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President Murmu: राष्ट्रपति को नवी मुंबई के वकील का खत

President Murmu receives letter from Navi Mumbai lawyer

नवी मुंबई/प्रतिनिधि: माननीय द्रौपदी मुर्मू के आधिकारिक हैंडल से सरकार द्वारा दलितों, पिछड़ों और वंचितों के लिए कार्य करने संबंधी पोस्ट पर सार्वजनिक बहस तेज हो गई है। एक वर्ग का कहना है कि राष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद पर रहते हुए पक्षपातपूर्ण प्रतीत होने वाले वक्तव्य संस्थागत निष्पक्षता पर प्रश्न खड़े करते हैं। लेखक का तर्क है कि भारत में सामान्य वर्ग का योगदान भी उतना ही महत्वपूर्ण है, परंतु उसे न तो समान अवसरों की गारंटी मिली और न ही नीतिगत संतुलन। आरक्षण को 77 वर्ष बीतने के बावजूद लक्षित वर्गों की स्थिति में अपेक्षित सुधार न होने पर प्रणाली की जवाबदेही तय करने की मांग की गई है।

EWS आरक्षण की शर्तों पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि आर्थिक मानक सभी वर्गों पर समान रूप से लागू होने चाहिए। साथ ही, यूजीसी नियमों, कथित झूठे मामलों और न्यायिक प्रक्रिया में निष्पक्षता को लेकर चिंता व्यक्त की गई। अंत में संवैधानिक संस्थाओं से जाति-आधारित पूर्वाग्रह से दूर रहकर निर्णय लेने की अपील की गई।

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