बागेश्वर में शुरू हुआ कोट भ्रामरी मेला, उमड़े बड़ी संख्या में श्रद्धालु
Kot Bhramari Fair begins in Bageshwar large numbers of devotees flock to the event.

उत्तराखंड, बागेश्वर: उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति और पारंपरिक विरासत से जुड़े प्रसिद्ध कोट भ्रामरी मेले का शुभारंभ केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा ने किया। मेले के शुभारंभ अवसर पर मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-अर्चना और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग मौजूद रहे। कोट भ्रामरी मेला क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण आयोजन माना जाता है। मेले में बागेश्वर जिले के आसपास के क्षेत्रों के अलावा दूर-दराज से भी श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर परिसर में लोगों ने पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
धार्मिक आस्था और लोक संस्कृति का संगम
मेले के शुभारंभ के अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा ने कहा कि कोट भ्रामरी मेला क्षेत्र की धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति और सदियों पुरानी परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ नई पीढ़ी को स्थानीय परंपराओं और विरासत से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति और धार्मिक परंपराएं प्रदेश की विशिष्ट पहचान हैं। ऐसे मेलों के माध्यम से स्थानीय संस्कृति, लोक कलाओं और परंपराओं को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है।
स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देने का अवसर
कार्यक्रम के दौरान सड़क योजना राज्य स्तरीय अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष शिव सिंह बिष्ट ने भी विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि कोट भ्रामरी मंदिर क्षेत्रवासियों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मेले जैसे आयोजन स्थानीय लोगों को अपनी संस्कृति, परंपराओं और लोक जीवन को प्रदर्शित करने का मंच उपलब्ध कराते हैं। मेले के दौरान धार्मिक गतिविधियों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की भागीदारी से मेले का माहौल उत्सवमय नजर आया। कोट भ्रामरी मेले के आयोजन से धार्मिक पर्यटन और स्थानीय सांस्कृतिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। मेले में आने वाले श्रद्धालु जहां धार्मिक स्थलों के दर्शन कर रहे हैं, वहीं उत्तराखंड की पारंपरिक लोक संस्कृति और ग्रामीण जीवन से भी परिचित हो रहे हैं।
- धार्मिक महत्व: कोट भ्रामरी देवी को कत्यूरी राजवंश की कुलदेवी माना जाता है। मान्यता है कि आदि गुरु शंकराचार्य ने भी इस स्थान की यात्रा की थी।
- श्रद्धालुओं की आस्था: मेले के दौरान केवल बागेश्वर ही नहीं, बल्कि पूरे कुमाऊं क्षेत्र और देश के अन्य हिस्सों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन और आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं।
- सांस्कृतिक धरोहर: यह मेला स्थानीय लोक कला, संगीत, पारंपरिक नृत्य और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने का एक बड़ा माध्यम है।



