संगीत, संस्कृति और शिल्पकला का संगम बनी प्रधानमंत्री मोदी की खास भेंट
A glimpse of India's centuries-old craftsmanship: Uzbek President receives a sandalwood Veena.
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी एक विशेष कलाकृति भेंट की। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने चंदन से तैयार की गई शता तंत्री वीणा की कलाकृति उपहार स्वरूप प्रदान की। लोकप्रिय रूप से संतूर के नाम से पहचाने जाने वाले इस वाद्य यंत्र की यह कलाकृति भारतीय संगीत परंपरा और उत्कृष्ट लकड़ी नक्काशी की कला का सुंदर संगम प्रस्तुत करती है।
यह उपहार केवल एक पारंपरिक वाद्य यंत्र की प्रतिकृति नहीं है, बल्कि भारत की विविधतापूर्ण सांस्कृतिक विरासत और सदियों पुरानी कलात्मक परंपराओं का प्रतिनिधित्व करता है। चंदन की लकड़ी पर की गई बारीक नक्काशी इस कलाकृति को विशेष बनाती है और भारतीय शिल्पकारों की कुशलता को भी सामने लाती है।
जम्मू-कश्मीर की संगीत परंपरा से जुड़ी शता तंत्री वीणा
शता तंत्री वीणा एक समलम्बाकार आकार वाला अनेक तारों का वाद्य यंत्र है। इसका संबंध विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर की संगीत परंपरा से रहा है। समय के साथ इस वाद्य यंत्र ने भारतीय संगीत की विविध परंपराओं में अपनी अलग पहचान बनाई है। इसकी संरचना, तारों की व्यवस्था और वादन शैली भारतीय वाद्य संगीत की समृद्ध परंपरा को दर्शाती है।
संतूर के रूप में लोकप्रिय इस वाद्य यंत्र की ध्वनि भारतीय शास्त्रीय संगीत में विशेष स्थान रखती है। कश्मीर की सांस्कृतिक पहचान से जुड़े इस वाद्य को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करना भारत की क्षेत्रीय कला और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
चंदन की नक्काशी में दिखाई देती है भारतीय शिल्पकला
इस विशेष कलाकृति की एक अन्य प्रमुख विशेषता इसका चंदन से तैयार होना है। चंदन की लकड़ी पर बारीक और कलात्मक नक्काशी भारत की प्राचीन हस्तशिल्प परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। कलाकारों द्वारा लकड़ी पर की गई सूक्ष्म नक्काशी भारतीय शिल्पकला की बारीकी, धैर्य और रचनात्मकता को दर्शाती है।
इस तरह शता तंत्री वीणा की कलाकृति में एक ओर भारतीय संगीत की विरासत दिखाई देती है, तो दूसरी ओर पारंपरिक लकड़ी नक्काशी की उत्कृष्ट कला भी देखने को मिलती है। यही वजह है कि यह उपहार भारत की ‘सांस्कृतिक कूटनीति’ का भी एक सुंदर उदाहरण बनकर सामने आता है।
भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों में संस्कृति की अहम भूमिका
भारत और उज्बेकिस्तान के बीच ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंध लंबे समय से रहे हैं। दोनों देशों के बीच कला, संगीत, परंपरा और लोगों के बीच संपर्क ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा भेंट की गई यह कलाकृति इसी सांस्कृतिक जुड़ाव की भावना को प्रदर्शित करती है। भारतीय परंपरा से जुड़े ऐसे उपहार दोनों देशों के बीच आपसी सम्मान और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने का माध्यम बनते हैं।
कुल मिलाकर, चंदन की शता तंत्री वीणा की यह कलाकृति भारत की संगीत विरासत, हस्तशिल्प कौशल और सांस्कृतिक विविधता को एक साथ प्रस्तुत करती है। यह उपहार भारत की ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना के अनुरूप सांस्कृतिक आदान-प्रदान और मैत्री का संदेश भी देता है।



