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2047 तक विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका अहम: उपराष्ट्रपति

Youth play a pivotal role in building a developed India by 2047: Vice President C.P. Radhakrishnan

चेन्नई: उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा है कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में देश के युवाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने युवाओं से केवल भविष्य की चुनौतियों के लिए खुद को तैयार करने के बजाय भविष्य को आकार देने वाला नेतृत्व विकसित करने का आह्वान किया। उपराष्ट्रपति चेन्नई में SRM इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के कॉन्वोकेशन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने शिक्षा, अनुसंधान, तकनीक और राष्ट्र निर्माण के बीच मजबूत संबंधों पर जोर दिया।

AI और क्वांटम टेक्नोलॉजी निभाएंगी निर्णायक भूमिका

सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम टेक्नोलॉजी और अन्य रणनीतिक तकनीकें भारत के विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने युवाओं से इन तकनीकों को केवल रोजगार या व्यक्तिगत करियर के नजरिए से देखने के बजाय इनके माध्यम से देश की नई विकास क्षमता तैयार करने की अपील की। उनका संदेश था कि युवा तकनीकी बदलाव के केवल उपभोक्ता न बनें, बल्कि नवाचार और नए समाधान तैयार करने वाले नेतृत्वकर्ता बनें।

‘नेशन फर्स्ट’ बने मार्गदर्शक सिद्धांत

उपराष्ट्रपति ने युवाओं से अपने कार्य और निर्णयों में ‘नेशन फर्स्ट’ यानी राष्ट्र सर्वोपरि के सिद्धांत को मार्गदर्शक बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत सफलता के साथ राष्ट्र के व्यापक हितों को ध्यान में रखना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति तभी सार्थक होगी, जब शिक्षा, तकनीकी विकास और अनुसंधान का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

Youth play a pivotal role in building a developed India by 2047; Vice President C.P. Radhakrishnan
Youth play a pivotal role in building a developed India by 2047; Vice President C.P. Radhakrishnan

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समाज के फायदे में इस्तेमाल हो रिसर्च

सी. पी. राधाकृष्णन ने अनुसंधान की उपयोगिता पर जोर देते हुए कहा कि रिसर्च का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होता है, जब उसका इस्तेमाल समाज के फायदे के लिए किया जाए। उन्होंने कहा कि जब वैज्ञानिक और तकनीकी अनुसंधान नागरिकों के जीवन में व्यावहारिक बदलाव लाता है और लोगों को उसका प्रत्यक्ष लाभ मिलता है, तभी अनुसंधान की सबसे बड़ी सफलता मानी जा सकती है।

विकसित भारत के लिए युवा शक्ति जरूरी

उपराष्ट्रपति के संबोधन में युवाओं, तकनीकी नवाचार और राष्ट्र निर्माण के बीच संबंध को प्रमुखता दी गई। उन्होंने युवाओं को बदलती तकनीकी दुनिया के अनुरूप ज्ञान और कौशल विकसित करने के साथ-साथ देश की सामाजिक और आर्थिक जरूरतों को समझने की भी अपील की। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत की युवा शक्ति, आधुनिक तकनीक और अनुसंधान क्षमता मिलकर 2047 के विकसित भारत के सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।


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