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Pune: में 20 बच्चों को कमरे में बंद कर चली गई आंगनवाड़ी कार्यकर्ता — रोते-बिलखते रहे मासूम, अभिभावकों में रोष

in Pune \ an Anganwadi worker locked 20 children in a room, leaving them weeping and crying, angering parents.

पुणे; प्रतिनिधि: पुणे में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बच्चों को कमरे में बंद कर कथित रूप से यहां महिला आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका ने ग्राम पंचायत की मीटिंग में शामिल होने जाना था यह कारण सामने बताया जा रहा है करीब 20 मासूम बच्चे घंटों तक बंद कमरे में रोते-बिलखते रहे। इस घटना के सामने आते ही स्थानीय अभिभावकों और नागरिकों में भारी आक्रोश फैल गया है।

कैसे खुला मामला?
स्थानीय लोगों के अनुसार, पास के घरों में रहने वालों ने बच्चों के रोने और चीखने की आवाजें सुनीं। काफी देर तक आवाजें कम न होने पर लोगों ने आंगनवाड़ी केंद्र के पास जाकर दरवाज़ा खटखटाया। जवाब न मिलने पर उन्हें शक हुआ और अभिभावकों को सूचना दी गई। कुछ अभिभावक मौके पर पहुंचे और पंचायत प्रतिनिधियों के साथ मिलकर दरवाजा खुलवाया। अंदर का दृश्य देखकर सभी स्तब्ध रह गए—करीब 3 से 6 साल आयु वर्ग के बच्चे एक छोटे से कमरे में सहमे हुए बैठे थे और लगातार रो रहे थे।अभिभावकों के अनुसार, बच्चे न सिर्फ कमरे में बंद थे, बल्कि कई भूखे भी मिले। उन्हें इस बात की भी चिंता थी कि अगर किसी बच्चे की तबीयत बिगड़ जाती, तो जिम्मेदारी कौन लेता?

अभिभावकों का गुस्सा भड़का
घटना से नाराज अभिभावकों ने तुरंत विभागीय अधिकारियों से शिकायत की। उनका कहना है कि यह गंभीर लापरवाही है, और ऐसी कार्यकर्ता बच्चों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है। स्थानीय महिला मंडल और सामाजिक संगठनों ने भी इस घटना की निंदा की और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

आंगनवाड़ी विभाग की प्रतिक्रिया
सूचना मिलने के बाद ICDS विभाग की एक टीम मौके पर पहुंची। प्रारंभिक जांच में कार्यकर्ता की अनुपस्थिति की पुष्टि हुई। बताया जा रहा है कि विभाग ने कार्यकर्ता को निलंबित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और विस्तृत पूछताछ के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

जांच के आदेश, सुरक्षा पर उठे सवाल
इस घटना के बाद एक बार फिर आंगनवाड़ियों की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी पर सवाल खड़े हो गए हैं। अभिभावकों का कहना है कि अगर सरकारी व्यवस्था बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकती, तो ऐसे केंद्रों पर भरोसा कैसे किया जाए?

अगला कदम

जिले के बाल संरक्षण अधिकारी ने विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। अभिभावकों ने मांग की है कि आंगनवाड़ी केंद्रों में CCTV और नियमित निरीक्षण अनिवार्य किया जाए कार्यकर्ता के खिलाफ धारा 75 (बाल क्रूरता) के तहत FIR की संभावना भी जताई जा रही है।

घटना ने पूरे क्षेत्र को हिलाकर रख दिया है, और लोग उम्मीद कर रहे हैं कि दोषियों पर कठोर कार्रवाई होगी ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो।

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