केंद्र-राज्य सहयोग से राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को मिलेगी गति: PM मोदी
PM Modi participated in the valedictory session of the Ministry of Jal Shakti's departmental summit.
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली में आयोजित जल शक्ति मंत्रालय के दो दिवसीय विभागीय शिखर सम्मेलन के समापन सत्र में भाग लिया। PM मोदी द्वारा परिकल्पित विभागीय शिखर सम्मेलनों की श्रृंखला में यह पहला शिखर सम्मेलन था। इस पहल का उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए देश की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं पर सामूहिक रूप से काम करने की दिशा को मजबूत करना है।

टीम इंडिया की भावना को मजबूत करने की पहल
इस विभागीय शिखर सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य भारत की टीम भावना को मजबूत करना और विभिन्न स्तरों पर सरकारों के बीच सहयोग को और प्रभावी बनाना रहा। सम्मेलन के माध्यम से केंद्र और राज्यों के प्रतिनिधियों को एक साझा मंच मिला, जहां जल शक्ति क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों, चुनौतियों और प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श किया गया।
PM मोदी द्वारा परिकल्पित इस पहल में शासन व्यवस्था को अधिक सहभागी और परिणामोन्मुख बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया। इसका उद्देश्य केवल नीतियों पर चर्चा करना नहीं, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन और जमीनी स्तर पर बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त प्रयासों को बढ़ावा देना है।
सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने पर जोर
दो दिवसीय सम्मेलन में सहकारी संघवाद को और प्रगाढ़ बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण विचार-विमर्श हुआ। केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाएं, इसके लिए आपसी सहयोग और समन्वय को आवश्यक माना गया।
जल शक्ति जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में केंद्र और राज्यों की भूमिका बेहद अहम है। जल संरक्षण, जल प्रबंधन और नागरिकों तक बेहतर जल सेवाएं पहुंचाने के लिए विभिन्न स्तरों पर सरकारों के बीच प्रभावी तालमेल जरूरी है। ऐसे में यह सम्मेलन साझा जिम्मेदारी और सामूहिक स्वामित्व की भावना को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर सामूहिक मंथन
सम्मेलन ने महत्वपूर्ण क्षेत्रीय प्राथमिकताओं पर संयुक्त रूप से विचार-विमर्श करने के लिए एक संरचित मंच उपलब्ध कराया। इस दौरान नीतियों और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन को तेज करने तथा अपेक्षित परिणाम हासिल करने के लिए सहयोगात्मक दृष्टिकोण पर बल दिया गया। सरकार की इस पहल का व्यापक उद्देश्य विभिन्न विभागों और राज्यों के अनुभवों को साझा करते हुए सफल कार्यों को दूसरे क्षेत्रों में लागू करने की संभावनाओं को बढ़ाना भी है। इससे नीति निर्माण और उसके कार्यान्वयन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में मदद मिल सकती है।
कार्यान्वयन और परिणामों में तेजी लाने का लक्ष्य
विभागीय शिखर सम्मेलन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक कार्यान्वयन की गति और परिणामों पर केंद्रित दृष्टिकोण रहा। सम्मेलन के माध्यम से यह प्रयास किया गया कि चर्चा और निर्णयों को व्यावहारिक कार्ययोजनाओं में बदला जाए तथा योजनाओं का लाभ तेजी से लोगों तक पहुंचे।
पहले विभागीय शिखर सम्मेलन के रूप में यह पहल केंद्र और राज्यों के बीच संवाद तथा सहयोग के लिए एक नए संस्थागत मंच की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले समय में इस तरह के शिखर सम्मेलन राष्ट्रीय विकास से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने और बेहतर परिणाम हासिल करने में उपयोगी भूमिका निभा सकते हैं।



