पिनहोल प्यूपिलोप्लास्टी से लौटी मरीज की खोई रोशनी
Patient Regains Lost Vision Through Pinhole Pupilloplasty
नवी मुंबई/सान्वी देशपांडे : वाशी निवासी 62 वर्षीय सुभाष विष्णु चाचा की लगभग खो चुकी आंखों की रोशनी डॉ. अग्रवाल आई हॉस्पिटल की विशेषज्ञ टीम ने एक दुर्लभ और जटिल डबल सर्जरी के माध्यम से सफलतापूर्वक वापस लौटा दी। मरीज की बाईं आंख में पूरी तरह विकसित मोतियाबिंद था, जबकि कॉर्निया पर गंभीर अल्सर होने के कारण उनकी दृष्टि लगभग समाप्त हो चुकी थी। इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में डॉक्टरों ने मोतियाबिंद सर्जरी के साथ पिनहोल प्यूपिलोप्लास्टी (PPP) नामक विशेष प्रक्रिया को एक ही ऑपरेशन में सफलतापूर्वक अंजाम दिया। सर्जरी से पहले मरीज की स्थिति बेहद गंभीर थी। उन्हें चेहरे पहचानने, पढ़ने और बिना सहारे चलने में भी कठिनाई होती थी। कई विशेषज्ञों से परामर्श के बाद वे डॉ. अग्रवाल आई हॉस्पिटल, वाशी पहुंचे, जहां डॉ. प्रतीक यशवंत गोगरी ने प्रारंभिक जांच कर उन्हें वडाला स्थित विशेषज्ञ सर्जिकल टीम के पास भेजा।

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मोतियाबिंद हटाने के साथ की पिनहोल प्यूपिलोप्लास्टी
वडाला सेंटर में मोतियाबिंद विशेषज्ञ डॉ. स्मित एम. बावेरिया और उनकी टीम ने करीब एक घंटे तक चली जटिल सर्जरी में मोतियाबिंद हटाने के साथ पिनहोल प्यूपिलोप्लास्टी की। इस तकनीक में पुतली का आकार छोटा और केंद्रित किया जाता है, जिससे कॉर्निया के क्षतिग्रस्त हिस्से से आने वाली बिखरी रोशनी कम होकर रेटिना तक स्पष्ट रूप से पहुंचती है। इससे मरीज को कॉर्निया प्रत्यारोपण की आवश्यकता भी नहीं पड़ी। सर्जरी के बाद मरीज की दूर की दृष्टि 6/9 और निकट दृष्टि N8 तक सुधर गई। अब वे आसानी से चेहरे पहचान सकते हैं, टीवी देख सकते हैं और बिना किसी सहायता के दैनिक कार्य कर पा रहे हैं।
ऐसा लग रहा है जैसे मेरी जिंदगी फिर से लौट आई है-मरीज
डॉ. वंदना जैन ने कहा कि जटिल नेत्र रोगों में बहु-विषयक उपचार और आधुनिक तकनीक बेहतर परिणाम देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वहीं, पद्मश्री डॉ. एस. नटराजन ने बताया कि इस प्रकार की सर्जरी अत्यधिक अनुभव, सटीक योजना और विशेषज्ञ टीम की मांग करती है। मरीज सुभाष विष्णु चाचा ने सफल उपचार के बाद कहा, “ऐसा लग रहा है जैसे मेरी जिंदगी फिर से लौट आई है।”



