BRICS पर्यावरण बैठक: साझा पर्यावरण प्राथमिकताओं पर भारत की पहल
BRICS Environment Meeting: India's Key Initiative on Shared Environmental Priorities
नई दिल्ली: भारत की BRICS प्रेसीडेंसी के तहत BRICS देशों के बीच पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास से जुड़ी साझा प्राथमिकताओं पर आज से नई दिल्ली में महत्वपूर्ण चर्चा शुरू हो रही है। दो दिनों तक चलने वाली इन बैठकों में पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, सर्कुलर इकॉनमी और आपदा प्रबंधन जैसे अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। BRICS एनवायरनमेंट वर्किंग ग्रुप की बैठक आज नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित की जा रही है। इसके साथ ही पर्यावरण मंत्रियों की 12वीं बैठक कल होगी। आज होने वाले कार्यक्रम में उद्घाटन सत्र के अलावा वरिष्ठ अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठकें भी आयोजित की जाएंगी।
पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन पर साझा रणनीति
बैठक के दौरान BRICS देशों के बीच पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए साझा रणनीति विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। पर्यावरण वर्किंग ग्रुप के साथ क्लाइमेट चेंज एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर कॉन्टैक्ट ग्रुप के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक भी होगी। इन बैठकों का उद्देश्य सदस्य देशों के अनुभवों और सफल मॉडलों को साझा करते हुए पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए प्रभावी और टिकाऊ समाधान तलाशना है।

भारत ने तय की चार प्रमुख पर्यावरणीय प्राथमिकताएं
भारत ने अपनी BRICS प्रेसीडेंसी के दौरान पर्यावरण वर्किंग ग्रुप के लिए चार प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की है। इन क्षेत्रों को पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
1. सतत जीवनशैली को बढ़ावा
पहली प्राथमिकता के तौर पर सस्टेनेबल लाइफस्टाइल को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। इसके तहत पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली, जिम्मेदार उपभोग और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा देने पर चर्चा होगी।
2. वनीकरण, फायर मैनेजमेंट और डिजास्टर रेजिलिएंस
दूसरे प्रमुख क्षेत्र में एफॉरेस्टेशन, फॉरेस्ट फायर मैनेजमेंट और डिजास्टर रेजिलिएंस शामिल हैं। जंगलों की सुरक्षा, वनाग्नि की रोकथाम और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की क्षमता को मजबूत करने के लिए सहयोग बढ़ाने पर विचार किया जाएगा।
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3. सर्कुलर इकॉनमी
तीसरी प्राथमिकता सर्कुलर इकॉनमी है। संसाधनों के बेहतर उपयोग, कचरे में कमी, रीसाइक्लिंग और पुन: उपयोग को बढ़ावा देने के लिए BRICS देशों के बीच सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा होगी।
4. जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन पर जोर
चौथे क्षेत्र के रूप में क्लाइमेट चेंज अडैप्टेशन को प्राथमिकता दी गई है। बदलती जलवायु के प्रभावों से निपटने और संवेदनशील क्षेत्रों तथा समुदायों की क्षमता बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की जाएगी।
पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने में BRICS सहयोग अहम
BRICS देशों के सामने जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण, वनाग्नि, प्राकृतिक आपदाओं और संसाधनों के टिकाऊ इस्तेमाल जैसी कई साझा चुनौतियां हैं। ऐसे में भारत की अध्यक्षता में हो रही यह बैठक पर्यावरणीय सहयोग को नई दिशा देने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कल होने वाली पर्यावरण मंत्रियों की 12वीं बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों की चर्चाओं के आधार पर आगे की प्राथमिकताओं और सहयोग के क्षेत्रों को लेकर महत्वपूर्ण विचार-विमर्श होने की उम्मीद है।



