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BJP–Shiv Sena Mahayuti: अंदर लड़ाई, बाहर प्यार | गठबंधन का सच!

Truth behind the BJP–Shiv Sena Mahayuti-love in public, conflict in private. Is the Maharashtra alliance truly united or divided within?

Mahayuti Alliance / महाराष्ट्र Maharashtra politics में विधानसभा चुनाव के बाद अब महानगर पालिका-नगर पंचायत चुनाव की बारी है. हर तरफ कयास लगाए जा रहे हैं कि महायुति में गठबंधन होगा या नहीं…अलबत्ता जो तस्वीर दिख रही है, उसमें महायुति (BJP–Shiv Sena Mahayuti ) के घटक दलों में गजब का प्यार दिख रहा है. पार्टी नेता कह रहे हैं कि हम साथ साथ हैं. लेकिन अंदरखाने की तस्वीर भयानक है. सूत्र बताते हैं कि शिवसेना और बीजेपी में भले ही बाहर सब कुछ प्यारा-प्यारा और साथ-साथ दिख रहा है लेकिन अंदर कोलाहल है. 32 महानगर पालिकाओं के चुनाव की पृष्ठभूमि में बीजेपी नेता साफ कह रहे हैं कि उन्हें शिवसेना के साथ चुनाव नहीं लड़ना है. उन्हें इस बात का गुमान है कि हर चुनाव जब पीएम मोदी के चेहरे और विकास तथा राष्ट्रवाद पर जीता जा रहा है तब अपनी ताकत और अपना जनाधार बांटने की जरूरत क्या है.  हालांकि शिवसेना का सवाल है कि साथ नहीं लड़ने के फैसले का अधिकार स्थानीय नेताओं को किसने दिया.

पनवेल में गठबंधन, नवी मुंबई में मित्रवत लड़ाई!

पार्टी के अंदरुनी सूत्रों की मानें तो बीजेपी ऐसी महानगर पालिकाओं में गठबंधन नहीं चाहती जहां भाजपा का डामिनेशन या कब्जा पहले से है. इसमें पनवेल और नवी मुंबई मनपा शामिल हैं. दोनों प्रमुख महानगर पालिकाओं में बीजेपी विधायकों का वर्चस्व है. पनवेल में जहां कांग्रेस से आए विधायक प्रशांत ठाकुर ने पूरी सत्ता बीजेपी को सौंपी है वहीं नवी मुंबई में एनसीपी से आए विधायक गणेश नाईक ने 50 नगरसेवकों के साथ मनपा की सत्ता भाजपा के हवाले की है. नवी मुंबई में शिवसेना के 40 से अधिक नगरसेवक हैं, जबकि पनवेल में यह संख्या बेहद कम है. स्थानीय नेता चाहते हैं कि ऐसे ठिकानों पर चुनाव मित्रवत हो, रिजल्ट के बाद सत्ता के लिए आवश्यकता अनुसार गठबंधन तय हो. हालांकि शिवसेना नेता इसे मानने को तैयार नहीं. दलील है कि फिर ठाणे और बीएमसी में गठबंधन क्यों होना चाहिए जहां हमेशा से शिवसेना की सत्ता रही है. असलियत ये है कि मुंबई मनपा पर बीजेपी की नजर बहुत पहले से है. बीजेपी के लिए बीएमसी कई राज्यों के मुकाबले ज्यादा जरूरी है, आर्थिक राजधानी की महानगर पालिका पर कब्जा, बीजेपी के लिए सोने पर सुहागा होगा.खैर वाद-प्रतिवाद के कारण चुनाव की घोषणा से पहले ही शिवसेना-बीजेपी BJP Shiv Sena conflict में सर फुटौवल शुरू हो गयी है. नगरसेवक का चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे पदाधिकारी और कार्यकर्ता अपना फायदा देखकर मनमाफिक पैनल बनाने में जुटे हैं कि वे किसके साथ चुनाव लड़ेंगे.

पिछले चुनाव में बहुमत के करीब होकर भी बीजेपी ने शिवसेना का महापौर बिठाया था, इस बार नई ताकत के साथ ज्यादा हासिल करने की तैयारी है.कार्यकर्ताओं के मन में भी एक दूसरे दल के प्रति टकराव और नफरत साफ दिखने लगी है.चुनाव में इस गतिरोध के और बढ़ने के आसार हैं.

एक दूजे के खिलाफ बढ़ रही अदावत

मुंबई, पनवेल, नवी मुंबई में राजनीतिक टकराव तेज होते दिख रहे हैं.महाविकास आघाड़ी की तुलना में महायुति दलों में अदावतें बढ़ रही हैं. नवी मुंबई शिवसेना जिलाप्रमुख किशोर पाटकर-और गणेश नाईक के बीच चल रहा वार-पलटवार, तू तू मैं मैं जगजाहिर है. शिवेसना उपनेता विजय चौगुले और खुद बीजेपी विधायक मंदाताई म्हात्रे भी नाईक परिवार पर हमला करने में पीछे नहीं हैं. इससे स्थानीय कार्यकर्ताओं के मन में भी एक दूसरे दल के प्रति टकराव और नफरत साफ दिखने लगी है.सत्तारूढ़ दलों के साझा कार्यक्रमों में भी एक दूसरे दल के नेता की गैरहाजिरी तेजी से बढ़ रही राजनीतिक अदावतों की तस्दीक करती हैं..  जाहिर यह नफरत सिर्फ चुनाव की नहीं है, बल्कि राजनीति की आड़ में चल रही निजी नफा नुकसान की ज्यादा दिखती है. मनपा चुनाव में इस गतिरोध के और बढ़ने के आसार हैं.

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