आयोग और केंद्र सरकार समर्थक पक्ष इन आरोपों को खारिज करते हुए कहते हैं कि मतदाता सूची को अपडेट और साफ-सुथरा रखना चुनावी प्रक्रिया का जरूरी हिस्सा है।
7 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक का प्रदर्शन
विरोध अब केवल छात्र और नागरिक संगठनों तक सीमित नहीं रहा है। दिल्ली में INDIA ब्लॉक से जुड़े कई दलों ने 7 अक्टूबर को दिल्ली स्थित चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर संयुक्त प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। कांग्रेस, CPI, CPI(M), RJD, NCP और RSP समेत कई दल इस प्रदर्शन में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। इन दलों ने SIR को वापस लेने और मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से कराने की मांग की है।
10 अक्टूबर को बड़े प्रदर्शन की तैयारी
इस बीच Cockroach Janta Party (CJP) ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर समेत देशभर में प्रदर्शन का आह्वान किया है। संगठन CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया के खिलाफ आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। CJP नेताओं ने दावा किया है कि उनके कुछ नेताओं को 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले गिरफ्तार किया जा सकता है। हालांकि ये दावे फिलहाल संगठन के नेताओं के आरोप हैं और पुलिस की ओर से ऐसी गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा
CEC ज्ञानेश कुमार और SIR को लेकर विवाद अब न्यायपालिका तक भी पहुंच गया है। 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई निर्धारित है। याचिकाओं में CEC की कार्यप्रणाली और SIR प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाए गए हैं। फिलहाल दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है और सेंट्रल दिल्ली में किसी भी बड़े जमावड़े को रोकने के लिए पुलिस बल तैनात है। आने वाले दिनों में 7 और 10 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शनों के कारण राजधानी में राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।
CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से शुरू हुआ यह विरोध अब SIR, मतदाता अधिकार, पुलिस कार्रवाई और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर बड़े राजनीतिक विवाद में बदल गया है। प्रदर्शनकारी आंदोलन जारी रखने पर अड़े हैं, जबकि प्रशासन का जोर कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर है।



