पांढुर्णा में विश्व प्रसिद्ध गोटमार मेला संपन्न,पारंपरिक पत्थरबाजी में 1,324 लोग घायल
World-famous Gotmar Fair concludes in Pandhurna; 1,324 people injured in traditional stone-pelting.

मध्यप्रदेश,पांढुर्णा: मध्यप्रदेश के पांढुर्णा जिले में करीब 250 से 300 वर्ष पुरानी परंपरा के रूप में मनाया जाने वाला विश्व प्रसिद्ध गोटमार मेला इस वर्ष भी पांढुर्णा और सावरगांव के बीच जाम नदी क्षेत्र में आयोजित हुआ। प्रशासन की कड़ी सुरक्षा और व्यापक व्यवस्थाओं के बीच मेला सम्पन्न हुआ। परंपरा के अनुसार मेले के दौरान दोनों पक्षों के लोग जाम नदी क्षेत्र में एक-दूसरे पर पत्थर बरसाते हैं। इस पारंपरिक आयोजन के दौरान 1324 लोग घायल हुए। घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन की ओर से व्यापक इंतजाम किए गए थे।
कलेक्टर नीरज कुमार वशिष्ठ और पुलिस अधीक्षक प्रकाश चंद्र परिहार की निगरानी में सुरक्षा व्यवस्था संभाली गई। मेले में करीब 700 पुलिस जवान, 3 ड्रोन और 10 सीसीटीवी कैमरों की मदद से पूरे क्षेत्र की निगरानी की गई।
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी प्रशासन ने विशेष तैयारियां की थीं। घायलों के उपचार के लिए 7 चिकित्सा शिविर, 25 एंबुलेंस और करीब 350 सदस्यीय चिकित्सकीय अमला मौके पर तैनात रहा। जिला प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग सहित विभिन्न विभागों ने आपसी समन्वय के साथ मेले की व्यवस्थाएं संभालीं।
- परंपरा और मान्यता: मान्यताओं के अनुसार, यह परंपरा सदियों पुरानी है। सावरगांव की एक लड़की और पांढुर्णा के एक लड़के के प्रेम विवाह की कोशिश के दौरान नदी के बीच में दोनों गांवों के लोगों के बीच पथराव हुआ था, जिसकी याद में आज भी यह मेला आयोजित किया जाता है।
- तैयारियां और सुरक्षा: प्रशासन इस आयोजन के दौरान सुरक्षा और घायलों के इलाज के लिए पुख्ता इंतजाम करता है। डॉक्टरों की टीमें, एम्बुलेंस और पुलिस बल मुस्तैद रहते हैं।
- घायलों की संख्या: इस पारंपरिक खेल में हर साल सैकड़ों लोग घायल होते हैं, जिन्हें तुरंत प्राथमिक उपचार और गंभीर स्थिति में बड़े अस्पतालों में भेजा जाता है।
गोटमार मेले की परंपरा में पत्थरबाजी के बाद झंडे को चंडी माता मंदिर ले जाकर पूजा-अर्चना की जाती है। सदियों पुरानी यह परंपरा आज भी स्थानीय लोगों की आस्था और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है।
गोटमार मेला अपनी अनोखी और सदियों पुरानी परंपरा के लिए देश-दुनिया में जाना जाता है। हालांकि पत्थरबाजी के कारण बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने के चलते यह आयोजन सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के लिहाज से प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती भी बना रहा।



