“इंडोनेशिया में एक साथ कई संकट: जंगलों में भीषण आग, Anak Krakatau का विस्फोट और 8 लोग लापता”
“Multiple crises in Indonesia at once: massive forest fires, Anak Krakatau eruption, and 8 people missing”

जंगलों में भयानक आग, धुआँ हुआ खतरनाक
इंडोनेशिया में इस समय जंगल और पीटलैंड की आग ने गंभीर रूप ले लिया है। यूरोपीय संघ के Copernicus की Fire Emissions Watch के अनुसार, 1 से 7 सितंबर 2026 के बीच इंडोनेशिया की आग से लगभग 1.97 करोड़ मीट्रिक टन CO₂ उत्सर्जन हुआ। यह उस सप्ताह दुनिया के कुल wildfire emissions का एक-तिहाई से अधिक है और इंडोनेशिया रूस से भी आगे निकल गया।
आग का सबसे ज्यादा असर कालीमंतान यानी इंडोनेशियाई बोर्नियो और पूर्वी सुमात्रा में देखा जा रहा है। Copernicus के अनुसार, इस अवधि में आग की emission intensity सामान्य मौसमी औसत से 273% अधिक थी।
Super El Niño ने बढ़ाई आग की समस्या
वैज्ञानिकों के अनुसार इस साल की गंभीर स्थिति के पीछे Super El Niño, अत्यधिक गर्मी और लंबे समय से जारी सूखा महत्वपूर्ण कारण हैं।
सूखी जमीन और पीटलैंड में आग लगने के बाद आग लंबे समय तक जमीन के नीचे भी सुलग सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी underground peat fires उपग्रहों की निगरानी में पूरी तरह दिखाई भी नहीं देतीं, इसलिए वास्तविक स्थिति उपलब्ध आंकड़ों से ज्यादा गंभीर हो सकती है।
1 अगस्त से 8 सितंबर के बीच इंडोनेशिया में 13,443 fire hotspots रिकॉर्ड किए गए, जबकि 2015 की इसी अवधि में यह संख्या 9,454 थी।
जहरीले धुएँ से स्कूल बंद, 14 लाख से ज्यादा बच्चे प्रभावित
जंगल की आग का धुआँ अब केवल जंगलों तक सीमित नहीं है। कई शहरों में air quality खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है।
West Kalimantan के Pontianak में एयर क्वालिटी इंडेक्स बुधवार को 394 तक पहुंच गया। 300 से ऊपर AQI को hazardous माना जाता है।
दक्षिण सुमात्रा की राजधानी Palembang में भी प्रदूषण बढ़ने के बाद स्कूलों को ऑनलाइन पढ़ाई की ओर जाने की अनुमति दी गई। अकेले Palembang में करीब 1,030 स्कूलों के 2.5 लाख से ज्यादा विद्यार्थी प्रभावित हैं।
देशभर में 14 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों की पढ़ाई स्कूल बंद होने या ऑनलाइन व्यवस्था में जाने से प्रभावित हुई है।
धुआँ इंडोनेशिया की सीमा से बाहर भी पहुंच रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक इसका असर मलेशिया और फिलीपींस तक देखा गया है।
Anak Krakatau में जोरदार विस्फोट
इसी बीच इंडोनेशिया का Anak Krakatau ज्वालामुखी भी सक्रिय है।
यह ज्वालामुखी Java और Sumatra के बीच Sunda Strait में स्थित है। सितंबर की शुरुआत में इसकी गतिविधि काफी बढ़ गई और एक चरण में यह करीब 25 घंटे तक लगातार erupt करता रहा। इसके बाद भी ज्वालामुखी से समय-समय पर राख, लावा और गर्म ज्वालामुखीय पदार्थ निकलते रहे।
6 सितंबर के विस्फोट के दौरान volcanic ash काफी ऊंचाई तक पहुंची। Reuters के अनुसार Java की ओर राख लगभग 20,000 फीट और Sumatra की ओर करीब 50,000 फीट तक पहुंची थी।
हवाई सेवाओं पर बड़ा असर
ज्वालामुखीय राख के कारण कई एयरपोर्ट प्रभावित हुए।
AP के अनुसार, इस घटना से 2,961 उड़ानें प्रभावित हुईं, जिनमें 622 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें थीं और करीब 3.41 लाख यात्रियों पर असर पड़ा।
इससे पहले Reuters ने बताया था कि आठ एयरपोर्ट पर करीब 1,500 उड़ानें और 1.7 लाख यात्री प्रभावित हुए थे। बाद में व्यवधान बढ़ा, इसलिए कुल आंकड़ा भी बढ़ गया।
इंडोनेशिया के लिए इस समय सबसे बड़ी चुनौती यह है कि एक तरफ पर्यावरणीय संकट तेजी से बढ़ रहा है और दूसरी तरफ ज्वालामुखीय गतिविधि ने परिवहन तथा जनजीवन को प्रभावित किया है। जंगल की आग का मौसम अक्टूबर तक जारी रहने की आशंका जताई गई है, इसलिए आने वाले हफ्ते महत्वपूर्ण होंगे। Copernicus के वैज्ञानिकों ने शुरुआती संकेतों को 2015 जैसे गंभीर El Niño वर्षों के स्तर के करीब बताया है।
और सबसे ज्यादा चिंता Anak Krakatau के पास लापता हुए 8 लोगों को लेकर है। अधिकारियों ने खोज का दायरा बढ़ा दिया है और समुद्र में व्यापक Search & Rescue Operation चलाया जा रहा है।



