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Navi Mumbai: कई दिग्गजों की हार, क्या होगा बागियों का भविष्य

Several stalwarts defeated in Navi Mumbai, what does the future hold for the rebels?

नवी मुंबई/सुधीर शर्मा: नवी मुंबई मनपा चुनाव जहां बीजेपी के कुछ नए चेहरों के लिए जीत का उत्साह देकर गया वहीं कई दिग्गज चेहरों पर हार की निराशा देखने को मिली. नेरुल में एनसीपी छोड़कर शिंदे शिवसेना के टिकट पर चुनाव लड़े नामदेव भगत को हार का मुंह देखना पड़ा. उन्हें बीजेपी के गिरीश म्हात्रे ने भारी मतों से हरा दिया. शिवसेना पैनल में नामदेव भगत की पत्नी इंदुमती भगत को भी पराजय मिली. वहीं तुर्भे में कई वर्षों से नगरसेवक रहे बीजेपी प्रत्याशी अमित मेढ़कर-अपने रिश्तेदारों के समस्त पैनल के हार गए हैं. यहां शिवसेना के सुरेश कुलकर्णी का पैनल हाबी रहा. तुर्भे गांव में चंद्रकांत पाटिल भी बूरी तरह हारे हैं. वाशी में यूबीटी छोड़कर बीजेपी से चुनाव लड़ने वाले विट्ठल मोरे के बेटे अवधूत मोरे और एड निलेश भोजने भी पूरे पैनल के साथ पराजित हुए हैं.

शिवसेना के दिग्गज नगरसेवकों में से सबसे आगे सानपाडा जुईनगर नेरूल के रंगनाथ औटी, काशीनाथ पवार, सोमनाथ वास्कर, कोमल वास्कर, दिलीप घोड़ेकर,अश्विनी विजय माने, संजय भोसले और बीजेपी छोड़कर शिवसेना के टिकट पर चुनाव लड़े दत्ता घंगाले-अश्विनी घंगाले, शिरवणे से सुहासिनी नायडू, रविंद्र सावंत जैसे स्थानीय नेताओं को हार का मूंह देखना पड़ा है. ऐरोली में जहां अधिकांश ठिकानों पर शिवसेना जीती है वहीं हाल ही में यूबीटी से आए एमके मढ़वी-करण मढ़वी- जो कई वर्षों से यहां नगरसेवक थे-पूरे पैनल के साथ विफल हुए हैं. बीजेपी के कई दिग्गजों को भी हार झेलनी पड़ी है. दिघा के महाराजा और बीजेपी प्रत्याशी नवीन गवते, अपर्णा गवते और विरेश सिंह का पैनल भी शिवसेना से बुरी तरह पराजित हुआ है.

अपक्ष उम्मीदवारों में बेलापुर से सीवी रेड्डी, सानपाड़ा से पांडुरंग आमले,भावेश पाटिल को अपेक्षा से अधिक वोटों से हारना पड़ा है. इतना ही नहीं एनसीपी के नए जिलाध्यक्ष भरत जाधव के बेटे आदित्य जाधव भी अपनी सीट नहीं बचा पाए हैं. ये ऐसे उम्मीदवार हैं जिनकी सभी उम्मीदों पर पानी फिर गया है.फिलहाल गणेश नाईक के नेतृत्व में बीजेपी सत्ता हासिल करने में सफल रही है. शिवसेना दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गयी है. जाहिर है नवी मुंबई और पनवेल में सत्ता बीजेपी के हाथ होगी. शिवसेना विपक्ष की जिम्मेदारी संभाल सकती है .लेकिन असली सवाल तो बीजेपी और शिवसेना के बागियों का है कि आखिर वे अब अपनी भयानक हार के बाद कौन सा रुख अपनाएंगे..

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