कॉलेज में एडमिशन या बड़ा फर्जीवाड़ा? 70 छात्रों से लाखों की ठगी,दो गिरफ्तार
College admission or a major scam? Lakhs swindled from 70 students; two arrested.
पुणे: कलिंगा विश्वविद्यालय से संबद्धता होने का दावा कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर छात्रों को प्रवेश देने और उनसे लाखों रुपये की फीस वसूलने के आरोप में पुणे की विश्रामबाग पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान संस्था के निदेशक प्रथमेश अशोक राउत और फ्लोरिट कॉलेज ऑफ डिजाइनिंग के निदेशक सचिन भीमराव बोराडे के रूप में हुई है। मामले में करीब 70 छात्रों के साथ कथित धोखाधड़ी सामने आई है।
पुलिस के अनुसार, छात्रों को कलिंगा विश्वविद्यालय से संबद्धता के दस्तावेज दिखाकर फ्लोरिट कॉलेज ऑफ डिजाइनिंग के पुणे अध्ययन केंद्र में प्रवेश दिया गया था। छात्रों से फीस के नाम पर रकम भी ली गई। इस घटनाक्रम से छात्रों के आर्थिक नुकसान के साथ-साथ उनका शैक्षणिक वर्ष बर्बाद होने की आशंका पैदा हो गई है।
12वीं के बाद दाखिला लिया, फिर सामने आया मामला
मामले की शुरुआत एक ऐसे छात्र की शिकायत से हुई, जो 12वीं के बाद इंटीरियर डिजाइनिंग की पढ़ाई करना चाहता था। इंटरनेट के माध्यम से फ्लोरिट कॉलेज के बारे में जानकारी मिलने के बाद उसने पुणे स्थित अध्ययन केंद्र में प्रवेश लिया। छात्र का आरोप है कि प्रथमेश राउत ने उसे कलिंगा विश्वविद्यालय से संबद्धता से संबंधित दस्तावेज दिखाए और इसी आधार पर प्रवेश दिया गया। छात्र ने शुरुआत में 10 हजार रुपये का भुगतान किया। इसके बाद 21 जुलाई से कक्षाएं शुरू कर दी गईं।
हालांकि, बाद में छात्रों को बताया गया कि 3 अगस्त को कॉलेज को किसी अन्य विश्वविद्यालय से संबद्ध कर दिया जाएगा। छात्रों द्वारा इस संबंध में दस्तावेज और स्थिति स्पष्ट करने की मांग किए जाने पर कथित तौर पर उन्हें संतोषजनक जानकारी नहीं दी गई।
करीब 70 अभिभावक पहुंचे पुलिस के पास
मामला स्पष्ट नहीं होने और छात्रों को संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाने के बाद करीब 70 छात्रों के अभिभावकों ने पुलिस से संपर्क किया। शिकायत के आधार पर विश्रामबाग पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान फ्लोरिट कॉलेज के निदेशक की ओर से पुलिस को बताया गया कि पुणे स्थित इस संस्थान को इस वर्ष प्रथम वर्ष के छात्रों के प्रवेश के लिए कोई अनुमति नहीं दी गई थी। कॉलेज की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि छात्रों से ली गई फीस कॉलेज को प्राप्त नहीं हुई है।
कॉलेज प्रबंधन ने यह भी कहा कि दूसरे और तीसरे वर्ष में पढ़ रहे छात्रों को उनकी पढ़ाई जारी रखने के लिए अन्य कॉलेजों में प्रवेश दिलाने में सहयोग किया जा सकता है।
पैसे लौटाने और ट्रांसफर सर्टिफिकेट देने को कहा
पुलिस ने दोनों आरोपियों से छात्रों से ली गई रकम वापस करने और उन्हें ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) उपलब्ध कराने को कहा। हालांकि, पुलिस के अनुसार आरोपियों ने छात्रों को पैसे वापस करने और आवश्यक दस्तावेज देने से इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। मामले की आगे की जांच पुलिस सब-इंस्पेक्टर सत्यवान गेंड कर रहे हैं।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित तौर पर कितने छात्रों से कितनी रकम ली गई, प्रवेश के लिए इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों की वास्तविकता क्या है और इस पूरे मामले में अन्य लोग भी शामिल हैं या नहीं। छात्रों के शैक्षणिक भविष्य और फीस की वापसी को लेकर भी आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।



