गणेशोत्सव में ध्वनि प्रदूषण पर सख्ती! गिरीश महाजन की खास अपील
Crackdown on noise pollution during Ganeshotsav! Girish Mahajan’s special appeal
पुणे/सान्वी देशपांडे: पूरे देश का ध्यान पुणे के ऐतिहासिक गणेशोत्सव की ओर रहता है। ऐसे में जल संसाधन एवं आपदा प्रबंधन मंत्री गिरीश महाजन ने गणेशोत्सव को सामाजिक सद्भाव, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता का माध्यम बनाने की अपील की है। उन्होंने हाई कोर्ट द्वारा लाउडस्पीकर और ध्वनि प्रदूषण को लेकर निर्धारित सीमाओं का पालन करते हुए उत्सव मनाने पर जोर दिया।
गणेशोत्सव में सामाजिक सद्भाव को प्राथमिकता
मंत्री गिरीश महाजन पुणे में श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई सार्वजनिक गणपति ट्रस्ट की ओर से आयोजित नेशनल गणेशोत्सव प्रतियोगिता के पुणे विभाग के पुरस्कार वितरण समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि गणेशोत्सव ऐसा पर्व है, जो समाज के विभिन्न वर्गों को एक साथ जोड़ने का काम करता है। लिए उत्सव मनाते समय समाज के सभी वर्गों की भावनाओं का सम्मान करना और सामाजिक सद्भाव बनाए रखना जरूरी है।

ध्वनि प्रदूषण के नियमों का पालन जरूरी
गिरीश महाजन ने कहा कि गणेशोत्सव के माध्यम से सामाजिक और पर्यावरणीय जागरूकता को प्रभावी ढंग से बढ़ावा दिया जा सकता है। उन्होंने आयोजकों और गणेश मंडलों से अपील की कि ध्वनि प्रदूषण को लेकर न्यायालय द्वारा निर्धारित नियमों और सीमाओं का पालन किया जाए। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए ऐसा गणेशोत्सव आयोजित करने की आवश्यकता बताई, जिससे धार्मिक उत्साह के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश भी समाज तक पहुंचे।
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युवाओं में बढ़ती नशे की लत पर चिंता
इस दौरान मंत्री महाजन ने युवा पीढ़ी में बढ़ती नशे की लत को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे से दूर रखना केवल किसी एक संस्था या परिवार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर प्रयास करना होगा। उन्होंने गणेशोत्सव जैसे बड़े सामाजिक मंचों के माध्यम से युवाओं में सकारात्मक विचार, सामाजिक जिम्मेदारी और नशामुक्ति को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।
पर्यावरण और सामाजिक संदेश बने गणेशोत्सव की पहचान
मंत्री गिरीश महाजन की अपील का मुख्य संदेश यही रहा कि गणेशोत्सव केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित न रहे, बल्कि यह सामाजिक एकता, पर्यावरण संरक्षण और युवा जागरूकता का प्रभावी माध्यम बने। न्यायालय के नियमों का सम्मान करते हुए उत्सव मनाने से धार्मिक परंपरा और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच बेहतर संतुलन कायम किया जा सकता है।



