Shivaji Jayanti-आस्था और राष्ट्रभक्ति का महापर्व
Shivaji Jayanti - A Great Festival of Faith and Patriotism

नवी मुंबई/सान्वी देशपांडे : आज हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज की 396वीं जयंती पूरे भारत और विदेशों में उत्साह, आस्था और सम्मान के साथ मनाई गई। महाराष्ट्र के किलों, मंदिरों, चौक-चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर सुबह से ही लोगों ने उनकी प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित कर नमन किया। ढोल-ताशे, लेझीम, भव्य शोभायात्राएं और ऐतिहासिक झांकियां इस अवसर का मुख्य आकर्षण रहीं। स्कूल-कॉलेजों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहां विद्यार्थियों ने शिवचरित्र पर भाषण, नाटक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर वीरता और राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया। सामाजिक संगठनों और युवा मंडलों ने रक्तदान शिविर, स्वच्छता अभियान और सेवा गतिविधियां आयोजित कर महाराज के आदर्शों को समाज तक पहुंचाने का प्रयास किया।
लोग उन्हें राजा नहीं बल्कि लोकनायक और संरक्षक के रूप में देखते हैं।
शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी 1630 को शिवनेरी किले में हुआ था। माता राजमाता जिजाबाई और गुरु समर्थ रामदास के संस्कारों ने उनके व्यक्तित्व को आकार दिया। उन्होंने कम उम्र में ही स्वराज्य का संकल्प लिया और अत्यंत संगठित प्रशासन, सशक्त नौसेना, गनिमी कावा युद्धनीति और प्रजाहितकारी शासन की स्थापना की। महिलाओं के सम्मान, धर्मनिरपेक्षता और न्यायप्रियता के उनके नियम उस समय के शासकों से बिल्कुल अलग थे। यही कारण है कि भारत में हर वर्ग और हर धर्म के लोग उन्हें राजा नहीं बल्कि लोकनायक और संरक्षक के रूप में देखते हैं। उन्होंने जनता को सुरक्षा, सम्मान और न्याय दिया — इसलिए लोगों का विश्वास उनके प्रति आस्था में बदल गया। कई लोगों के लिए वे केवल ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि आदर्श शासक और प्रेरणा स्वरूप हैं।
विदेश में शिवभक्ति का उत्साह
विदेशों में बसे भारतीयों ने भी शिवजयंती मनाकर मराठी परंपरा और भारतीय इतिहास का गौरव बढ़ाया। इतिहासकारों और समाजसेवियों ने कहा कि शिवाजी महाराज का प्रशासन, युद्धनीति, महिलाओं के सम्मान और धार्मिक सहिष्णुता का विचार आज भी समाज के लिए प्रेरणा है। हर वर्ष की तरह इस बार भी “जय भवानी, जय शिवाजी” के नारों से वातावरण गूंज उठा और लोगों ने उनके स्वराज्य, साहस और न्यायप्रियता के आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।



