गणेश विसर्जन के लिए 170 कृत्रिम झीलें, प्राकृतिक जलस्रोतों को बचाने पर जोर
170 artificial lakes ready for Ganesh Visarjan; emphasis on preserving natural water bodies.
नवी मुंबई/सान्वी देशपांडे : गणेशोत्सव के दौरान प्राकृतिक जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने और श्रद्धालुओं को उनके घरों के नजदीक विसर्जन की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए नवी मुंबई महानगरपालिका NMMC ने इस वर्ष शहर में 170 कृत्रिम विसर्जन झीलों का निर्माण कराया है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार कृत्रिम झीलों की संख्या बढ़ाई गई है। महानगरपालिका का उद्देश्य पारंपरिक विसर्जन स्थलों पर बढ़ने वाली भीड़ को कम करने के साथ-साथ समुद्र, खाड़ियों और अन्य प्राकृतिक जलस्रोतों पर पड़ने वाले पर्यावरणीय प्रभाव को नियंत्रित करना है।
छह फीट से कम मूर्तियों के लिए कृत्रिम झीलों को प्राथमिकता
NMMC के अनुसार, न्यायालय के निर्देशों के तहत छह फीट से कम ऊंचाई वाली गणेश मूर्तियों का विसर्जन कृत्रिम झीलों में किए जाने की उम्मीद है। वहीं, बड़ी मूर्तियों के लिए भी NMMC ने श्रद्धालुओं और गणेशोत्सव मंडलों से संभव होने पर कृत्रिम विसर्जन स्थलों को प्राथमिकता देने की अपील की है। NMMC का कहना है कि गणेशोत्सव के दौरान पारंपरिक विसर्जन स्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में कृत्रिम झीलों की संख्या बढ़ाकर भीड़ को अलग-अलग स्थानों पर बांटने और विसर्जन प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित एवं व्यवस्थित बनाने का प्रयास किया गया है।
आठ विभागों में बनाई गईं कृत्रिम झीलें
शहर के विभिन्न नोड्स में कुल 170 कृत्रिम विसर्जन झीलों की व्यवस्था की गई है। इनमें सबसे अधिक झीलें नेरुल में हैं।
| विभाग | कृत्रिम झीलें |
|---|---|
| बेलापुर | 22 |
| नेरुल | 29 |
| वाशी | 16 |
| तुर्भे | 21 |
| कोपरखैरने | 16 |
| घनसोली | 16 |
| ऐरोली | 25 |
| दीघा | 25 |
| कुल | 170 |
इन स्थानों की पहचान सर्कल और इंजीनियरिंग विभाग द्वारा की गई है और कृत्रिम झीलों के निर्माण का काम अंतिम चरण में बताया गया है।
शाडू मिट्टी की मूर्तियों के इस्तेमाल की अपील
महानगरपालिका ने नागरिकों से गणेशोत्सव को पर्यावरण के अनुकूल तरीके से मनाने की अपील की है। इसके लिए प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) की मूर्तियों के बजाय शाडू मिट्टी की मूर्तियों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया गया है।
साथ ही सजावट में प्लास्टिक और थर्मोकोल का इस्तेमाल न करने तथा कपड़े, कागज और अन्य रिसाइकिल होने वाली सामग्री का उपयोग करने की सलाह दी गई है। NMMC ने ध्वनि प्रदूषण को लेकर भी सावधानी बरतने को कहा है। वाद्ययंत्रों और साउंड सिस्टम का इस्तेमाल निर्धारित एवं कम आवाज में करने, तेज ध्वनि से बचने और लेजर लाइट का इस्तेमाल नहीं करने की अपील की गई है।
विसर्जन स्थलों पर मिलेंगी जरूरी सुविधाएं
श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए प्राकृतिक तथा कृत्रिम दोनों विसर्जन स्थलों पर आवश्यक व्यवस्थाएं की जाएंगी। इन स्थानों पर वॉलंटियर, लाइफगार्ड और फायर ब्रिगेड के जवान तैनात रहेंगे। इसके अलावा स्वास्थ्य सेवाएं, पीने का पानी, सफाई, बिजली और CCTV जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। निर्माल्य को अलग से एकत्र करने और उसके परिवहन की व्यवस्था भी की गई है। विसर्जन प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए राफ्ट और फोर्कलिफ्ट जैसी मशीनों को भी तैयार रखा जाएगा।
घर के पास विसर्जन को बढ़ावा
NMMC ने नागरिकों से अपील की है कि वे समुद्र, खाड़ियों या अन्य प्राकृतिक जलस्रोतों में मूर्तियों का विसर्जन करने के बजाय अपने घर के नजदीक उपलब्ध कृत्रिम झीलों का इस्तेमाल करें। जहां संभव हो, वहां घर पर ही पर्यावरण-अनुकूल तरीके से विसर्जन करने को भी प्राथमिकता देने का सुझाव दिया गया है।
मेयर सुजाता पाटिल और महानगरपालिका आयुक्त डॉ. कैलाश शिंदे ने नागरिकों से अपील की है कि आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी भी निभाई जाए और गणेशोत्सव को स्वच्छ, सुरक्षित, प्लास्टिक-मुक्त एवं पर्यावरण-अनुकूल तरीके से मनाया जाए।



