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अकोला सम्मेलन में मराठी के संरक्षण और आधुनिक विस्तार पर चर्चा

Discussion on the preservation and modern expansion of Marathi at the Akola conference.

महाराष्ट्र, अकोला: मराठी भाषा को अभिजात भाषा का दर्जा मिलने के बाद अब उसके संरक्षण के साथ-साथ उसे ज्ञानभाषा के रूप में विकसित करने की आवश्यकता है। शिक्षा, अनुसंधान, विज्ञान, तकनीक और आधुनिक ज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में मराठी का उपयोग बढ़ाया जाना चाहिए। यह बात अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. रवींद्र शोभणे ने कही। अकोला में आयोजित पहले अभिजात मराठी भाषा सम्मेलन में डॉ. शोभणे ने कहा कि मराठी का दायरा केवल साहित्य तक सीमित नहीं रहना चाहिए। नई पीढ़ी को मराठी की समृद्ध साहित्यिक और सांस्कृतिक परंपरा से जोड़ने के साथ-साथ बदलते समय के अनुरूप आधुनिक और सक्षम मराठी भाषा विकसित करना भी जरूरी है।

इस सम्मेलन का आयोजन मराठी विश्वकोश निर्मिती मंडल की ओर से किया गया। सम्मेलन का उद्घाटन साहित्यकार और पद्मश्री नामदेव कांबळे के हाथों हुआ। इस अवसर पर नामदेव कांबळे ने कहा कि मराठी भाषा को प्रवाहपूर्ण, समृद्ध और समय के अनुरूप सक्षम बनाए रखने के लिए लेखकों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों, विद्यार्थियों और समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।सम्मेलन में इस बात पर भी जोर दिया गया कि मराठी को अभिजात भाषा का दर्जा मिलने के बाद उसके संरक्षण और संवर्धन के लिए व्यापक प्रयास किए जाने चाहिए।

साथ ही ज्ञान निर्माण और आधुनिक क्षेत्रों में मराठी की भूमिका को मजबूत करना आने वाले समय की महत्वपूर्ण चुनौती है। मराठी को केवल साहित्य और संस्कृति की भाषा तक सीमित न रखते हुए शिक्षा, शोध, विज्ञान और तकनीक की ज्ञानभाषा के रूप में विकसित करना समय की आवश्यकता है।

इसके लिए सरकारी संस्थाओं के साथ-साथ शिक्षकों, शोधकर्ताओं, लेखकों, विद्यार्थियों और समाज की सामूहिक भागीदारी महत्वपूर्ण होगी।

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