‘इको-एजुकेशनल हब’ से पर्यावरण शिक्षा को मिलेगी नई उड़ान
‘Eco-Educational Hub’ to Give New Momentum to Environmental Education
लखनऊ: केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज लखनऊ स्थित सीएसआईआर-एनबीआरआई के बंथरा कैंपस में ‘इको-एजुकेशनल हब’ का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत के वैज्ञानिक संस्थानों की भूमिका अब केवल प्रयोगशालाओं में अनुसंधान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे समाज की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप उपयोगी समाधान और प्रौद्योगिकियां विकसित कर रहे हैं।
अपने संबोधन में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ‘इको-एजुकेशनल हब’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस व्यापक परिकल्पना को आगे बढ़ाता है, जिसमें विज्ञान, सतत विकास और जनभागीदारी को एक साथ जोड़ने पर जोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि भारत की समृद्ध वानस्पतिक और जैव विविधता की विरासत को संरक्षित करना केवल वैज्ञानिक संस्थानों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज और आने वाली पीढ़ियों की भागीदारी भी जरूरी है।
पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक का समन्वय जरूरी
डॉ. सिंह ने वैज्ञानिक संस्थानों से आह्वान किया कि वे उभरती हुई पर्यावरणीय और जलवायु संबंधी चुनौतियों का सामना करने के लिए पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करें। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता जैसे विषय आज पूरी दुनिया के सामने महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं। ऐसे में वैज्ञानिक अनुसंधान को समाज की जरूरतों से जोड़ना समय की मांग है।
किसानों और उद्योगों के लिए उपयोगी तकनीक विकसित करने पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने सीएसआईआर-एनबीआरआई के अनुसंधान एवं विकास कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान का वास्तविक प्रभाव तब दिखाई देता है, जब उसका लाभ किसानों, उद्योगों और आम जनता तक पहुंचे। उन्होंने संस्थान द्वारा विकसित वैज्ञानिक ज्ञान को उपयोगी प्रौद्योगिकियों और उत्पादों में बदलने के प्रयासों की भी प्रशंसा की।
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विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए बनेगा अनूठा मंच
मीडिया से बातचीत में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ‘इको-एजुकेशनल हब’ विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में विकसित होगा। यहां लोगों को पर्यावरण शिक्षा, जैव विविधता संरक्षण और अनुभवात्मक अधिगम के माध्यम से प्रकृति एवं वैज्ञानिक अनुसंधान को करीब से समझने का अवसर मिलेगा।
भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षण की दिशा में कदम
‘इको-एजुकेशनल हब’ का उद्देश्य केवल पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ प्रकृति संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ना भी है। इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों और युवाओं को पर्यावरणीय चुनौतियों को समझने तथा उनके संभावित वैज्ञानिक समाधानों से परिचित कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
कुल मिलाकर, लखनऊ में शुरू हुआ यह ‘इको-एजुकेशनल हब’ विज्ञान, प्रकृति और समाज के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।



