Trending

महिला आरक्षण की 2029 से पहले परिसीमन पूरा करना जरूरी-किरेन रिजिजू

Rijiju’s Major Statement on Women's Reservation: Delimitation Must Be Completed Before 2029

नई दिल्ली: देश में महिला आरक्षण को जल्द लागू करने की मांग के बीच संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने शिरोमणि अकाली दल (SAD) की मांग का स्वागत किया है। रिजिजू ने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए सभी राजनीतिक दलों को मिलकर काम करना होगा और निष्पक्ष एवं समान परिसीमन सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि सभी राज्यों को समान प्रतिनिधित्व मिल सके।

शिरोमणि अकाली दल ने उठाई महिला आरक्षण लागू करने की मांग

शिरोमणि अकाली दल ने चंडीगढ़ में हुई वरिष्ठ नेताओं की बैठक के दौरान देश में महिला आरक्षण विधेयक को तत्काल लागू करने की मांग रखी। पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के साथ-साथ निष्पक्ष और समान परिसीमन भी जरूरी है। सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि पार्टी संसद में सरकार द्वारा सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत वृद्धि के प्रस्ताव का समर्थन करती है। उनका कहना है कि परिसीमन की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिससे किसी भी राज्य के प्रतिनिधित्व के साथ असमानता न हो।

2029 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू करने की चुनौती

रिजिजू ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की सोशल मीडिया पोस्ट का जवाब देते हुए महिला आरक्षण के क्रियान्वयन को लेकर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि वर्ष 2029 में होने वाले आम चुनावों में महिला आरक्षण लागू करने के लिए नवीनतम प्रकाशित जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करना आवश्यक है। रिजिजू के अनुसार, नारी शक्ति वंदन अधिनियम परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लागू किया जा सकेगा।

जनगणना के आंकड़ों पर टिकी परिसीमन प्रक्रिया

संसदीय कार्य मंत्री ने बताया कि जनगणना के आंकड़ों को प्रकाशित करने की प्रक्रिया वर्तमान में चल रही है। उन्होंने कहा कि जाति आधारित जनगणना के कारण आंकड़ों को अंतिम रूप से प्रकाशित करने में अपेक्षाकृत अधिक समय लग सकता है। इसी वजह से महिला आरक्षण के कार्यान्वयन में देरी की संभावना भी जताई गई है। रिजिजू ने संकेत दिया कि यदि परिसीमन और जनगणना की प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं होती है तो महिला आरक्षण को लागू करने में और समय लग सकता है।

यह भी पढ़िए : ‘माफिया के हाथों चल रही सरकार!’- पंजाब AAP पर भाजपा ने खोला मोर्चा

 

2034 तक इंतजार की आशंका पर सियासी बहस

महिला आरक्षण के कार्यान्वयन को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि इसे 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू किया जा सकेगा या नहीं। रिजिजू ने कहा कि यदि आवश्यक प्रक्रियाओं में देरी होती है तो महिला आरक्षण के लागू होने में काफी समय लग सकता है और 2034 के आम चुनाव से पहले इसके लागू होने की संभावना प्रभावित हो सकती है। इस मुद्दे ने एक बार फिर महिला राजनीतिक प्रतिनिधित्व, परिसीमन और जनगणना को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज कर दी है।

रिजिजू ने यह भी कहा कि संविधान संशोधनों के साथ लोकसभा में पेश किए गए परिसीमन विधेयक 2026 के तहत महिला आरक्षण के कार्यान्वयन की पद्धति का प्रस्ताव किया गया है। अब निगाहें जनगणना के आंकड़ों के अंतिम प्रकाशन और उसके बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया पर टिकी हैं। महिला आरक्षण को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक सहमति किस दिशा में आगे बढ़ती है, यह आने वाले समय में महत्वपूर्ण होगा।

महिला आरक्षण कानून का क्या है उद्देश्य?

महिला आरक्षण कानून का उद्देश्य संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाना है। इसके लागू होने के बाद महिलाओं के लिए निर्धारित सीटों पर आरक्षण की व्यवस्था प्रभावी होगी। हालांकि, इसके वास्तविक क्रियान्वयन की प्रक्रिया परिसीमन और संबंधित संवैधानिक प्रावधानों से जुड़ी हुई है।

महिला आरक्षण को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी के साथ-साथ जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया निर्णायक भूमिका निभाएगी। SAD की तत्काल लागू करने की मांग और रिजिजू के समर्थन के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Back to top button

Adblock Detected

Please consider supporting us by disabling your ad blocker