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महिला आरक्षण पर गरमाई सियासत, फडणवीस का चिदंबरम को करारा जवाब

Fadnavis attacks Congress over women's reservation; says, "True face revealed when the opportunity arose"

मुंबई: महिला आरक्षण को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। चिदंबरम की आलोचना का जवाब देते हुए फडणवीस ने कांग्रेस पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि जब महिलाओं को वास्तविक राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने का मौका आया, तब कांग्रेस का “असली चेहरा” सामने आ गया।

फडणवीस ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण लागू कराने के लिए “कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।” उनका दावा है कि मौजूदा परिस्थितियों में महिला आरक्षण को 2029 में लागू करने के लिए परिसीमन की प्रक्रिया को जल्द पूरा करना जरूरी है।

2023 के कानून में क्या है प्रावधान?

संसद ने 2023 में संविधान का 106वां संशोधन पारित किया था, जिसे ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ कहा जाता है। इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है।

हालांकि, कानून के अनुसार महिला आरक्षण तत्काल लागू नहीं होता। इसके लिए अधिनियम के लागू होने के बाद होने वाली पहली जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होना आवश्यक है। इसी वजह से 2029 के चुनाव से पहले आरक्षण लागू करने को लेकर राजनीतिक और संवैधानिक बहस जारी है।

जनगणना और परिसीमन बना मुख्य मुद्दा

फडणवीस का कहना है कि कोविड-19 महामारी के कारण जनगणना में देरी हुई। इसके बाद जनगणना के आंकड़ों और परिसीमन की प्रक्रिया में लगने वाले समय को देखते हुए 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिला आरक्षण लागू करना मुश्किल हो सकता था।

इसी पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार ने अप्रैल 2026 में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक और संबंधित परिसीमन विधेयक पेश किए। प्रस्ताव का उद्देश्य 2011 की जनगणना के उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर परिसीमन का रास्ता खोलना, लोकसभा की सीटों की अधिकतम संख्या बढ़ाना और महिला आरक्षण को 2029 के चुनाव से पहले लागू करने की व्यवस्था करना था।

हालांकि, संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 संसद में आवश्यक बहुमत हासिल नहीं कर सका। इसके बाद 2029 के चुनाव में महिला आरक्षण लागू होने की समयसीमा को लेकर विवाद और बढ़ गया।

फडणवीस का कांग्रेस पर गंभीर आरोप

फडणवीस ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और राहुल गांधी ने 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन और उससे जुड़ी महिला आरक्षण लागू करने की कोशिश का विरोध किया। उनके मुताबिक, इस विरोध के कारण 2029 तक महिला आरक्षण लागू करने का रास्ता मुश्किल हुआ।

दूसरी ओर, कांग्रेस का कहना है कि वह महिला आरक्षण का विरोध नहीं करती। राहुल गांधी ने 2026 में कहा था कि कांग्रेस महिला आरक्षण का समर्थन करती है, लेकिन 2011 की जनगणना के आधार पर आरक्षण लागू करने के सरकार के प्रस्ताव का विरोध करती है। कांग्रेस का तर्क है कि 2011 के आंकड़ों में पिछड़े समुदायों से संबंधित पर्याप्त जानकारी नहीं है और महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना उचित नहीं है।

चिदंबरम ने सरकार पर उठाए सवाल

पी. चिदंबरम ने महिला आरक्षण और परिसीमन को जोड़ने के केंद्र सरकार के रुख पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि 2023 में महिला आरक्षण से संबंधित संवैधानिक संशोधन पहले ही पारित हो चुका है और सरकार को इसे लागू करने के लिए अनावश्यक रूप से परिसीमन और जनगणना से नहीं जोड़ना चाहिए।

इसी बयान के जवाब में फडणवीस ने चिदंबरम पर “चुनिंदा याददाश्त” रखने का आरोप लगाया और कांग्रेस की भूमिका पर सवाल खड़े किए।

महिला आरक्षण को लेकर अब मुख्य सवाल यही है कि क्या 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले परिसीमन की प्रक्रिया पूरी हो पाएगी और 2023 के कानून के तहत महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण का लाभ मिल सकेगा। फिलहाल इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव जारी है।

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