रिलायंस कैपिटल पर LIC निवेश धोखाधड़ी का आरोप, CBI ने दर्ज की FIR
Reliance Capital accused of fraud regarding LIC investment; CBI registers FIR
मुंबई,सान्वी देशपांडे: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने कथित LIC निवेश धोखाधड़ी से जुड़े मामले में रिलायंस कैपिटल लिमिटेड, मुंबई, उसके पूर्व अध्यक्ष और कुछ अज्ञात लोक सेवकों सहित अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। यह मामला भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है। CBI अब पूरे मामले में कथित आपराधिक साजिश, निवेश की राशि के इस्तेमाल और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच करेगी।
2012 से 2018 के बीच LIC ने किया था ₹3,900 करोड़ का निवेश
LIC की शिकायत के अनुसार, वर्ष 2012 से 2018 के बीच रिलायंस कैपिटल द्वारा जारी किए गए पांच गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर (Non-Convertible Debentures) में LIC ने कुल ₹3,900 करोड़ का निवेश किया था। शिकायत के मुताबिक, इन निवेशों का उद्देश्य कंपनी की सामान्य कारोबारी जरूरतों, वित्तीय आवश्यकताओं तथा मौजूदा कर्ज के पुनर्वित्त (Refinancing) के लिए धन उपलब्ध कराना था। हालांकि, बाद में इन निवेशों को लेकर गंभीर सवाल उठे और LIC की ओर से CBI में शिकायत दर्ज कराई गई।
LIC ने लगाया ₹2,685 करोड़ के नुकसान का आरोप
CBI के अनुसार, LIC ने आरोप लगाया है कि संबंधित आरोपियों ने कथित तौर पर आपराधिक साजिश के तहत धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, धन के कथित दुरुपयोग और गबन जैसे अपराध किए। शिकायत में दावा किया गया है कि कथित अनियमितताओं के कारण LIC को लगभग ₹2,685 करोड़ का नुकसान हुआ। साथ ही आरोप है कि आरोपियों तथा अन्य कथित लाभार्थियों को अनुचित आर्थिक लाभ मिला। हालांकि, ये आरोप फिलहाल जांच का विषय हैं और FIR में लगाए गए आरोपों को अदालत द्वारा सिद्ध किया जाना बाकी है।
CBI करेगी निवेश की रकम के इस्तेमाल की जांच
FIR दर्ज होने के बाद CBI मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करेगी। जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि LIC से प्राप्त निवेश राशि का इस्तेमाल किस प्रकार किया गया, क्या निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप धन का उपयोग हुआ और क्या किसी स्तर पर धन का कथित दुरुपयोग किया गया। CBI यह भी जांच करेगी कि इस पूरे मामले में कौन-कौन से व्यक्ति शामिल थे और क्या उनके बीच किसी प्रकार की कथित आपराधिक साजिश थी।
रिलायंस समूह से जुड़ी कंपनियों के खिलाफ पहले भी FIR
यह पहली बार नहीं है जब CBI ने रिलायंस समूह से जुड़ी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की है। इससे पहले विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) और LIC की शिकायतों के आधार पर CBI ने रिलायंस कम्युनिकेशंस, रिलायंस कैपिटल, रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस टेलीकॉम समेत अन्य कंपनियों के खिलाफ कुल आठ FIR दर्ज की थीं। इन मामलों में CBI अब तक छह आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है और सात आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच
CBI के अनुसार, इन मामलों की जांच की निगरानी सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की जा रही है। ऐसे में रिलायंस समूह से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर भी नजर बनी हुई है। LIC के ₹3,900 करोड़ के निवेश से जुड़े इस नए मामले में अब CBI की जांच यह स्पष्ट करेगी कि निवेश की राशि का वास्तविक उपयोग कैसे हुआ, कथित नुकसान की परिस्थितियां क्या थीं और मामले में किन लोगों की भूमिका रही।
FIR में दर्ज आरोप जांच के अधीन हैं। किसी व्यक्ति या संस्था की आपराधिक जिम्मेदारी अदालत में आरोप सिद्ध होने के बाद ही अंतिम रूप से निर्धारित होगी।



