विक्रांत पाटिल ने सदन में उठाया किसानों के मुआवजे का मुद्दा
Vikrant Patil Raises Issue of Farmers' Compensation in the House
नवी मुंबई/सान्वी देशपांडे : विरार-अलीबाग मल्टीमॉडल कॉरिडोर परियोजना से प्रभावित किसानों को वर्ष 2023 में तय किए गए मुआवजे के अनुसार ही भुगतान किया जाए और मुआवजे में किसी प्रकार की कटौती न की जाए। यह मांग विधान परिषद सदस्य (MLA) विक्रांत पाटिल ने मानसून सत्र के दौरान एक तारांकित प्रश्न के माध्यम से सरकार के समक्ष उठाई। उन्होंने परियोजना से प्रभावित किसानों की विभिन्न समस्याओं को भी सदन में प्रमुखता से रखा।
2023 में निर्धारित मुआवजा दरों को कम करने का प्रस्ताव
अपने प्रश्न में विक्रांत पाटिल ने सरकार से पूछा कि क्या वर्ष 2023 में निर्धारित मुआवजा दरों को कम करने का प्रस्ताव विचाराधीन है तथा भूमि अधिग्रहण में हुई देरी के कारण किसानों को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए अतिरिक्त ‘विलंब मुआवजा’ देने पर सरकार विचार कर रही है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि सरकार इस विषय पर सकारात्मक है तथा न्यायालय के निर्देशों के अनुसार भूमि के पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने बताया कि पालघर और ठाणे जिलों में पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि रायगढ़ जिले में यह कार्य प्रगति पर है।
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राजस्व मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक उद्देश्य के लिए निजी भूमि अधिग्रहण के मूल्यांकन से संबंधित सरकारी परिपत्र को 24 दिसंबर 2024 को उच्च न्यायालय ने निरस्त कर दिया था। इसके बाद न्यायालय के आदेशानुसार तीनों जिलों में भूमि का पुनर्मूल्यांकन किया जा रहा है। साथ ही, महाराष्ट्र स्टेट हाईवेज़ अधिनियम, 1955 के तहत भूमि मालिकों को बढ़े हुए मूल्यांकन के लिए मध्यस्थ (Arbitrator) एवं मंडल आयुक्त के समक्ष राहत मांगने का प्रावधान भी उपलब्ध है।
वर्ष 2023 की मुआवजा दरों को बरकरार रखा जाए – विक्रांत पाटिल
विक्रांत पाटिल ने सरकार से मांग की कि वर्ष 2023 की मुआवजा दरों को बरकरार रखा जाए अथवा वर्तमान बाजार मूल्य और महंगाई को ध्यान में रखते हुए किसानों को न्यायोचित मुआवजा दिया जाए। उन्होंने राज्य स्तर पर एक विशेष समिति गठित कर अधिग्रहण प्रक्रिया में उत्पन्न भ्रम को दूर करने की भी मांग की।
उन्होंने कहा कि सरकार ने इस विषय पर सकारात्मक रुख अपनाया है और प्रभावित किसानों को न्याय मिलने तक उनका फॉलो-अप जारी रहेगा। इस जवाब के बाद विशेष रूप से रायगढ़ जिले के सैकड़ों किसानों में राहत और उम्मीद की भावना देखी जा रही है।



