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सऊदी पर हूती हमले से मचा हड़कंप, भारत ने दी कड़ी चेतावनी!

Huthi attacks on Saudi caused a stir, India gave a strong warning!

नई दिल्ली: भारत ने सऊदी अरब की संप्रभु सीमा में हूती विद्रोहियों द्वारा किए गए हालिया मिसाइल और ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा की है। भारत ने खास तौर पर आम नागरिकों और आर्थिक सुविधाओं को निशाना बनाए जाने पर चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि इस तरह के हमले क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को कमजोर करते हैं और इन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता।

विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बुधवार को मीडिया के सवालों के जवाब में भारत का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भारत सऊदी अरब की संप्रभु सीमा पर हुए हमलों की निंदा करता है, विशेष रूप से उन हमलों की जिनमें नागरिक और आर्थिक सुविधाओं को निशाना बनाया गया।

भारत ने यह भी कहा कि ऐसे हमले क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को नुकसान पहुंचाते हैं। इसके अलावा इनसे बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता के लिए भी खतरा पैदा होता है। भारत ने इन हमलों को अस्वीकार्य बताया है।

सऊदी अरब में कहां हुए हमले?

रिपोर्टों के अनुसार, यमन के ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों ने मंगलवार को सऊदी अरब के दक्षिणी हिस्सों में कई मिसाइल और ड्रोन हमले किए। अबहा, जिजान, खामिस मुशैत और नजरान समेत कई इलाकों को निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। इन हमलों में तेल और अन्य आर्थिक बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाया गया।

सऊदी अधिकारियों के अनुसार, हमलों में 73 लोग घायल हुए, जिनमें नागरिक भी शामिल हैं। कई जगहों पर आग लगने की घटनाएं सामने आईं और कुछ तेल सुविधाओं को नुकसान पहुंचने की खबर है।

तेल और आर्थिक सुविधाओं को भी बनाया गया निशाना

इन हमलों की सबसे बड़ी चिंता इसलिए है क्योंकि सऊदी अरब दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल है। रिपोर्टों के मुताबिक, हमलों में सऊदी ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े ठिकानों को भी निशाना बनाया गया। जिजान में स्थित बड़ी रिफाइनरी सहित कुछ ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमलों की खबर सामने आई है। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति और ऊर्जा बाजार को लेकर चिंता बढ़ी है।

हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई और ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों पर भी पड़ सकता है।

बाब-अल-मंदेब क्यों महत्वपूर्ण है?

बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच स्थित एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच आने-जाने वाले जहाजों के लिए यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है। भारत के लिए भी यह समुद्री रास्ता महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत का पश्चिम एशिया और यूरोप के साथ बड़ा व्यापारिक संबंध है। इस क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ने से जहाजों की आवाजाही, बीमा लागत और माल ढुलाई पर असर पड़ सकता है।

इसी वजह से भारत ने हमलों को केवल सऊदी अरब की सुरक्षा का मुद्दा नहीं माना, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री व्यापार की स्वतंत्र आवाजाही से भी जोड़कर देखा है।

पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव

सऊदी अरब पर हूती हमले ऐसे समय हुए हैं जब पश्चिम एशिया में पहले से ही तनाव काफी बढ़ा हुआ है। यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित ताकतों के बीच संघर्ष फिर तेज हुआ है। हालिया घटनाक्रम ने 2022 में बनी संघर्षविराम व्यवस्था के बाद अपेक्षाकृत शांत रहे हालात पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

हूतियों की गतिविधियां अब केवल यमन तक सीमित नहीं रह गई हैं। लाल सागर और बाब-अल-मंदेब के आसपास जहाजों की सुरक्षा को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ रही है।

भारत का संदेश स्पष्ट

भारत ने अपने बयान में किसी सैन्य कार्रवाई का समर्थन करने के बजाय क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और नागरिकों की सुरक्षा पर जोर दिया है। नई दिल्ली का स्पष्ट संदेश है कि नागरिकों और आर्थिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं है।

भारत का यह रुख पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि क्षेत्र में अस्थिरता का सीधा असर ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

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