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गेहूं के आटे पर बड़ा फैसला! आटा, मैदा और सूजी का एक्सपोर्ट हुआ फ्री

Major decision on wheat flour! Export of wheat flour, refined flour (maida), and semolina (suji) made free.

नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने गेहूं के आटे और उससे जुड़े उत्पादों के निर्यात को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने गेहूं के आटे और संबंधित उत्पादों की निर्यात नीति में तत्काल प्रभाव से बदलाव करते हुए इनके निर्यात पर लगी पाबंदी हटा दी है। इस फैसले के बाद आटा, मैदा, सूजी/रवा, होलमी़ल आटा और रिजल्टेंट आटा जैसे उत्पादों के विदेश निर्यात का रास्ता खुल गया है।

DGFT ने जारी की अधिसूचना

विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) की अधिसूचना के मुताबिक, HS Code 1101 के तहत आने वाले गेहूं या मेस्लिन आटा, मैदा, सेमोलिना (रवा/सूजी), होलमील आटा और रिजल्टेंट आटा की निर्यात नीति को ‘Prohibited’ से बदलकर ‘Free’ कर दिया गया है। यह बदलाव 24 अगस्त 2026 से तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।

इससे पहले इन उत्पादों का निर्यात प्रतिबंधित था और सरकार की ओर से निर्धारित सीमित मात्रा तथा विशेष अनुमति के तहत ही निर्यात किया जा सकता था। फरवरी 2026 में भी सरकार ने सीमित अतिरिक्त मात्रा में गेहूं के आटे और संबंधित उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी थी, लेकिन उस समय नीति पूरी तरह ‘Free’ नहीं हुई थी।

गेहूं और ड्यूरम गेहूं के निर्यात पर भी बदलाव

सरकार ने एक अलग अधिसूचना के माध्यम से गेहूं और ड्यूरम गेहूं की कुछ निर्धारित श्रेणियों की निर्यात नीति में भी बदलाव किया है। इन निर्दिष्ट श्रेणियों को ‘Prohibited’ से ‘Free’ श्रेणी में लाया गया है।

सरकार के इस फैसले को गेहूं आधारित प्रसंस्कृत उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे आटा मिलों, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, निर्यातकों और कृषि आधारित कारोबार से जुड़े कारोबारियों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में नए अवसर खुल सकते हैं।

निर्यातकों और आटा उद्योग को फायदा

निर्यात नीति में इस बदलाव से भारतीय आटा और गेहूं आधारित उत्पादों को विदेशी बाजारों में पहुंचाने की प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है। खासकर वे कारोबारी जो आटा, मैदा, सूजी और अन्य गेहूं आधारित उत्पादों का उत्पादन एवं निर्यात करते हैं, उन्हें इस फैसले से सीधे लाभ मिल सकता है।

सरकार के इस कदम से कृषि उत्पादों के वैल्यू-एडेड एक्सपोर्ट को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। गेहूं को केवल कच्चे कृषि उत्पाद के रूप में निर्यात करने के बजाय आटा, मैदा और अन्य प्रसंस्कृत उत्पादों के निर्यात से देश को बेहतर निर्यात मूल्य हासिल करने का अवसर मिल सकता है।

हालांकि, घरेलू बाजार में गेहूं और आटे की कीमतों पर इस फैसले का क्या असर पड़ता है, यह आने वाले दिनों में उत्पादन, घरेलू मांग और अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों पर निर्भर करेगा।

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