OBC Creamy Layerमामले में सुप्रीम कोर्ट करेगा फिर सुनवाई
Supreme Court to hear OBC creamy layer matter again; special bench to consider Centre's plea.
नई दिल्ली: ओबीसी क्रीमी लेयर से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की याचिका पर सुनवाई के लिए विशेष पीठ गठित करने पर विचार करने की सहमति दी है। केंद्र सरकार ने 11 मार्च को दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है। इस मामले का सीधा असर सिविल सेवा परीक्षा 2025 के 958 अनुशंसित उम्मीदवारों की सेवा आवंटन प्रक्रिया पर पड़ सकता है।
केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामला उठाया। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने अदालत से अनुरोध किया है कि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा अनुशंसित 958 उम्मीदवारों के लिए सेवा आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति दी जाए। केंद्र चाहता है कि इन उम्मीदवारों का सेवा आवंटन 11 मार्च के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले लागू ओबीसी क्रीमी लेयर मानदंडों के आधार पर किया जाए।
11 मार्च के फैसले में क्या कहा था?
सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च के फैसले में ओबीसी क्रीमी लेयर निर्धारित करने के तरीके को लेकर अहम टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा था कि क्रीमी लेयर तय करते समय माता-पिता की नौकरी की श्रेणी और निर्धारित आय या संपत्ति के मानदंड, दोनों पर विचार किया जाना चाहिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि केवल माता-पिता के वेतन या आय को आधार बनाकर यह तय नहीं किया जा सकता कि कोई उम्मीदवार ओबीसी क्रीमी लेयर में आता है या नहीं।
958 उम्मीदवारों पर क्या असर?
UPSC ने सिविल सेवा परीक्षा 2025 के लिए 958 उम्मीदवारों की सेवा आवंटन प्रक्रिया से जुड़ी सिफारिश की है। केंद्र की याचिका का उद्देश्य इस प्रक्रिया को मौजूदा विवाद के कारण प्रभावित होने से बचाना है। अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा विशेष पीठ के गठन और मामले की सुनवाई को लेकर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। अदालत के निर्णय से यह तय हो सकता है कि इन 958 उम्मीदवारों की सेवा आवंटन प्रक्रिया किस क्रीमी लेयर मानदंड के तहत आगे बढ़ेगी।



