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सभापति चुनाव से पहले भाजपा का बड़ा फैसला, मतदान से बनाई दूरी

BJP's major decision ahead of the Chairperson election opts to stay away from voting.

राजस्थान, बारां : राजस्थान के बारां नगर परिषद सभापति चुनाव में मतदान से ठीक पहले बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी ने अपने घोषित प्रत्याशी निलेश जैन के नाम के बावजूद सभापति चुनाव में मतदान से अलग रहने का फैसला किया है। भाजपा के इस निर्णय से चुनावी मुकाबले को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष नरेश सिकरवार ने कहा कि पार्टी विपक्ष में बैठकर जनता की आवाज उठाएगी। उनके बयान के बाद भाजपा के सभापति चुनाव में मतदान नहीं करने का फैसला स्पष्ट हुआ। बारां नगर परिषद में सभापति पद के लिए मतदान सोमवार सुबह 10 बजे शुरू हुआ और दोपहर 2 बजे तक मतदान की प्रक्रिया निर्धारित थी। बारां नगर परिषद में कुल 60 वार्ड हैं। हालिया वार्ड चुनाव परिणाम के अनुसार आम आदमी पार्टी ने 31 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस के खाते में 18, भाजपा के पास 9 और दो सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशी विजयी हुए हैं। इस तरह AAP के पास 31 सीटों के साथ सदन में बहुमत का आंकड़ा मौजूद है।

नगर परिषद में दलों की स्थिति इस प्रकार है—

  • आम आदमी पार्टी — 31 पार्षद
  • कांग्रेस — 18 पार्षद
  • भाजपा — 9 पार्षद
  • निर्दलीय — 2 पार्षद
  • कुल — 60 पार्षद

60 सदस्यीय परिषद में बहुमत का आंकड़ा 31 है और AAP के पास ठीक 31 पार्षद हैं। इसलिए पार्टी अपने सभी पार्षदों के समर्थन के साथ सभापति पद के चुनाव में बहुमत के आंकड़े तक पहुंचती है।

सभापति पद के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में

बारां नगर परिषद सभापति पद के लिए तीन प्रमुख उम्मीदवारों के नाम सामने आए हैं। उपलब्ध प्रत्याशी विवरण के अनुसार AAP ने शीतल राठौड़, कांग्रेस ने मीनाक्षी और भाजपा ने निलेश जैन को मैदान में उतारा है। सभापति का पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित है। ऐसे में चुनाव का मुख्य मुकाबला AAP की शीतल राठौड़ और कांग्रेस की मीनाक्षी के बीच माना जा रहा था, जबकि भाजपा की ओर से निलेश जैन का नाम घोषित किया गया था। भाजपा के मतदान से अलग रहने के फैसले ने राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दिया है। पार्टी जिलाध्यक्ष नरेश सिकरवार ने कहा है कि भाजपा विपक्ष में बैठकर जनता की आवाज उठाएगी। पार्टी की ओर से इस फैसले के पीछे विस्तृत कारण सार्वजनिक रूप से क्या बताया गया है, यह अलग से स्पष्ट किए जाने की जरूरत है। भाजपा के नौ पार्षदों के मतदान से बाहर रहने की स्थिति में सभापति चुनाव के लिए सदन का राजनीतिक समीकरण और अधिक स्पष्ट हो जाता है। AAP के पास 31 पार्षद हैं, जबकि कांग्रेस के पास 18 और दो निर्दलीय पार्षद हैं।

AAP के पास पहले से बहुमत का आंकड़ा

बारां नगर परिषद के चुनावी गणित में सबसे अहम तथ्य यह है कि AAP ने 60 में से 31 सीटें जीतकर बहुमत का आंकड़ा हासिल किया है। इसका मतलब है कि पार्टी को सभापति चुनाव में बहुमत के लिए दूसरे दल के पार्षदों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है, बशर्ते उसके सभी 31 पार्षद मतदान में उसके प्रत्याशी के पक्ष में वोट करें। इसी वजह से भाजपा के मतदान से अलग रहने का फैसला चुनाव के अंतिम नतीजे के गणित को प्रभावित करने के बजाय राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है।

कांग्रेस के 18 और निर्दलीयों के 2 पार्षद

कांग्रेस के पास नगर परिषद में 18 पार्षद हैं, जबकि दो पार्षद निर्दलीय हैं। ऐसे में कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों की भूमिका भी चुनावी प्रक्रिया में चर्चा का विषय बनी हुई है। हालांकि, उपलब्ध सीट गणित के अनुसार AAP के पास अकेले ही 31 सीटें हैं, जो बहुमत के बराबर हैं। इसलिए यदि पार्टी के सभी पार्षद एकजुट रहते हैं तो उसके प्रत्याशी के लिए बहुमत हासिल करने का रास्ता साफ रहता है।सभापति चुनाव से पहले राजनीतिक दलों ने अपने-अपने पार्षदों को एकजुट रखने के लिए बाड़ेबंदी की। ताजा स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार AAP और अन्य दलों के पार्षद नगर परिषद पहुंचे। चुनाव प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए हैं। मतदान केवल निर्वाचित पार्षदों द्वारा किया जा रहा है। नगर परिषद सभापति के चुनाव में जनता सीधे मतदान नहीं करती। वार्ड पार्षद मतदान करके सभापति का चुनाव करते हैं। बारां में 60 निर्वाचित पार्षद इस प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

राजस्थान में एक साथ हो रहे निकाय प्रमुखों के चुनाव

बारां का यह चुनाव राजस्थान में चल रही व्यापक नगर निकाय चुनाव प्रक्रिया का हिस्सा है। 21 सितंबर 2026 को राज्य के 273 नगरीय निकायों में अध्यक्ष, सभापति और मेयर पदों के लिए मतदान कराया जा रहा है। इनमें 5 नगर निगम, 24 नगर परिषद और 244 नगर पालिकाएं शामिल हैं। मतदान के बाद संबंधित निकायों में मतगणना की प्रक्रिया शुरू की जानी है। राज्य में नगर निकायों के वार्ड पार्षदों के चुनाव 9 और 11 सितंबर को दो चरणों में कराए गए थे। इसके बाद निर्वाचित पार्षदों के माध्यम से नगर निकायों के प्रमुख चुने जा रहे हैं। भाजपा के मतदान से अलग रहने के फैसले के बाद बारां नगर परिषद सभापति चुनाव में अब सबसे ज्यादा नजर अंतिम मतदान और परिणाम पर है। AAP के पास 31 पार्षदों के साथ बहुमत का आंकड़ा मौजूद है, कांग्रेस के पास 18, भाजपा के पास 9 और दो निर्दलीय पार्षद हैं। भाजपा के इस फैसले के बाद चुनावी प्रक्रिया में पार्टी की भूमिका विपक्ष तक सीमित रखने की बात सामने आई है।

अब मतदान पूरा होने और मतगणना के बाद यह साफ होगा कि बारां नगर परिषद के सभापति पद पर किस उम्मीदवार की जीत होती है।

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