बिहार कांग्रेस बचाओ’ की आवाज दिल्ली पहुंची, राहुल गांधी से मिलने पर अड़े असंतुष्ट नेता
The call to 'Save Bihar Congress' reached Delhi, disgruntled leaders stood firm when meeting Rahul Gandhi

नई दिल्ली; बिहार कांग्रेस में संगठन और नेतृत्व को लेकर चल रही नाराजगी अब दिल्ली तक पहुंच गई है। पार्टी से निष्कासित और असंतुष्ट नेताओं के एक समूह ने दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी नेताओं ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात के लिए समय मांगा है। उनका कहना है कि वे बिहार कांग्रेस की मौजूदा स्थिति, संगठन की कमजोरी और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की समस्याओं से राष्ट्रीय नेतृत्व को सीधे अवगत कराना चाहते हैं।
प्रदेश नेतृत्व में बदलाव की मांग
प्रदर्शनकारी नेताओं ने बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार और पार्टी के बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरू को उनके पदों से हटाने की मांग भी उठाई है। नेताओं का कहना है कि बिहार में पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए नेतृत्व स्तर पर बदलाव जरूरी है।
पूर्व कांग्रेस प्रवक्ता आनंद माधव के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में पूर्व विधायक अनिल सिंह, छत्रपति यादव, पूनम देवी और बिहार प्रदेश कांग्रेस के पूर्व उपाध्यक्ष जमाल अहमद सहित कई नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए।
निष्कासित नेताओं की क्या मांग है?
प्रदर्शनकारी नेताओं ने राष्ट्रीय नेतृत्व के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें राहुल गांधी से तत्काल मुलाकात, पार्टी की ओर से जारी नोटिस और निष्कासन की कार्रवाई वापस लेना तथा निष्कासित नेताओं को संगठन में उनकी पूर्व जिम्मेदारियों पर बहाल करना प्रमुख है।
नेताओं का आरोप है कि बिहार कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ताओं की शिकायतों और सुझावों को लंबे समय से पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। उनका कहना है कि वे पार्टी के खिलाफ नहीं, बल्कि संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं की समस्याओं को नेतृत्व तक पहुंचाने के लिए आवाज उठा रहे हैं।
पार्टी संगठन को लेकर भी सवाल
असंतुष्ट नेताओं ने बिहार कांग्रेस में संगठन के विस्तार और नए लोगों को जिम्मेदारी दिए जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि संगठन में पदों के बंटवारे में पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया की समीक्षा और जांच की मांग की है।
कांग्रेस के भीतर ही सामने आया विरोध
दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के कुछ अन्य कार्यकर्ता प्रदर्शनकारियों के विरोध में भी सामने आए। ये कार्यकर्ता बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरू और प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार के समर्थन में थे। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस भी हुई। यह घटनाक्रम बताता है कि बिहार कांग्रेस में संगठन और नेतृत्व को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ चुके हैं।
प्रदेश अध्यक्ष ने आरोपों पर क्या कहा?
बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश कुमार ने प्रदर्शन कर रहे नेताओं के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रदर्शन में शामिल कई लोग 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में टिकट के दावेदार थे। उनके मुताबिक टिकट वितरण के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने कुछ मानदंड तय किए थे और प्रदर्शनकारी नेता उन मानदंडों पर खरे नहीं उतरे।
राजेश कुमार ने यह भी कहा कि कुछ नेताओं पर पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोप थे, जिसके कारण उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। इस तरह कांग्रेस के भीतर विवाद का एक पक्ष जहां संगठन में सुधार और नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर रहा है, वहीं प्रदेश नेतृत्व कार्रवाई को पार्टी अनुशासन से जोड़कर देख रहा है।
राहुल गांधी से मुलाकात पर नजर
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या राहुल गांधी प्रदर्शनकारी नेताओं से मुलाकात करेंगे और उनकी शिकायतों को सुनेंगे। असंतुष्ट नेताओं का कहना है कि वे राष्ट्रीय नेतृत्व के सामने बिहार कांग्रेस की जमीनी स्थिति रखना चाहते हैं।
बिहार कांग्रेस में सामने आया यह विवाद पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि संगठन के भीतर मतभेद और कार्यकर्ताओं की नाराजगी का असर आने वाले समय में पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों पर पड़ सकता है।



