छात्रों की हर प्रतिभा को मिलेगा सम्मान, मुंबई-पुणे-नागपुर यूनिवर्सिटी देंगी ‘चांसलर मेडल’
Every talent of students will be honored; Mumbai, Pune, and Nagpur universities to award the ‘Chancellor’s Medal’.
मुंबई: विद्यार्थियों की प्रतिभा और उपलब्धियों को केवल परीक्षा परिणाम या अकादमिक प्रदर्शन तक सीमित न रखते हुए उनके व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं को पहचान देने की दिशा में महाराष्ट्र में एक नई पहल शुरू होने जा रही है। मुंबई यूनिवर्सिटी, सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी और राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर यूनिवर्सिटी में अब ‘चांसलर मेडल’ प्रदान किया जाएगा। यह पहल महाराष्ट्र के राज्यपाल और राज्य विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति जिष्णु देव वर्मा की पहल पर शुरू की जा रही है।

लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में 10-10 लाख रुपये के चेक
इस पहल की शुरुआत के लिए मुंबई स्थित लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने तीनों विश्वविद्यालयों के लिए 10-10 लाख रुपये के प्रतिनिधिक चेक प्रदान किए। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों की बहुआयामी प्रतिभा को प्रोत्साहित करना और उन्हें शिक्षा के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित करना है।
राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों की उपलब्धियों का मूल्यांकन केवल उनकी अकादमिक सफलता के आधार पर नहीं होना चाहिए। विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास और समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
केवल पढ़ाई में अच्छे छात्रों तक सीमित नहीं होगा सम्मान
प्रस्तावित ‘चांसलर मेडल’ को व्यापक स्वरूप देने पर जोर दिया गया है। इसके तहत विद्यार्थियों की लीडरशिप क्वालिटीज, इनोवेशन, स्पोर्ट्स, कल्चरल एक्टिविटीज, सामाजिक प्रतिबद्धता और विश्वविद्यालय के लिए किए गए विशेष योगदान को भी मान्यता देने की उम्मीद है।
इसका उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों को सामने लाना है, जिन्होंने कक्षा और परीक्षा से बाहर निकलकर अपने नेतृत्व, रचनात्मकता और सामाजिक योगदान के माध्यम से अलग पहचान बनाई है।
पर्सनैलिटी डेवलपमेंट और नेतृत्व को मिलेगा बढ़ावा
राज्यपाल की पहल के पीछे यह विचार है कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने वाली संस्थाएं न रहें, बल्कि विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास का केंद्र बनें। चांसलर मेडल के माध्यम से छात्रों को शिक्षा के साथ खेल, कला, संस्कृति, सामाजिक कार्य और नवाचार जैसे क्षेत्रों में भी सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है।
तीन प्रमुख विश्वविद्यालयों से होगी शुरुआत
पहले चरण में इस पहल को महाराष्ट्र के तीन प्रमुख राज्य विश्वविद्यालयों में लागू किया जा रहा है—मुंबई यूनिवर्सिटी, सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी और राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर यूनिवर्सिटी। तीनों विश्वविद्यालयों को प्रारंभिक तौर पर 10-10 लाख रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई है।
यह पहल भविष्य में विद्यार्थियों की उपलब्धियों को देखने के नजरिए में बदलाव ला सकती है। इससे उन छात्रों को भी पहचान मिलने की संभावना है, जो पढ़ाई के अलावा खेल, कला, सामाजिक सेवा, नवाचार या नेतृत्व जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं।
विद्यार्थियों में नई प्रतिस्पर्धा और प्रेरणा की उम्मीद
‘चांसलर मेडल’ की अवधारणा विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं के व्यापक विकास के लिए प्रेरित कर सकती है। इससे विश्वविद्यालयों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ रचनात्मकता, नेतृत्व क्षमता, सामाजिक जिम्मेदारी और नवाचार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, यह पहल उच्च शिक्षा में ‘केवल अंक नहीं, बल्कि संपूर्ण व्यक्तित्व’ को महत्व देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।



