
वन अधिकार अधिनियम को लेकर जगत सिंह नेगी की पदयात्रा पर रवि ठाकुर ने उठाए सवाल
Ravi Thakur raises questions regarding Jagat Singh Negi's *padyatra* concerning the Forest Rights Act.
हिमाचल प्रदेश : हिमाचल प्रदेश में वन अधिकार अधिनियम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की ओर से वन अधिकार अधिनियम के मुद्दे पर निकाली जा रही पदयात्रा को लेकर पूर्व विधायक रवि ठाकुर ने सवाल उठाए हैं। रवि ठाकुर ने कहा कि वन और भूमि से जुड़े मामलों का निपटारा पहले से ही निर्धारित नियमों और संबंधित अधिनियमों के तहत किया जाता है। उनका आरोप है कि पदयात्रा के माध्यम से लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा की जा रही है। वन अधिकार अधिनियम-2006 को लेकर जगत सिंह नेगी लगातार इसके प्रभावी क्रियान्वयन की बात कहते रहे हैं। इससे पहले उन्होंने विभिन्न बैठकों और कार्यशालाओं में कहा है कि अधिनियम के तहत पात्र पारंपरिक वनवासियों को व्यक्तिगत और सामुदायिक वन अधिकार मिल सकते हैं। सरकार की ओर से पंचायत स्तर पर वन अधिकार समितियों के गठन और दावों की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की बात भी कही गई है।
जगत सिंह नेगी ने किन्नौर और अन्य जनजातीय क्षेत्रों में भी वन अधिकार अधिनियम-2006 के प्रावधानों को लेकर लोगों को जागरूक करने पर जोर दिया है। हालिया बयानों में उन्होंने कहा है कि प्रदेश सरकार भूमिहीन लोगों को भूमि उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है और वन अधिकार अधिनियम के माध्यम से पात्र लोगों को अधिकार दिलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। वहीं, रवि ठाकुर का कहना है कि वन एवं भूमि से जुड़े मामलों में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। उनका सवाल है कि यदि संबंधित कार्य नियमों और अधिनियम के अनुसार किए जा रहे हैं तो पदयात्रा के माध्यम से इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से उठाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है।
वन अधिकार अधिनियम-2006 का उद्देश्य अनुसूचित जनजातियों और अन्य पारंपरिक वनवासियों के वन भूमि एवं वन संसाधनों से जुड़े अधिकारों को कानूनी मान्यता देना है। हिमाचल में इस कानून के क्रियान्वयन को लेकर पिछले कुछ वर्षों में प्रशासनिक स्तर पर कार्यशालाएं और पंचायत स्तर पर समितियों के गठन की प्रक्रिया पर जोर दिया गया है। इस पूरे मामले में एक ओर जहां जगत सिंह नेगी वन अधिकार अधिनियम को पात्र लोगों तक पहुंचाने और इसके प्रभावी क्रियान्वयन की बात कर रहे हैं, वहीं रवि ठाकुर पदयात्रा के औचित्य और इसके जरिए दिए जा रहे संदेश पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में वन अधिकार अधिनियम का मुद्दा हिमाचल की राजनीति में एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है।



